मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ कांग्रेस ने आंदोलन तेज कर दिया है। पार्टी ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली बुलाई है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी मांगा है।
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जे.डी. सीलम ने सोमवार, 26 अक्टूबर को कर्नाटक के कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
यह रैली कांग्रेस के 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान का हिस्सा होगी। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस को क्या आपत्ति है?
जे.डी. सीलम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई जगह पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ मतदाताओं को बिना स्पष्ट जानकारी के एक मतदान केंद्र से दूसरे केंद्र में स्थानांतरित किया जा रहा है।
उनका कहना है कि इस तरह के बदलावों से लोगों को मतदान के समय परेशानी हो सकती है। कई राज्यों से मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची में सुधार जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाए जाने का निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
1 नवंबर को दिल्ली में होगी बड़ी महारैली
कांग्रेस ने SIR के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की संयुक्त रैली प्रस्तावित है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नागरिकों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। रैली में विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए अनुमति दे दी है। पुलिस के अनुसार, आयोजकों के साथ सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए समन्वय किया जा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग क्यों?
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। जे.डी. सीलम ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में किए गए बदलावों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर जनता का भरोसा बने रहना जरूरी है।
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर आयोग की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही है। पार्टी का मानना है कि इन सवालों का समाधान किए बिना मतदाता सूची का पुनरीक्षण आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। कांग्रेस ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग भी उठाई है। हालांकि, आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस की टिप्पणी राजनीतिक आरोप है, कोई स्थापित न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी उठाए मतदाता सूची पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 26 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मतदाता पंजीकरण के लिए जमा किए गए 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
खरगे ने पीलीभीत में मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने चुनाव आयोग से पुनरीक्षण प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर और संबंधित जानकारी को लेकर पारदर्शिता बरतने की मांग की। कांग्रेस ने गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग दोहराई है।
SIR क्या है और इससे मतदाताओं पर क्या असर पड़ता है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की विशेष जांच और सुधार की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना और सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी की जांच की जाती है।
जरूरत पड़ने पर नए नाम जोड़े जाते हैं और निर्धारित नियमों के तहत अपात्र या दोहराव वाली प्रविष्टियों को हटाया जा सकता है। लेकिन किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने पर उसे मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दे रहे हैं।
चुनाव आयोग के खिलाफ आगे भी जारी रहेगा आंदोलन
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 1 नवंबर की रैली उसके विरोध अभियान का एक महत्वपूर्ण चरण होगी। पार्टी ने इससे पहले अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए हैं। भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का विरोध किया है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ गलत धारणा बना रहा है।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। फिलहाल कांग्रेस ने रैली की तैयारियां तेज कर दी हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और विपक्ष की मांगों पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।








