अरुणाचल प्रदेश में सियांग बांध परियोजना के विरोध में शुक्रवार रात हिंसा भड़क गई। पासीघाट में NHPC कार्यालय, पुलिस थाना और वाहन जलाए गए। पथराव में पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थानीय संगठन सर्वे रोकने और गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई मांग रहे हैं।
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग बांध परियोजना के विरोध में शुक्रवार, 23 अक्टूबर की रात जमकर हिंसा हुई। पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) के कार्यालय और पुलिस थाने में आग लगा दी। कई पुलिस वाहन भी जला दिए गए। भीड़ ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और दो विधायकों के घरों में तोड़फोड़ की। पथराव में डीएसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। स्थानीय लोग इस परियोजना से अपने गांव, जमीन और आजीविका को नुकसान पहुंचने की आशंका जता रहे हैं।
12 घंटे का बंद खत्म होने के बाद भड़की हिंसा
सियांग बांध परियोजना के विरोध में शुक्रवार को सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक बंद बुलाया गया था। दिन में अधिकांश स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन रात होते-होते पासीघाट में हालात बिगड़ गए। पुलिस के मुताबिक, रात करीब 11 बजे प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने सड़क पर खड़े पुलिस वाहनों में आग लगा दी। इसके बाद NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन में भी आगजनी हुई। हिंसा शनिवार तड़के तक जारी रही, जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।
लाठियां और गुलेल लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस
बंद के दौरान सियांग जिले के दिते-दिमे इलाके में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, करीब 150 से 200 लोग बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों के पास दाओ, लाठियां और गुलेल होने की बात कही गई है। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो पथराव शुरू हो गया। हालात नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान चार महिलाएं घायल हुईं। पूर्वी सियांग के मेबो इलाके में रनाघाट पुल के पास भी टकराव हुआ। पासीघाट में हुई बाद की हिंसा में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
BJP अध्यक्ष और दो विधायकों के घरों में तोड़फोड़
हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग के आवास को भी निशाना बनाया। इसके अलावा पासीघाट पश्चिम के विधायक निनोंग एरिंग और मरियांग-गेकू के विधायक ओनी पन्यांग के घरों में भी तोड़फोड़ हुई। विधायक निनोंग एरिंग ने आरोप लगाया कि रात करीब दो बजे सैकड़ों युवक उनके घर पहुंचे और सामान को नुकसान पहुंचाने के साथ कीमती वस्तुएं भी ले गए। पासीघाट के डीएसपी टोनी तातक ने बताया कि उपद्रवी मेबो क्षेत्र से आए थे। भीड़ ने आदि समुदाय के प्रमुख संगठन आदि बाने केबांग के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगें क्या हैं?
सियांग बांध के खिलाफ बंद का आह्वान आदि बाने केबांग यूनाइटेड, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम के युवा संगठन और अन्य स्थानीय संगठनों ने मिलकर किया था। प्रदर्शनकारी पहले गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई चाहते हैं। उनकी दूसरी मांग निलंबित गांव प्रमुखों को दोबारा बहाल करना है। तीसरी मांग परियोजना की शुरुआती व्यवहार्यता रिपोर्ट से जुड़े सर्वेक्षण और तकनीकी गतिविधियों को रोकने की है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी क्षेत्र में तैनात अर्धसैनिक और केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
क्या है 11,200 मेगावाट की सियांग बांध परियोजना?
सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी जलविद्युत और जल भंडारण परियोजना है। इसकी प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट है। परियोजना से जुड़ी शुरुआती जांच का काम सरकारी कंपनी NHPC को सौंपा गया है। अप्रैल 2022 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कंपनी को इसकी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। सरकार का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली बनाना नहीं, बल्कि नदी के पानी को सुरक्षित तरीके से जमा करना और उसके बहाव को नियंत्रित करना भी है। फिलहाल बांध निर्माण को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
चीन के बांध से क्या है इस परियोजना का संबंध?
सियांग नदी तिब्बत से निकलती है, जहां इसे यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है। भारत में प्रवेश करने के बाद यह सियांग कहलाती है और आगे असम में ब्रह्मपुत्र नदी का हिस्सा बनती है। चीन इसी नदी पर लगभग 60,000 मेगावाट क्षमता वाली बड़ी जलविद्युत परियोजना विकसित कर रहा है। भारत को चिंता है कि ऊपरी हिस्से में बने बांध से पानी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है। अचानक अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में अरुणाचल प्रदेश और असम के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित भारतीय बांध का जलाशय ऐसी परिस्थितियों में पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
आदिवासी समुदाय को क्यों सता रहा गांव डूबने का डर?
सियांग नदी के किनारे रहने वाले आदि समुदाय का इस नदी से गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव है। समुदाय के लोग इसे मां के समान मानते हैं। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम का दावा है कि बांध बनने पर करीब 27 गांव जलमग्न हो सकते हैं, जबकि कई अन्य गांवों की खेती और आजीविका प्रभावित होगी। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन, घर और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि प्रभावित गांवों और विस्थापित होने वाले लोगों की अंतिम संख्या परियोजना के विस्तृत अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बातचीत का प्रस्ताव दिया
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पासीघाट में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाओं की निंदा की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने स्थानीय संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। उनका कहना है कि सरकार परियोजना के संभावित फायदे और नुकसान पर खुलकर चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
कांग्रेस ने आंसू गैस के इस्तेमाल की जांच मांगी
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हिंसा की निंदा करते हुए प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि प्रभावित समुदायों की चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने घायलों को इलाज उपलब्ध कराने और सरकार से स्थानीय संगठनों के साथ बातचीत शुरू करने की मांग भी की है। दूसरी ओर राज्य सरकार ने लोगों से परियोजना के बारे में अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करने की अपील की है।
पासीघाट समेत कई इलाकों में पांच से ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक
हिंसा के बाद पूर्वी सियांग जिला प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुक्सिन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत पाबंदियां लागू की हैं। शनिवार, 24 अक्टूबर की शाम 5 बजे से प्रभावी आदेश में पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने, बिना अनुमति जुलूस निकालने और हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई है। पुलिस ने तोड़फोड़ और लूटपाट के आरोप में पांच युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बहाल करना है। सियांग परियोजना को लेकर आगे क्या फैसला होगा, यह तकनीकी रिपोर्ट और स्थानीय समुदायों के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।









