केरल में जज के नाबालिग बेटे की कार से युवक की मौत, पुलिस की लापरवाही की जांच करने पहुंचे ADGP

कोच्चि मे जज के 17 वर्षीय बेटे की कार दुर्घटना मे जयबालकृष्णन की मौत हुई। पुलिस की लापरवाही की जांच के लिए ADGP पहुंचे। परिवार ने कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया।

केरल के कोच्चि में जज के 17 वर्षीय बेटे की कथित कार दुर्घटना से जयबालकृष्णन की मौत के मामले में पुलिस पर सवाल उठे हैं। ADGP पी. विजयन जांच के लिए पहुंचे हैं। मृतक के परिवार ने कार्रवाई के लिए अल्टीमेटम दिया है।

कोच्चि: केरल के कोच्चि में जज के नाबालिग बेटे की कथित तेज रफ्तार कार से 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस की भूमिका की जांच तेज हो गई है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) पी. विजयन मंगलवार, 27 अक्टूबर को चेरानल्लूर पुलिस थाने पहुंचे। उन्हें दुर्घटना के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में हुई कथित लापरवाही की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई सही नहीं थी। दूसरी ओर, मृतक जयबालकृष्णन के परिवार ने मंगलवार शाम चार बजे तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है। 

रविवार तड़के कैसे हुआ था हादसा?

यह दुर्घटना 25 अक्टूबर की सुबह करीब 2:20 बजे कोच्चि के चेरानल्लूर इलाके में कंटेनर रोड पर हुई थी। पुलिस के अनुसार, 55 वर्षीय जयबालकृष्णन अपनी दुकान बंद करके स्कूटर से घर लौट रहे थे। जयबालकृष्णन चित्तूर इलाके में सड़क किनारे खाने-पीने की छोटी दुकान चलाते थे। वह अपने परिवार के लिए कमाई का मुख्य सहारा थे।

इसी दौरान पीछे से आ रही मर्सिडीज-बेंज कार ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी। कार कथित तौर पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था। टक्कर इतनी गंभीर थी कि जयबालकृष्णन की जान चली गई। पुलिस की शुरुआती जांच में कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने के संकेत मिले हैं। 

आरोपी को जमानत देने पर परिवार ने उठाए सवाल

हादसे के बाद चेरानल्लूर पुलिस ने शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने और मौत का कारण बनने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। नाबालिग को पुलिस थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया। इस फैसले के बाद मृतक के परिजन और स्थानीय लोग नाराज हो गए। उन्होंने पुलिस पर आरोपी को विशेष राहत देने का आरोप लगाया।

विरोध बढ़ने पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 भी जोड़ी, जो हत्या की श्रेणी में न आने वाले गैर-इरादतन मानव वध से संबंधित है। इसके बाद किशोर को दोबारा हिरासत में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया, जहां उसे जमानत मिल गई। परिवार अब उसकी जमानत रद्द कराने की मांग कर रहा है। 

गृह मंत्री ने विधानसभा में मानी पुलिस की गलती

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि चेरानल्लूर पुलिस को शुरुआत से ही मामले में उचित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस महानिदेशक और कोच्चि पुलिस आयुक्त से बात की गई। इसके बाद गंभीर धाराएं जोड़ने और मामले की जांच की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि आरोपी के परिवार की सामाजिक या आधिकारिक स्थिति से कानूनी कार्रवाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी सिलसिले में ADGP पी. विजयन को पुलिस की कथित चूक की जांच करने को कहा गया है। 

जज पिता को भी मामले में बनाया गया आरोपी

जांच में सामने आया कि दुर्घटना में शामिल लग्जरी कार नाबालिग के पिता के नाम पर पंजीकृत थी। वह इरिंजालाकुडा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। केरल हाईकोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने न्यायिक अधिकारी को भी मामले में आरोपी बनाया है। उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए के तहत कार्रवाई की गई है। 

यह प्रावधान नाबालिग के वाहन चलाने से जुड़े अपराध में वाहन मालिक या अभिभावक की जिम्मेदारी से संबंधित है। हालांकि, वाहन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी थी और पिता को इसके बारे में जानकारी थी या नहीं, यह जांच का विषय है। 

परिजनों ने मंगलवार शाम चार बजे तक का दिया समय

मृतक के परिवार ने पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नाबालिग की जमानत रद्द कराना, उसके पिता के खिलाफ कार्रवाई और कथित रूप से सबूत मिटाने में शामिल पुलिसकर्मियों की जांच शामिल है। परिजनों का आरोप है कि थाने में ली गई एक तस्वीर को मोबाइल फोन से हटवाया गया था। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सोमवार को गृह मंत्री के आश्वासन के बाद परिवार ने प्रदर्शन अस्थायी रूप से रोक दिया था। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि मंगलवार शाम चार बजे तक कार्रवाई में प्रगति नहीं दिखी तो दोबारा आंदोलन करेंगे। 

क्राइम ब्रांच को सौंपी गई आगे की जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुर्घटना की जांच जिला क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच अधिकारी सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वाहन की रफ्तार से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस अब नाबालिग की जमानत रद्द कराने के लिए अदालत जाने की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि शुरुआती कार्रवाई में किसी अधिकारी ने जानबूझकर लापरवाही बरती थी या नहीं।

फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं। परिवार को न्याय दिलाने के साथ यह तय करना भी जरूरी होगा कि मामले की जांच कानून के अनुसार और बिना किसी दबाव के की गई है या नहीं।

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