रायगढ़ में 32,490 पेड़ों की कटाई पर रोक, CM फडणवीस बोले- प्रोजेक्ट से 28 करोड़ पेड़ों जितना प्रदूषण कम होगा

महाराष्ट्र : रायगढ़ में 32,490 पेड़ों की कटाई पर रोक। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने प्रोजेक्ट से प्रदूषण घटने का दावा किया, विपक्ष ने पर्यावरण को लेकर सवाल उठाए।

महाराष्ट्र के रायगढ़ में टोरेंट पावर के 3,000 मेगावाट प्रोजेक्ट के लिए 32,490 पेड़ काटने की योजना पर विवाद बढ़ गया है। विरोध के बाद कटाई रोक दी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना को पर्यावरण के लिए फायदेमंद बताया।

मुंबई: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित बिजली परियोजना के लिए हजारों पेड़ों की कटाई का मामला गरमा गया है। कर्जत इलाके में टोरेंट पावर के 3,000 मेगावाट क्षमता वाले पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए 32,490 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी। स्थानीय लोगों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के विरोध के बाद वन विभाग ने फिलहाल कटाई का काम रोक दिया है।  दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना का बचाव करते हुए दावा किया है कि इससे कोयले से बिजली उत्पादन के मुकाबले प्रदूषण कम होगा। उन्होंने कहा कि इतना प्रदूषण कम करने के लिए लगभग 28 करोड़ पूर्ण विकसित पेड़ों की जरूरत पड़ती। 

रायगढ़ में किस बिजली प्रोजेक्ट को लेकर विवाद?

कर्जत तालुका के साईडोंगर, कोतवाल खलाटी और पाली के आसपास टोरेंट पावर की जलविद्युत भंडारण परियोजना प्रस्तावित है। करीब 13,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए वन क्षेत्र की जमीन इस्तेमाल की जानी है।

यह इलाका पश्चिमी घाट की सह्याद्री पर्वतमाला में आता है, जो प्राकृतिक जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। परियोजना के लिए वन विभाग की अनुमति के बाद पेड़ों की कटाई शुरू होने की खबर सामने आई। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पेड़ काटने से जंगल, वन्यजीवों और आसपास के गांवों के पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। इसके बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। 

विरोध बढ़ने पर वन विभाग ने रोकी पेड़ों की कटाई

27 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग ने 32,490 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई फिलहाल रोक दी है। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय विरोध और तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया।

हालांकि, कटाई दोबारा कब शुरू होगी, इस बारे में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। कंपनी का कहना है कि उसने परियोजना के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि परियोजना से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की दोबारा समीक्षा की जाए और उनकी आपत्तियों पर सुनवाई हो। 

CM फडणवीस ने 28 करोड़ पेड़ों का उदाहरण क्यों दिया?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में उद्योगों के विस्तार के साथ बिजली की मांग बढ़ रही है। खासकर शाम और रात के समय जब सौर ऊर्जा का उत्पादन कम होता है, तब बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊर्जा भंडारण जरूरी है।

उनके मुताबिक, अगर 3,000 मेगावाट बिजली का इंतजाम कोयले से किया जाए, तो उससे होने वाले प्रदूषण की भरपाई के लिए लगभग 28 करोड़ पूर्ण विकसित पेड़ लगाने पड़ेंगे। फडणवीस ने यह भी दावा किया कि कोयला आधारित उत्पादन से होने वाला प्रदूषण करीब 40 लाख वाहनों के प्रदूषण के बराबर होगा। हालांकि, इन आंकड़ों के समर्थन में विस्तृत स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलन सार्वजनिक रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। 

कटने वाले पेड़ों की जगह 90 हजार पौधे लगाने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए इस्तेमाल होने वाली वन भूमि के बदले कंपनी ने वन विभाग को करीब तीन गुना जमीन उपलब्ध कराई है। सरकार के मुताबिक, कंपनी अपने खर्च पर लगभग 90 हजार पौधे लगाएगी। फडणवीस ने दावा किया कि पर्यावरण संबंधी नियमों और आवश्यक अनुमतियों की जांच के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया गया है।

उन्होंने बताया कि परियोजना स्थल भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से लगभग 16 किलोमीटर और भीमाशंकर मंदिर से 20 किलोमीटर दूर है। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि नए पौधे लगाने से पुराने जंगलों की जैव विविधता और प्राकृतिक व्यवस्था की तुरंत भरपाई नहीं हो सकती। 

विपक्ष ने सरकार को घेरा, राज ठाकरे करेंगे दौरा

पेड़ों की कटाई को लेकर शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करके ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। एनसीपी नेता रोहित पवार ने भी परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठाए। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे का 28 अक्टूबर को कर्जत दौरा प्रस्तावित है। पार्टी नेता संदीप देशपांडे के मुताबिक, राज ठाकरे स्थानीय लोगों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।

पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट क्या होता है?

पंप्ड स्टोरेज परियोजना में दो अलग-अलग ऊंचाई पर जलाशय बनाए जाते हैं। बिजली की मांग कम होने पर पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब पानी नीचे छोड़ा जाता है। इस दौरान टरबाइन चलाकर बिजली पैदा की जाती है। यह व्यवस्था बिजली का भंडारण करने का माध्यम है, अपने आप नई ऊर्जा पैदा करने का स्रोत नहीं।

सरकार इसे स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बता रही है। वहीं, विरोध करने वालों का कहना है कि बिजली की जरूरत पूरी करते समय जंगलों और स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

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