चेन्नई में चुनाव आयोग की बैठक से 9 पार्टियों का वॉकआउट, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा

चेन्नई: तमिलनाडु में SSR को लेकर विवाद बढ़ा। चेन्नई में चुनाव आयोग की बैठक से 9 दल बाहर निकले और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

तमिलनाडु में मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विवाद बढ़ गया है। चेन्नई में चुनाव आयोग की बैठक से 9 राजनीतिक दल बाहर निकल गए। इन पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

चेन्नई: तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को विवादों में घिर गई। राज्य की मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामिल 12 राजनीतिक दलों में से 9 ने वॉकआउट कर दिया। इन दलों ने चुनाव आयोग की पिछली SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।

बैठक में अपनी बात रखकर बाहर निकले नेता

चेन्नई के सचिवालय में शुक्रवार को चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई थी। इसका मकसद राज्य में शुरू होने वाले मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की तैयारियों पर चर्चा करना था।

बैठक में सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (TVK), विपक्षी डीएमके और कांग्रेस समेत कई पार्टियों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। नेताओं ने अपनी आपत्तियां अधिकारियों के सामने रखीं। इसके बाद नौ दलों के प्रतिनिधि बैठक छोड़कर चले गए।

इन पार्टियों का कहना है कि पहले हुई मतदाता सूची की विशेष गहन जांच (SIR) में कई लोगों के नाम हट गए थे। ऐसे में नई प्रक्रिया शुरू करने से पहले उन लोगों की परेशानी दूर की जानी चाहिए।

TVK और DMK ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK और उसके सहयोगी दलों ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताई। मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने भी बैठक में हिस्सा लिया, लेकिन बाद में विरोध करते हुए बाहर निकल गई।

डीएमके के नेता आई. परंथमन ने आरोप लगाया कि पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 74 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने पूछा कि इन लोगों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने क्या कदम उठाए हैं।

उनकी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। डीएमके का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि सभी मामले गलत तरीके से नाम काटे जाने के हैं। इस पर अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं।

किन राजनीतिक दलों को बुलाया गया था?

चुनाव आयोग ने बैठक के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त पार्टियों को आमंत्रित किया था।

राष्ट्रीय दलों में कांग्रेस, बीजेपी, बहुजन समाज पार्टी (BSP), आम आदमी पार्टी (AAP), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी CPI(M) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) शामिल थीं।

राज्य की पार्टियों में TVK, DMK, AIADMK, CPI, नाम तमिलर काची (NTK), विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) और DMDK को बुलाया गया था।

बैठक का मकसद नई मतदाता सूची तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों की राय लेना और उन्हें आवेदन की प्रक्रिया समझाना था।

तमिलनाडु में 12 नवंबर से शुरू होगा SSR

चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार, तमिलनाडु में 12 नवंबर से मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण शुरू होगा। यह प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी।

इस दौरान जिन लोगों के नाम सूची में नहीं हैं, वे नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। मतदाता अपने नाम, पते या दूसरी जानकारी में गलती होने पर उसे ठीक भी करा सकेंगे।

नए नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6, नाम हटाने से जुड़ी आपत्ति के लिए फॉर्म 7 और जानकारी में सुधार के लिए फॉर्म 8 का इस्तेमाल किया जाएगा।

नई मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।

74 लाख नाम हटने पर क्यों हो रहा विरोध?

तमिलनाडु में फरवरी 2026 में पिछली SIR प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की गई थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें अलग-अलग कारणों से करीब 74.07 लाख नाम हटाए गए थे।

इसी आंकड़े को लेकर कई राजनीतिक दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि नाम हटने से कुछ योग्य मतदाताओं को परेशानी हुई है।

राजनीतिक दल चाहते हैं कि चुनाव आयोग पहले इन शिकायतों की जांच करे और जिन योग्य लोगों के नाम छूट गए हैं, उन्हें दोबारा सूची में जोड़ने की व्यवस्था करे।

चुनाव आयोग की ओर से भी छूटे हुए और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई है।

मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?

तमिलनाडु में रहने वाले मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपना नाम वोटर लिस्ट में जांच लें। नाम नहीं मिलने या जानकारी गलत होने पर तय प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकता है।

शुक्रवार की बैठक से कई पार्टियों के बाहर निकलने के बाद SSR को लेकर राजनीतिक मतभेद और खुलकर सामने आ गए हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आपत्तियों पर क्या जवाब देता है और अगली मतदाता सूची में छूटे लोगों के नाम जोड़ने के लिए क्या कदम उठाता है।

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