अल्बानिया में छात्रों ने PM ऑफिस की कुर्सियां जलाईं, एडी रामा ने बातचीत के लिए रखवाई थीं, इस्तीफे की मांग तेज

राजधानी तिराना में छात्रों ने PM एडी रामा की बातचीत के लिए रखी कुर्सियां जला दीं। इस्तीफे की मांग तेज, हिंसक प्रदर्शन रोकने के लिए नए कानून का प्रस्ताव।

अल्बानिया की राजधानी तिराना में छात्रों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के कार्यालय के बाहर कुर्सियों में आग लगा दी। ये कुर्सियां बातचीत के लिए रखी गई थीं। छात्र शिक्षा, रोजगार और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार से इस्तीफा मांग रहे हैं।

तिराना: यूरोपीय देश अल्बानिया में प्रधानमंत्री एडी रामा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार 13वें दिन भी जारी रहा। रविवार, 25 अक्टूबर को राजधानी तिराना में बड़ी संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर पहुंचे और वहां रखी कुर्सियों में आग लगा दी। इन कुर्सियों को खुद रामा ने छात्रों से बातचीत करने के लिए रखवाया था। लेकिन छात्र बातचीत के बजाय उनका इस्तीफा मांग रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर रखी कुर्सियों पर 'डायलॉग' यानी बातचीत लिखा था। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने इन पर 'इस्तीफा' लिखकर अपना विरोध जताया था। रविवार को छात्रों ने कुर्सियां सड़क पर इकट्ठा कीं और उनमें आग लगा दी।

शिक्षा मंत्रालय से शुरू हुआ प्रदर्शन, PM ऑफिस तक पहुंचे छात्र

रविवार दोपहर छात्रों का प्रदर्शन शिक्षा मंत्रालय के बाहर शुरू हुआ। यहां बड़ी संख्या में युवा जुटे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मंत्रालय की इमारत की ओर पत्थर भी फेंके। इसके बाद प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ बढ़ गए। वहां उन्होंने बातचीत के लिए रखी कुर्सियां हटाईं और उन्हें सड़क पर रखकर आग लगा दी।

पिछले कई दिनों से तिराना में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी हो रही है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाया। दुकानों के शीशे तोड़े गए और पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं।

छात्र आखिर सरकार से क्यों नाराज हैं?

अल्बानिया में छात्रों का आंदोलन 13 अक्टूबर से चल रहा है। शुरुआत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से हुई थी, लेकिन अब इसमें बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे भी जुड़ गए हैं।

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। कई संस्थानों में जरूरी सुविधाओं की कमी है। पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को अच्छी नौकरी मिलना भी मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करे, छात्रों को आर्थिक सहायता दे और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए।

छात्रों ने सरकारी अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। कई प्रदर्शनकारी अब प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे से कम पर आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं।

प्रधानमंत्री बोले- हिंसा से इस्तीफा नहीं लिया जा सकता

एडी रामा ने रविवार को एक वीडियो संदेश जारी कर छात्रों की मांगों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोगों को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने और अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है, लेकिन हिंसा के जरिए उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। रामा ने माना कि छात्रों की कुछ शिकायतें सही हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उन पर बातचीत करने को तैयार है।

प्रधानमंत्री ने 20 अक्टूबर को भी कार्यालय के बाहर कुर्सियां रखकर छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया था। तब भी छात्रों ने कुर्सियां हटाकर उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था। रामा 2013 से अल्बानिया के प्रधानमंत्री हैं। पिछले साल हुए चुनाव में उनकी सोशलिस्ट पार्टी ने लगातार चौथी बार सरकार बनाई थी।

ट्रम्प के दामाद की रिसॉर्ट परियोजना का भी विरोध

अल्बानिया में पिछले कुछ महीनों से एक बड़ी पर्यटन परियोजना के खिलाफ भी प्रदर्शन हो रहे हैं। इस परियोजना का संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर की निवेश कंपनी से है।

करीब 1.4 अरब यूरो की इस परियोजना के तहत साज़ान द्वीप और व्योसा-नार्ता के तटीय क्षेत्र में लग्जरी होटल, विला और दूसरी पर्यटन सुविधाएं बनाने की योजना है।

पर्यावरण संगठनों का कहना है कि निर्माण से समुद्र किनारे के प्राकृतिक इलाकों को नुकसान पहुंच सकता है। व्योसा-नार्ता क्षेत्र में फ्लेमिंगो, समुद्री कछुए और कई दुर्लभ जीव पाए जाते हैं।

परियोजना का विरोध करने वाले लोग निर्माण रोकने की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ रामा सरकार का कहना है कि इससे पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

हिंसक प्रदर्शन रोकने के लिए नए कानून का प्रस्ताव

लगातार हो रही तोड़फोड़ के बीच प्रधानमंत्री एडी रामा ने नए कानूनी उपायों की जानकारी दी है। प्रस्ताव के मुताबिक, पुलिस की चेतावनी के बाद भी हिंसक प्रदर्शन वाली जगह पर बने रहने वालों पर पांच लाख अल्बानियाई लेक तक का जुर्माना लग सकता है।

सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से उसकी भरपाई कराई जाएगी। नाबालिगों के मामले में आर्थिक जिम्मेदारी उनके माता-पिता या अभिभावकों पर आ सकती है।

पत्रकारों, स्वास्थ्यकर्मियों, निगरानी करने वालों और ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों के लिए कुछ छूट भी प्रस्तावित हैं।

नुकसान उठाने वाले दुकानदारों को मिलेगा मुआवजा

सरकार ने प्रदर्शन के दौरान नुकसान उठाने वाले कारोबारियों के लिए मुआवजे की योजना भी पेश की है। इसके तहत सबसे छोटे कारोबारियों को नुकसान की पूरी रकम दी जा सकती है।

पात्र बड़े कारोबारियों के लिए कम से कम 70 प्रतिशत नुकसान की भरपाई का प्रस्ताव है। यह योजना तय शर्तों के तहत सालाना 1.40 लाख यूरो तक कारोबार करने वाले व्यवसायों पर लागू होगी।

रामा का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं है। सरकार केवल हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती है।

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