दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली पर राजनीतिक और व्यापारिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस इसे मतदाता अधिकारों से जोड़ रही है। व्यापारी संगठन CTI ने ₹10 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताकर तारीख बदलने की मांग की।
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि लोगों के वोट से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली बुलाई है। पार्टी इसमें 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद कर रही है। दूसरी तरफ दिल्ली के व्यापारियों ने रैली की तारीख बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि दिवाली से पहले भीड़ और यातायात पाबंदियों के कारण करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है।
राहुल गांधी ने लोगों से कहा- 1 नवंबर को दिल्ली आएं
राहुल गांधी ने रविवार, 25 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों से रैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हो रहा। राहुल ने सवाल उठाने वाले लोगों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से दिल्ली पहुंचने को कहा। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को 'वोट बचाओ, देश बचाओ जन मार्च और महारैली' नाम दिया है।
राहुल ने अपनी पोस्ट में भाजपा और उसके सहयोगियों पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का इतना प्रचार करने के लिए भाजपा और उसके साथियों का धन्यवाद। उनका इशारा रैली की तारीख को लेकर भाजपा की ओर से की जा रही आलोचना की तरफ था। हालांकि मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी या वोट चोरी के आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। भाजपा और चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
कांग्रेस का दावा, रैली में आएंगे 10 लाख लोग
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने शनिवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत की। दोनों नेताओं का दावा है कि 1 नवंबर की रैली में देशभर से कम से कम 10 लाख लोग पहुंच सकते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गांव, कस्बों और जिलों में लोगों से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को दिल्ली लाने की तैयारी चल रही है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रैली की तैयारियों की समीक्षा की है। कांग्रेस का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि मतदाता अधिकारों से जुड़ा अभियान है। हालांकि 10 लाख लोगों की भागीदारी पार्टी का अनुमान है। वास्तविक संख्या कार्यक्रम के दिन ही स्पष्ट होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाएगा विपक्ष
रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग प्रमुख मुद्दा होगी। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। वे चाहते हैं कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके मामलों की जांच हो। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपनी निष्पक्षता का बचाव किया है और चुनावी प्रक्रिया में गलत काम करने के आरोपों को खारिज किया है। विपक्ष की मांगों और आयोग के जवाब के बीच यह विवाद लगातार बढ़ रहा है।
व्यापारियों ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी
रैली की तैयारियों के बीच दिल्ली के व्यापारियों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर का कार्यक्रम आगे बढ़ाने की अपील की है। संगठन के अध्यक्ष बृजेश गोयल का कहना है कि दिवाली से ठीक पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी शुरू हो जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली होने से दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को परेशानी हो सकती है।
CTI ने सुझाव दिया है कि रैली 10 नवंबर को भाई दूज के बाद किसी दूसरे दिन आयोजित की जाए। संगठन ने साफ किया है कि उसे राजनीतिक दलों के प्रदर्शन करने के अधिकार से आपत्ति नहीं है। उसकी चिंता रैली के समय और बाजारों में होने वाली संभावित रुकावटों को लेकर है।
₹10 हजार करोड़ के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका
व्यापारी संगठन का अनुमान है कि रैली और उससे जुड़ी यातायात पाबंदियों के कारण लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संभावित नुकसान का अनुमान है, कोई वास्तविक या निश्चित आर्थिक नुकसान नहीं। संगठन को आशंका है कि सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और रास्ते बंद होने से तीन से चार दिन तक बाजारों में खरीदारी प्रभावित हो सकती है।
इस साल 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को भाई दूज है। इन त्योहारों से पहले कपड़े, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, मिठाई और उपहारों की बिक्री बढ़ती है। CTI के अनुसार, दिल्ली में धनतेरस के आसपास विभिन्न कारोबारों में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। ऐसे में व्यापारी नहीं चाहते कि त्योहार से पहले ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी हो।
चांदनी चौक समेत 20 बड़े बाजारों की बढ़ी चिंता
रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के आसपास दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस और करोल बाग जैसे व्यापारिक क्षेत्र शामिल हैं। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों से भी दुकानदार और ग्राहक सामान खरीदने आते हैं।
पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भी इसी क्षेत्र के आसपास हैं। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण रास्ते बदले गए या मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगे तो बाहर से आने वाले खरीदारों को दिक्कत हो सकती है। माल की ढुलाई और दुकानों तक सामान पहुंचाने का काम भी प्रभावित होने की आशंका है।
पिछले साल दिल्ली में ₹75 हजार करोड़ की बिक्री का अनुमान था
व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने 2025 के दिवाली सीजन में दिल्ली का कुल त्योहारी कारोबार लगभग 75 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया था। यह पूरे शहर के कारोबार का अनुमान था, केवल रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों का नहीं।
इस बार भी दुकानदारों को त्योहार से अच्छी बिक्री की उम्मीद है। CTI का दावा है कि अक्टूबर में पहले हुए प्रदर्शनों और सड़कें बंद होने के कारण व्यापारियों को लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। हालांकि इन नुकसानों का स्वतंत्र आर्थिक आकलन उपलब्ध नहीं है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन में बंद हुए थे 45 मेट्रो स्टेशन
दिल्ली में इससे पहले भी चुनाव आयोग और SIR के विरोध में प्रदर्शन हो चुके हैं। 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन बुलाया गया था। पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा व्यवस्था के चलते दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किए गए थे।
उस दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगभग छह हजार लोगों को अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में लिया गया। इन पाबंदियों से दिल्ली में यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। व्यापारी अब इसी तरह की परेशानी दोबारा होने की आशंका जता रहे हैं।
भाजपा ने 1 नवंबर की तारीख पर भी उठाए सवाल
रैली को लेकर भाजपा ने एक अलग मुद्दा उठाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 1 नवंबर की तारीख 1984 के सिख विरोधी दंगों की दुखद यादों से जुड़ी है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस ने रैली के लिए यही दिन क्यों चुना।
भाजपा का आरोप है कि इस तारीख पर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने से पीड़ित परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। दूसरी ओर राहुल गांधी ने भाजपा की आलोचना पर सीधे तारीख बदलने का कोई संकेत नहीं दिया है। फिलहाल रैली की तैयारियां जारी हैं।
पुलिस से मिली अनुमति, अब तारीख बदलने पर नजर
दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस को रामलीला मैदान में 1 नवंबर की रैली आयोजित करने की अनुमति दे दी है। पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम को लेकर आयोजकों, यातायात पुलिस और दूसरी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। रामलीला मैदान को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आयोजन से जुड़ी तैयारियों के लिए उपलब्ध कराया गया है।









