इजराइल में चुनाव से पहले वेस्ट बैंक के हेब्रोन में सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है। दो इजराइली सैनिकों की मौत के बाद कई इमारतें गिराई गईं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, करीब 1500 फिलिस्तीनियों को घर छोड़ना पड़ा।
यरुशलम: इजराइल में आम चुनाव से ठीक पहले वेस्ट बैंक के हेब्रोन शहर में बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को एक सैन्य चेकपोस्ट पर गोलीबारी में दो इजराइली सैनिक मारे गए थे। इसके बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को इलाके में व्यापक अभियान चलाने का आदेश दिया। शनिवार तक कई मकान, दुकानें और दूसरी इमारतें गिराई जा चुकी थीं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, करीब 1500 फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। इजराइल में 27 अक्टूबर को मतदान होना है। ऐसे में यह कार्रवाई चुनावी बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गई है।
दो सैनिकों की मौत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
हेब्रोन के उत्तरी प्रवेश मार्ग पर स्थित येहुदा जंक्शन चेकपोस्ट पर शुक्रवार सुबह दो हथियारबंद फिलिस्तीनी हमलावरों ने गोलीबारी की। इजराइली सेना के मुताबिक, हमले में 23 वर्षीय स्टाफ सार्जेंट रॉन योनातन रोइटमैन और 20 वर्षीय सार्जेंट युवाल शाई स्विलेम की मौत हो गई। तीन अन्य सैनिक घायल हुए। करीब 20 मिनट तक चली मुठभेड़ में दोनों हमलावर भी मारे गए। सेना का दावा है कि हमलावरों के पास राइफल, पिस्तौल और बड़ी मात्रा में गोलियां थीं। इजराइली अधिकारियों के अनुसार, हमलावर आम नागरिकों को भी निशाना बना सकते थे, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बुलडोजर से गिराए गए मकान और दुकानें
हमले के कुछ ही घंटों बाद इजराइली सेना ने चेकपोस्ट के आसपास बुलडोजर से इमारतें गिरानी शुरू कर दीं। सबसे पहले फरश अल-हवा इलाके में कार्रवाई की खबर सामने आई। यहां एक रिहायशी इमारत और कुछ दुकानों को गिराया गया। इसके बाद अल-जलादाह और ऐन दीर बहा इलाकों में भी सैन्य अभियान तेज हो गया। स्थानीय अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में ऐसे लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, जिनका गोलीबारी करने वालों से कोई संबंध नहीं था। इजराइली सेना का कहना है कि कुछ इमारतें बिना अनुमति बनाई गई थीं और उनसे सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा हो सकता था।
300 परिवारों को घर छोड़ना पड़ा, सैकड़ों और प्रभावित
हेब्रोन नगर प्रशासन के अनुसार, सैन्य कार्रवाई से बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी परिवार प्रभावित हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने करीब 1500 लोगों के विस्थापित होने की जानकारी दी है। अलग-अलग रिपोर्टों में घर छोड़ने वाले परिवारों की संख्या 200 से 300 के बीच बताई गई है। नगर प्रशासन का कहना है कि जिन दो इलाकों में सेना अभियान चला रही है, वहां लगभग 495 रिहायशी इकाइयां हैं। इनमें करीब 2500 लोग रहते हैं। कुछ परिवार रिश्तेदारों के घर चले गए, जबकि अन्य लोगों के लिए अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने लगभग 35 हेक्टेयर क्षेत्र में इमारतें गिराए जाने या उन्हें गिराने के लिए चिह्नित किए जाने की जानकारी दी है।
पूरे हेब्रोन में आवाजाही पर पाबंदियां
सैन्य अभियान के दौरान हेब्रोन और आसपास के कई इलाकों के प्रवेश मार्ग बंद कर दिए गए। जगह-जगह चेकपोस्ट बनाए गए, जहां लोगों और वाहनों की जांच की जा रही है। इन पाबंदियों से स्थानीय लोगों को काम पर जाने, इलाज कराने और जरूरी सामान लाने में कठिनाई हो रही है। कई परिवारों को घर खाली करने के निर्देश मिले हैं। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। फिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। दूसरी ओर इजराइली सेना ने बताया कि संदिग्ध लोगों और हथियारों की तलाश के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
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नेतन्याहू ने घटनास्थल पहुंचकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गोलीबारी की घटना के बाद हेब्रोन का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सेना हमलावरों से जुड़े इलाकों में घर-घर तलाशी लेगी और हथियार जब्त करेगी। नेतन्याहू ने वहां मौजूद कथित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने की बात भी कही। उनके मुताबिक, इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी सैन्य अभियान का समर्थन किया। सरकार का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य आगे होने वाले हमलों को रोकना है। हालांकि फिलिस्तीनी प्रशासन ने पूरे मोहल्ले के लोगों को विस्थापित करने पर सवाल उठाए हैं।
वित्त मंत्री स्मोट्रिच ने गाजा जैसी कार्रवाई की मांग की
इजराइल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने चेकपोस्ट के आसपास बनी उन इमारतों को तुरंत गिराने की मांग की, जिन्हें इजराइली प्रशासन अवैध मानता है। उन्होंने वेस्ट बैंक में गाजा और लेबनान की तरह व्यापक सैन्य अभियान चलाने की वकालत भी की। स्मोट्रिच का कहना है कि फिलिस्तीनी सशस्त्र संगठनों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए बड़ी कार्रवाई जरूरी है। दूसरी तरफ फिलिस्तीनी प्रशासन ने इसे सामूहिक दंड बताया है। उसका कहना है कि कुछ लोगों के हमले के लिए पूरे इलाके के निवासियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। नागरिकों के घर और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर भी विरोध जताया गया है।
चुनाव से तीन दिन पहले कार्रवाई पर सवाल
इजराइल में मंगलवार, 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने हैं। मतदान से ठीक पहले हुई इस घटना ने सुरक्षा और फिलिस्तीनी इलाकों में सैन्य कार्रवाई को चुनावी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेतन्याहू और उनके सहयोगी दल लंबे समय से वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों के विस्तार का समर्थन करते रहे हैं। फिलिस्तीनी अधिकारियों का आरोप है कि सरकार चुनाव से पहले सख्त रुख दिखाकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। हालांकि इजराइली सरकार अभियान को सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है। चुनाव में नेतन्याहू सरकार के भविष्य का फैसला होना है और सुरक्षा व्यवस्था मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
वेस्ट बैंक पर इजराइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद क्यों है?
वेस्ट बैंक 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद इजराइल के कब्जे में आया था। फिलिस्तीनी इसे अपने भविष्य के स्वतंत्र देश का हिस्सा मानते हैं। दूसरी तरफ इजराइल में कुछ राजनीतिक और धार्मिक समूह इस क्षेत्र पर ऐतिहासिक अधिकार का दावा करते हैं। वर्षों के दौरान वेस्ट बैंक में बड़ी संख्या में इजराइली बस्तियां बसाई गई हैं। इन बस्तियों को लेकर लगातार विवाद होता रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अधिकतर देश इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ मानते हैं, जबकि इजराइल इस कानूनी स्थिति से असहमत है। फिलिस्तीनी लोगों का कहना है कि बस्तियों के विस्तार से उनकी जमीन और आवाजाही पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।









