AI से फर्जी पासपोर्ट बनाकर कनाडाई बैंकों में खाते खुलवाने का आरोप, पाकिस्तान में 3 गिरफ्तार

कनाडा के बैंको से धोखाधड़ी के मामले मे पाक के तीन नागरिक गिरफ्तार हुए है। रिपोर्ट मे पता चला कि फर्जी दस्तावेजो से खाते खोलकर क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग किया।

कनाडा के बैंकों से कथित धोखाधड़ी के मामले में पाकिस्तान की साइबर अपराध जांच एजेंसी ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने AI से तैयार फर्जी पासपोर्ट और तस्वीरों के जरिए खाते खुलवाकर क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग किया।

ओटावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए कथित फर्जी पासपोर्ट और तस्वीरों का इस्तेमाल कर कनाडा के बैंकों में ऑनलाइन खाते खुलवाने के मामले में पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में कनाडा में रहने वाले चार अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। अधिकारियों का आरोप है कि गिरोह ने फर्जी पहचान के आधार पर बैंक खाते खुलवाए, क्रेडिट कार्ड हासिल किए और उनकी उपलब्ध क्रेडिट सीमा खर्च करने के बाद कार्ड का इस्तेमाल बंद कर दिया।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने 19 अक्टूबर 2026 को लाहौर में इस मामले की जानकारी दी। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, कथित नेटवर्क के सदस्य पाकिस्तान और कनाडा में रहकर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे थे। जांच एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कथित फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए हैं। हालांकि, कनाडा के संबंधित बैंकों के नाम, कुल वित्तीय नुकसान और कनाडा में मौजूद संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

सात संदिग्धों के नाम सामने आए

NCCIA के मुताबिक, पाकिस्तान में गिरफ्तार किए गए तीन संदिग्धों की पहचान सुभान बट, गुलरेज बट और मुहम्मद नोमान के रूप में हुई है। कनाडा में रहने वाले चार अन्य संदिग्धों के नाम दीप सिंह, परजीत सिंह, हरप्रीत सिंह और गुरलीन सिंह बताए गए हैं।

जांच एजेंसी के अतिरिक्त निदेशक आतिफ अमीर ने बताया कि कथित नेटवर्क में दोनों देशों में मौजूद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कनाडा में मौजूद चार संदिग्धों ने कथित तौर पर AI से तैयार किए गए पासपोर्ट और तस्वीरें पाकिस्तान में अपने सहयोगियों को भेजीं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कनाडा के वित्तीय संस्थानों में ऑनलाइन खाते खोलने के लिए किए जाने का आरोप है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का नाम जांच में सामने आना या गिरफ्तारी होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। कनाडा में रहने वाले चार संदिग्धों की गिरफ्तारी या औपचारिक आरोप तय होने की जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं की गई है।

AI से फर्जी पहचान बनाकर कैसे की गई कथित ठगी?

जांच एजेंसी के शुरुआती निष्कर्षों के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी में AI से तैयार किए गए पासपोर्ट और चेहरे की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के जरिए ऐसी डिजिटल पहचान तैयार करने की कोशिश की गई, जिनके आधार पर कनाडा के बैंकों में खाते खोले जा सकें।

रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा में मौजूद संदिग्ध कथित तौर पर दस्तावेज तैयार करने और उन्हें पाकिस्तान भेजने में शामिल थे। पाकिस्तान में मौजूद आरोपियों पर इन दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन बैंक खाते खोलने का आरोप है। इसके बाद क्रेडिट कार्ड जारी करवाए गए और कथित तौर पर कनाडा में उनका इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि कार्ड की उपलब्ध क्रेडिट सीमा खर्च करने के बाद उनका इस्तेमाल बंद कर दिया जाता था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने खाते खोले गए, कितने क्रेडिट कार्ड जारी हुए और प्रत्येक कार्ड पर कितनी रकम खर्च की गई।

इस तरह के मामले को व्यापक रूप से सिंथेटिक आइडेंटिटी फ्रॉड यानी कृत्रिम या मिश्रित पहचान के जरिए की जाने वाली धोखाधड़ी से जोड़ा जा सकता है। इसमें वास्तविक और नकली जानकारी को मिलाकर ऐसी पहचान बनाई जाती है, जिसका इस्तेमाल वित्तीय सेवाएं हासिल करने के लिए किया जा सकता है।

डॉल्फिन एंटी ब्राउजर के इस्तेमाल की भी जांच

NCCIA के अनुसार, कथित नेटवर्क ने डॉल्फिन एंटी नाम के एंटी-डिटेक्ट ब्राउजर का इस्तेमाल किया। इस तरह के ब्राउजर ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान डिवाइस और ब्राउजर से जुड़ी कुछ पहचान संबंधी जानकारियों को अलग-अलग दिखाने या प्रबंधित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस तकनीक के जरिए संदिग्धों ने ऑनलाइन पहचान सत्यापन की प्रक्रिया से बचने की कोशिश की। हालांकि, किसी ब्राउजर का इस्तेमाल अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। इस मामले में उसकी भूमिका और कथित धोखाधड़ी से उसका संबंध डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

AI से तैयार दस्तावेजों और डिजिटल पहचान छिपाने वाले सॉफ्टवेयर के कथित संयुक्त इस्तेमाल ने ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। वित्तीय संस्थानों के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ऑनलाइन खाता खोलने वाला व्यक्ति वास्तविक हो और उसके पहचान दस्तावेज वैध हों।

जांच में चार मोबाइल फोन और चार लैपटॉप सहित उपकरण बरामद

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने इस मामले से संबंधित चार मोबाइल फोन, चार लैपटॉप और कथित रूप से फर्जी कनाडाई पासपोर्ट की मुद्रित प्रतियां बरामद कीं। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दस्तावेज किसने तैयार किए, उन्हें किन लोगों तक पहुंचाया गया और उनका इस्तेमाल किन वित्तीय संस्थानों में किया गया।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि संदिग्धों ने किन तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया और क्या इस गतिविधि में दूसरे लोग भी शामिल थे।

फिलहाल, एजेंसी की ओर से कुल नुकसान या प्रभावित ग्राहकों की संख्या का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इस स्तर पर मामले को बड़े पैमाने की धोखाधड़ी का आरोप कहा जा सकता है, लेकिन इसके वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन करना अभी संभव नहीं है।

कनाडा में बैंक फ्रॉड पर कितनी सजा हो सकती है?

कनाडा के आपराधिक कानून में धोखाधड़ी से संबंधित प्रावधान क्रिमिनल कोड की धारा 380 में दिए गए हैं। इसके तहत धोखे, झूठे बयान या अन्य कपटपूर्ण तरीकों से किसी व्यक्ति या संस्था की संपत्ति, धन या सेवाओं को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

कनाडा के आधिकारिक कानून के मुताबिक, 5,000 कनाडाई डॉलर से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में अधिकतम 14 साल तक की जेल हो सकती है। यदि संबंधित रकम 5,000 डॉलर या उससे कम है, तो आरोप की प्रकृति और मुकदमे की प्रक्रिया के आधार पर अधिकतम दो साल तक की जेल या समरी कन्विक्शन के तहत सजा हो सकती है।

यदि किसी व्यक्ति को अभियोग के तहत चलाए गए मुकदमे में एक या अधिक संबंधित धोखाधड़ी अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है और कुल रकम 10 लाख कनाडाई डॉलर से अधिक होती है, तो धारा 380(1.1) के तहत कम से कम दो साल की जेल का प्रावधान लागू हो सकता है। यह प्रावधान संबंधित कानूनी शर्तों के अधीन है। 

हालांकि, किसी मामले में संभावित सजा केवल आरोप की खबर के आधार पर तय नहीं की जा सकती। अदालत अपराध की प्रकृति, सबूत, संबंधित रकम और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर फैसला करती है।

AI के बढ़ते इस्तेमाल से बैंकिंग सुरक्षा के सामने नई चुनौती

डिजिटल बैंकिंग ने खाता खोलने, पहचान सत्यापन और क्रेडिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। लेकिन इसी के साथ फर्जी दस्तावेज, नकली तस्वीरें और कृत्रिम पहचान बनाने वाली तकनीकों का दुरुपयोग भी वित्तीय संस्थानों के लिए चुनौती बन रहा है।

AI से तैयार तस्वीरें और दस्तावेज वास्तविक दिख सकते हैं। ऐसे में बैंकों को केवल तस्वीर या अपलोड किए गए दस्तावेज पर निर्भर रहने के बजाय पहचान के कई स्तरों की जांच करनी पड़ सकती है। दस्तावेजों की प्रामाणिकता, ग्राहक की वास्तविक पहचान, संदिग्ध लेनदेन और खाते से जुड़े उपकरणों की जांच इस प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।

इस मामले में आगे की जांच यह स्पष्ट करने में मदद करेगी कि कथित नेटवर्क ने बैंकिंग सुरक्षा की किन प्रक्रियाओं का फायदा उठाया और क्या संबंधित वित्तीय संस्थानों को अपने सत्यापन तंत्र में बदलाव करने की जरूरत है।

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