भारतीय नौसेना 3 से 5 नवंबर तक दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय बैठक कराने जा रही है। इसमें 18 देशों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। तीन दिन तक समुद्र की सुरक्षा, बदलते मौसम और नई तकनीक पर बातचीत होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
नई दिल्ली: समुद्र की सुरक्षा और उससे जुड़ी परेशानियों पर बात करने के लिए अगले महीने दिल्ली में कई देशों के विशेषज्ञ जुटेंगे। भारतीय नौसेना 3 नवंबर से इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD 2026) का आयोजन करने जा रही है। यह बैठक दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में होगी और 5 नवंबर तक चलेगी। इसमें भारत समेत 18 देशों के वैज्ञानिक, समुद्री मामलों के जानकार और बड़े अधिकारी हिस्सा लेंगे। रक्षा मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी है।
तीन दिन की बैठक में किन बातों पर होगी चर्चा?
भारतीय नौसेना हर साल यह बैठक कराती है। इसमें कई देशों के बड़े अधिकारी और समुद्र से जुड़े मामलों के जानकार आते हैं। सभी मिलकर समुद्र की सुरक्षा और वहां आने वाली परेशानियों पर बात करते हैं। इस बार बैठक में नई तकनीक और विज्ञान पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। समुद्र में चलने वाले जहाजों को सुरक्षित कैसे रखा जाए, मौसम खराब होने पर क्या इंतजाम किए जाएं और समुद्र में होने वाली गतिविधियों पर कैसे नजर रखी जाए, इन मुद्दों पर बातचीत होगी। इसके अलावा अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक और पढ़ाई-लिखाई से जुड़े संस्थान मिलकर कैसे काम कर सकते हैं, इस पर भी चर्चा की जाएगी।
18 देशों से आएंगे समुद्री मामलों के जानकार
दिल्ली में होने वाली इस बैठक को भारतीय नौसेना और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (NMF) मिलकर करा रहे हैं। यह संस्था समुद्र से जुड़े मामलों पर जानकारी जुटाती है और सरकार को सुझाव देती है। बैठक में 18 देशों के वैज्ञानिक, प्रोफेसर, सरकारी अधिकारी और समुद्री सुरक्षा के जानकार शामिल होंगे।सभी अपने-अपने देश के अनुभव बताएंगे।
समुद्र में आने वाली परेशानियों से कैसे निपटा जाए और नई तकनीक से क्या मदद मिल सकती है, इस पर बात होगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में परेशानियों के साथ उनके समाधान पर भी चर्चा की जाएगी।
4 नवंबर को राजनाथ सिंह करेंगे संबोधित
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उनका संबोधन 4 नवंबर को रखा गया है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी बैठक में शामिल होंगे। वह एक अलग सत्र में अपनी बात रखेंगे। इस दौरान समुद्री सुरक्षा में नई तकनीक के इस्तेमाल और देशों के बीच मिलकर काम करने जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे।
सम्मेलन में पूर्व नौसेना प्रमुखों और विभिन्न देशों के राजनयिकों के लिए विशेष बातचीत के सत्र भी रखे गए हैं। 'पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम द फ्लैग ब्रिज' नाम के सत्र में भारत और श्रीलंका के पूर्व नौसेना प्रमुख अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा 'सहयोग का संवाद' कार्यक्रम में राजनयिकों के बीच समुद्री साझेदारी बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा होगी।
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जलवायु परिवर्तन और समुद्री संसाधनों पर रहेगा जोर
समुद्र के बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और समुद्री संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण कई देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इनका असर केवल समुद्री पर्यावरण तक सीमित नहीं है। जहाजों की आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्र पर निर्भर लोगों की आजीविका भी इससे प्रभावित होती है।रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ऐसी समस्याओं का सामना कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए बेहतर वैज्ञानिक जानकारी, नई तकनीक और आपसी सहयोग की जरूरत है।
सम्मेलन में समुद्री आंकड़ों को साझा करने, संयुक्त शोध करने और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर विचार किया जाएगा। समुद्र के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा भी चर्चा का हिस्सा होगी। इनमें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
पांच अहम विषयों पर विशेषज्ञ रखेंगे अपनी राय
IPRD 2026 में पांच प्रमुख विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित होंगे।
- पहले सत्र में शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग, अनुसंधान और प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने पर बातचीत होगी।
- दूसरे सत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा।
- तीसरे सत्र में समुद्री विज्ञान और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियां उठाई जाएंगी।
- चौथा सत्र महासागरों के बेहतर प्रबंधन और समुद्री गतिविधियों में जिम्मेदार भागीदारी पर केंद्रित रहेगा।
- पांचवें सत्र में नई समुद्री तकनीकों और उनके नागरिक तथा सैन्य इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।
इन बैठकों का उद्देश्य ऐसे उपाय तलाशना है, जिन्हें देश अपने स्तर पर या मिलकर लागू कर सकें।
पीएम मोदी ने 2019 में शुरू की थी पहल
यह सम्मेलन भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) से भी जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में इस पहल की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, व्यापार, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
पिछले वर्षों में IPRD के दौरान इस पहल से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई है। इस बार विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक संस्थाओं की भागीदारी को अधिक महत्व दिया जा रहा है। भारत की 'महासागर' नीति के तहत भी क्षेत्रीय देशों के साथ सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर है।










