मेरठ में वाणिज्य कर विभाग की ब्याजमाफी योजना का उद्देश्य पुराने टैक्स बकायों के निपटारे को आसान बनाना और व्यापारियों को आर्थिक राहत देना है। योजना में 10 लाख रुपये तक के बकाये पर पूरा ब्याज माफ किया जाएगा। इससे अधिक बकाया रखने वाले व्यापारियों को निर्धारित श्रेणी के अनुसार ब्याज का 10, 25 या 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा।
उत्तर प्रदेश: बकाया टैक्स के बोझ से परेशान व्यापारियों को राहत देने के लिए वाणिज्य कर विभाग की ब्याजमाफी योजना महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। इस योजना के दायरे में मेरठ जिले के 31,522 व्यापारी शामिल हैं, जिन पर कुल 646.60 करोड़ रुपये का मूल कर बकाया है। इस बकाया राशि पर 959.68 करोड़ रुपये का ब्याज भी दर्ज है। योजना के तहत बकाया रकम की निर्धारित श्रेणी के अनुसार ब्याज में छूट मिलेगी, जबकि अर्थदंड पर पूरी माफी का प्रावधान बताया गया है।
31 हजार से अधिक व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद
मेरठ में टैक्स बकाये से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई ब्याजमाफी योजना से बड़ी संख्या में कारोबारियों को फायदा मिलने की संभावना है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 31,522 व्यापारी इस योजना के दायरे में आते हैं। इन पर 646.60 करोड़ रुपये का मूल कर बकाया है। मूलधन के अतिरिक्त ब्याज की राशि 959.68 करोड़ रुपये बताई गई है।
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ब्याज की रकम मूल टैक्स के मुकाबले काफी अधिक होने के कारण कई व्यापारियों पर भुगतान का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में ब्याज में छूट और अर्थदंड की माफी से बकाया मामलों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक राहत संबंधित व्यापारी की बकाया राशि और योजना की लागू शर्तों पर निर्भर करेगी।
बकाया राशि के अनुसार तय होगी ब्याज में छूट
योजना में व्यापारियों को उनके बकाया टैक्स की श्रेणी के आधार पर राहत दी जाएगी। उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, छूट का ढांचा इस प्रकार है:
- 10 लाख रुपये तक का बकाया: ब्याज की पूरी राशि माफ होगी।
- 10 लाख रुपये से अधिक और एक करोड़ रुपये तक: कुल बकाया ब्याज का 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा।
- एक करोड़ रुपये से अधिक और पांच करोड़ रुपये तक: बकाया ब्याज का 25 प्रतिशत जमा करना होगा।
- पांच करोड़ रुपये से अधिक: बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा।
इसके अतिरिक्त, योजना के तहत अर्थदंड पर पूरी छूट दिए जाने की जानकारी दी गई है। इससे पात्र व्यापारियों को अपने पुराने कर संबंधी मामलों का निपटारा करने में आर्थिक सहायता मिल सकती है।
छोटे कारोबारियों की संख्या सबसे अधिक
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मेरठ में एक लाख रुपये तक का बकाया रखने वाले 21,785 व्यापारी हैं। वहीं, एक लाख से 10 लाख रुपये तक के बकायेदारों की संख्या 9,500 बताई गई है।
इसके अलावा, 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक की बकाया श्रेणी में 791 व्यापारी शामिल हैं। एक करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक बकाया रखने वाले व्यापारियों की संख्या 43 है, जबकि पांच करोड़ रुपये से अधिक के बकाये वाले केवल तीन व्यापारी बताए गए हैं।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि योजना के दायरे में आने वाले व्यापारियों में बड़ी संख्या छोटे बकायेदारों की है। ब्याज में पूरी छूट का लाभ मिलने पर इनमें से पात्र कारोबारियों को अपेक्षाकृत अधिक राहत मिल सकती है।
ऑनलाइन आवेदन और हेल्प डेस्क की सुविधा
अपर आयुक्त, ग्रेड-वन एचआर चौरसिया के अनुसार, योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारियों को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संबंधित बकाया और पात्रता के विवरण की जांच करने के बाद ही व्यापारी अपनी देय राशि और मिलने वाली छूट का आकलन कर सकेंगे।
आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए मंगल पांडे नगर स्थित राज्यकर विभाग के कार्यालय में हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। व्यापारी यहां पहुंचकर योजना की शर्तों, आवेदन प्रक्रिया और अपने बकाये से जुड़े सवालों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
विभागीय जानकारी के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत शामिल टैक्स मांग 31 दिसंबर 2025 तक की है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित व्यापारी के लिए यह जांचना जरूरी है कि उसका बकाया निर्धारित अवधि और अन्य पात्रता शर्तों के अंतर्गत आता है या नहीं।
व्यापारियों को समय पर जानकारी लेने की सलाह
ब्याजमाफी योजना पुराने कर विवादों और बकाया भुगतान के मामलों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। व्यापारियों को आवेदन करने से पहले अपने कर अभिलेख, मूल बकाया, ब्याज और अर्थदंड का विवरण जांचना चाहिए। साथ ही, भुगतान की सही राशि और आवेदन की अंतिम तिथि की पुष्टि विभागीय पोर्टल या हेल्प डेस्क से करनी चाहिए।
योजना का लाभ लेने से पात्र कारोबारियों को अतिरिक्त ब्याज के बोझ से राहत मिल सकती है और वे अपने कर संबंधी दायित्वों को व्यवस्थित तरीके से पूरा कर सकते हैं। इससे पुराने बकाया मामलों के निस्तारण और कारोबार पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।










