भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जल्द से जल्द सुधार करने की जरूरत पर जोर दिया है। भारत का कहना है कि करीब 80 साल पहले तैयार किया गया सुरक्षा परिषद का मौजूदा ढांचा आज की वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप नहीं है।
नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जल्द बदलाव करने की मांग की है। भारत का कहना है कि करीब 80 साल पहले बनी व्यवस्था आज की दुनिया के हिसाब से सही नहीं है। इसलिए सुरक्षा परिषद में ज्यादा देशों को जगह मिलनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने महासभा में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है, इसलिए पुराने नियमों और व्यवस्था के सहारे आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
पुराने ढांचे में बदलाव जरूरी
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद में बदलाव में देरी होने से उसकी काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। हरीश ने कहा कि जिस तरह गाड़ी चलाते समय लगातार पीछे देखकर आगे नहीं बढ़ सकते, उसी तरह पुरानी व्यवस्था के सहारे भविष्य की चुनौतियों का सामना नहीं किया जा सकता। भारत का कहना है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों की दुनिया में अहम भूमिका है, लेकिन सुरक्षा परिषद में उन्हें पर्याप्त जगह नहीं मिली है।
ऐसे में परिषद में ज्यादा देशों को शामिल करना जरूरी है, ताकि फैसले लेते समय सभी क्षेत्रों की बात सुनी जा सके। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता देने और इसके काम करने के तरीके में बदलाव करने की मांग करता रहा है।
दूसरे विश्व युद्ध में भारत के योगदान का जिक्र
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अपने भाषण में भारतीय प्रतिनिधि ने दूसरे विश्व युद्ध में भारत और भारतीय सैनिकों के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने बंगाल के अकाल जैसी ऐतिहासिक घटनाओं की ओर भी ध्यान दिलाया। भारत का कहना है कि सुरक्षा परिषद में बदलाव केवल इतिहास को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आज की दुनिया की जरूरतों के हिसाब से भी होना चाहिए।
UNSC में कितने सदस्य हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। इन पांचों देशों के पास वीटो का अधिकार है। शेष 10 सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। भारत स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने का समर्थन करता है। उसका कहना है कि केवल अस्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने से मौजूदा असंतुलन पूरी तरह दूर नहीं होगा। भारत स्थायी सदस्यता के विस्तार के साथ वीटो के मुद्दे पर भी सार्थक समाधान चाहता है।
भारतीय प्रतिनिधि ने सुधार संबंधी वार्ताओं की धीमी गति की आलोचना करते हुए कहा कि केवल बातचीत जारी रखना पर्याप्त नहीं है, यदि उससे वास्तविक बदलाव की दिशा में प्रगति नहीं होती। उन्होंने आगाह किया कि सीमित सुधारों को व्यापक बदलाव का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।










