पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायकों को सदन में प्रवेश से रोकने का मुद्दा उठने पर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने स्पीकर से जवाब मांगा। कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि किसी भी सदस्य को नियमों के विरुद्ध नहीं रोका जाएगा।
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा में मंगलवार को कांग्रेस विधायकों के प्रवेश को लेकर सवाल उठे। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों को सदन में आने से रोका जा रहा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जिन सदस्यों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई है, उन्हें सदन में प्रवेश करने से नहीं रोका जाएगा। स्पीकर ने मामले की जानकारी लेने के निर्देश भी दिए।
प्रताप सिंह बाजवा ने सदन में उठाया प्रवेश रोकने का मुद्दा
पंजाब विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायकों के प्रवेश का मामला उस समय सामने आया, जब नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने स्पीकर के सामने अपनी आपत्ति रखी।
बाजवा ने कहा कि विपक्षी विधायकों को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने से नहीं रोका जाना चाहिए। उनका सवाल था कि जब सदस्य विधानसभा की बैठक में शामिल होने आते हैं, तो उन्हें प्रवेश से क्यों रोका जा रहा है।
इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर चर्चा हुई। विपक्ष की आपत्ति सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने साफ किया कि सदस्यों के प्रवेश को लेकर नियमों का ही पालन किया जाएगा।
स्पीकर बोले- बिना कार्रवाई किसी सदस्य को नहीं रोक सकते
विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि विपक्ष का कोई भी सदस्य सदन में आ सकता है, बशर्ते उसके खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई न हुई हो, जिसके कारण प्रवेश पर रोक लगाई गई हो।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में सभी फैसले निर्धारित नियमों के अनुसार ही लिए जाएंगे। किसी सदस्य को मनमाने तरीके से सदन में आने से रोकने की अनुमति नहीं है।
स्पीकर ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम सभी विधायकों पर समान रूप से लागू होते हैं। सदन में प्रवेश से जुड़ी किसी शिकायत की जांच की जा सकती है।
एक विधायक ने कहा, मुझे किसी ने नहीं रोका
इस बातचीत के दौरान सदन के एक सदस्य ने अपना अनुभव भी बताया। उन्होंने कहा कि वह समय का ध्यान रखते हैं और निर्धारित समय पर विधानसभा पहुंचते हैं। उन्हें अब तक किसी ने सदन में आने से नहीं रोका है।
इस पर स्पीकर ने दोबारा कहा कि सामान्य स्थिति में किसी विधायक के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। हालांकि, यदि किसी सदस्य के खिलाफ सदन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है, तो उस आदेश को ध्यान में रखा जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने सचिव से भी प्रवेश संबंधी शिकायत की जानकारी लेने की बात कही।
सुखपाल खैहरा के निलंबन के बाद बढ़ा विवाद
पंजाब विधानसभा में कांग्रेस और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के बीच पिछले कुछ दिनों से कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है।
23 अक्टूबर को सदन में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। उनके खिलाफ सदन की कार्यवाही बाधित करने और अध्यक्ष के प्रति आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने के आरोप में प्रस्ताव लाया गया था।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से पेश प्रस्ताव को सदन में मौजूद सदस्यों ने मंजूरी दी थी। कांग्रेस ने इस कार्रवाई का विरोध किया था। हालांकि, मंगलवार को प्रवेश रोकने की शिकायत किन विधायकों से संबंधित थी, यह उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।इससे पहले पंजाब विधानसभा के सत्र में कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर भी हंगामा हुआ था।
कांग्रेस विधायकों ने मानसा में नशे के खिलाफ सक्रिय कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की थी।
विरोध के दौरान कांग्रेस के सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के बीचोंबीच पहुंच गए थे। स्पीकर ने उनसे प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया था।
विधानसभा में विधायकों के प्रवेश को लेकर क्या हैं नियम?
विधानसभा की बैठक में शामिल होने का अधिकार सभी निर्वाचित विधायकों को होता है। लेकिन सदन में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी स्पीकर की होती है। अगर कोई विधायक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
किसी विधायक को निलंबित किए जाने पर वह तय अवधि तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता। बाकी सदस्यों के प्रवेश पर ऐसी कोई रोक नहीं होती।
मंगलवार को कांग्रेस विधायकों की शिकायत पर स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भी यही बात कही। उन्होंने साफ किया कि जिन विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, उन्हें सदन में आने से नहीं रोका जाएगा। साथ ही विधानसभा सचिव से पूरे मामले की जानकारी लेने को कहा।









