चीन के तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार रात आए तेज भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। अब तक 16 लोगों की मौत और 65 लोगों के घायल होने की खबर है। इनमें 11 की हालत गंभीर है। सैकड़ों मकान गिरने के बाद 12 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। पहाड़ी रास्तों पर चट्टानें गिरने से बचाव दल को कई इलाकों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
तिब्बत: चीन के तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 की रात भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। रात करीब 10 बजकर 33 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 दर्ज की गई। इसका सबसे ज्यादा असर नागकू शहर के बाकेन काउंटी और आसपास के गांवों में हुआ। कई मकान गिर गए और बिजली की सप्लाई बंद हो गई। शुक्रवार सुबह से बचाव दल मलबा हटाने और फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
339 घर गिरे, लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, भूकंप के कारण अब तक 339 मकानों के गिरने की जानकारी मिली है। कई दूसरी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय अधिकारी प्रभावित गांवों में जाकर नुकसान का पता लगा रहे हैं।
भूकंप के बाद हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। सरकारी मीडिया के अनुसार, 12,400 से ज्यादा लोगों को दूसरी सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।
कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, शुक्रवार सुबह तक कुछ जगहों पर बिजली दोबारा शुरू कर दी गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि अभी सभी प्रभावित गांवों से पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। दूरदराज के इलाकों में नुकसान का पता लगाने के लिए टीमें भेजी गई हैं।
घायलों में 11 की हालत गंभीर
नागकू के स्थानीय प्रशासन ने बताया कि शुक्रवार तक भूकंप से मरने वालों की संख्या 16 पहुंच गई है। घायलों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है। इनमें 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घायल लोगों का इलाज कराया जा रहा है। जिन गांवों में मकान गिरे हैं, वहां बचावकर्मी मलबे की जांच कर रहे हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने घायलों को जल्द इलाज उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाने को कहा है।
पहाड़ों से गिरी चट्टानें, कई रास्ते बंद
भूकंप का केंद्र तिब्बत के पहाड़ी इलाके में था। यह जगह राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। झटकों के कारण पहाड़ों से पत्थर और चट्टानें सड़कों पर गिर गईं। इसके चलते कई रास्तों पर गाड़ियों की आवाजाही रोकनी पड़ी है।
नेशनल हाईवे 317 के एक हिस्से पर भी यातायात प्रभावित हुआ है। फिलहाल वहां बचाव कार्य और जरूरी सामान पहुंचाने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। पहाड़ी इलाकों में मौसम भी राहत कार्य में परेशानी पैदा कर सकता है। अगले कुछ दिनों में रुक-रुककर बर्फबारी होने का अनुमान है। ऐसे में दूर बसे गांवों तक पहुंचना और मुश्किल हो सकता है।
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भूकंप के बाद भी कई बार हिली जमीन
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, मुख्य भूकंप के बाद आसपास के इलाकों में कई और झटके महसूस किए गए। शुरुआती रिकॉर्ड में सात आफ्टरशॉक दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे तेज झटका 5.2 तीव्रता का था।
चीन के भूकंप निगरानी केंद्र ने बाद में सैकड़ों छोटे-बड़े झटके दर्ज किए। बार-बार जमीन हिलने से पहले से कमजोर हो चुके मकानों के लिए खतरा बना हुआ है।
तिब्बत में भूकंप आने की एक बड़ी वजह यहां जमीन के नीचे भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। इस इलाके में पहले भी बड़े भूकंप आ चुके हैं।
बचाव कार्य जारी, लोगों के लिए भेजे गए टेंट
चीनी प्रशासन ने भूकंप के बाद आपातकालीन राहत व्यवस्था लागू कर दी है। प्रभावित इलाकों में पुलिस, दमकल और दूसरी बचाव टीमों को भेजा गया है।
बेघर हुए लोगों के लिए टेंट, अस्थायी रहने की जगह, बिस्तर और गर्म कपड़ों की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि राहत सामग्री प्रभावित गांवों तक पहुंचाई जा रही है।
फिलहाल सबसे जरूरी काम मलबे में फंसे लोगों को निकालना और बेघर परिवारों को सुरक्षित ठिकाना देना है। कुछ गांवों तक पहुंचने में हो रही देरी के कारण नुकसान की पूरी जानकारी सामने आने में समय लग सकता है।
प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त मकानों में वापस नहीं जाने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है। बचाव कार्य जारी रहने के कारण मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।










