BrahMos Missile: 2028 तक आ सकती है नई ब्रह्मोस मिसाइल, भारत बढ़ाएगा उत्पादन

BrahMos Missile: भारत 2028 तक नई पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल ला सकता है। जानें इसकी खासियत, उत्पादन बढ़ाने की योजना और रक्षा निर्यात पर असर। BrahMos Missile 2028

भारत अपनी ताकतवर ब्रह्मोस मिसाइल का नया मॉडल तैयार कर रहा है। इसके 2028 तक आने की उम्मीद है। वहीं, दूसरे देशों में ब्रह्मोस की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका उत्पादन भी बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय सेना के साथ देश के रक्षा कारोबार को भी फायदा हो सकता है।

नई दिल्ली: भारत और रूस की बनाई ब्रह्मोस मिसाइल अब विदेशों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसके इस्तेमाल के बाद इस मिसाइल पर लोगों का ध्यान और बढ़ गया। ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार और सटीक निशाने के लिए जानी जाती है। भारत अब इस मिसाइल को बड़ी संख्या में बनाने की तैयारी कर रहा है। 

इसके साथ ही ब्रह्मोस का एक नया मॉडल भी विकसित किया जा रहा है, जो पहले से छोटा और हल्का होगा। सरकार और कंपनी का जोर भारतीय सेना की जरूरतें पूरी करने के साथ विदेशों में इसकी बिक्री बढ़ाने पर है।

ब्रह्मोस मिसाइल में क्या है खास?

ब्रह्मोस भारत और रूस के सहयोग से तैयार की गई एक आधुनिक मिसाइल है। यह आवाज की रफ्तार से करीब तीन गुना तेज उड़ सकती है। इसे जमीन, लड़ाकू विमान और युद्धपोत से दागा जा सकता है। इस मिसाइल की खास बात यह है कि यह तेज रफ्तार से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है। इसे दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करने के लिए बनाया गया है। इसी वजह से ब्रह्मोस को भारतीय सेना के प्रमुख हथियारों में गिना जाता है।

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसके इस्तेमाल की खबरों के बाद इसकी क्षमता को लेकर विदेशों में भी चर्चा बढ़ी। हालांकि, अभियान में इससे हुए नुकसान का सही पता आधिकारिक जानकारी से ही लगाया जा सकता है।

दूसरे देशों में भी बढ़ रही ब्रह्मोस की मांग

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO डॉ. जयतीर्थ जोशी के मुताबिक, कंपनी ने ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही विदेशों में मिसाइल बेचने की शुरुआत कर दी थी। साल 2022 में फिलीपींस ने भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का समझौता किया था। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सौदा था, क्योंकि इससे भारतीय मिसाइलों के लिए विदेशी बाजार में नए रास्ते खुले।

अब इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों में भी ब्रह्मोस को लेकर दिलचस्पी की चर्चा है। हालांकि, इन देशों के साथ किसी नए समझौते की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

ब्रह्मोस मिसाइल का उत्पादन बढ़ाया जाएगा

BrahMos Missile: 2028 तक आ सकती है नई ब्रह्मोस मिसाइल, भारत बढ़ाएगा उत्पादन

ब्रह्मोस की मांग बढ़ने के बाद कंपनी ज्यादा मिसाइल बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए मिसाइल के अलग-अलग हिस्से बनाने वाली कंपनियों को भी जोड़ा जाएगा। डॉ. जोशी के मुताबिक, पहले कुछ जरूरी उपकरण बनाने के लिए सीमित कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब ज्यादा कंपनियों को काम देने की योजना है, ताकि उत्पादन तेजी से हो सके।

हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ में ब्रह्मोस से जुड़ी उत्पादन इकाइयां काम कर रही हैं। उत्पादन बढ़ने से भारतीय सेना के साथ विदेशी ग्राहकों को भी समय पर मिसाइल मिल सकेंगी।

2028 तक तैयार हो सकती है नई ब्रह्मोस मिसाइल

भारत ब्रह्मोस का नया मॉडल तैयार कर रहा है। इसे ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) नाम दिया गया है। यह मिसाइल मौजूदा ब्रह्मोस से छोटी और हल्की होगी। कम वजन होने के कारण इसे ज्यादा तरह के लड़ाकू विमानों में लगाया जा सकेगा। नई मिसाइल के 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है। हालांकि, इसकी सही तारीख अभी तय नहीं है। मिसाइल के सभी जरूरी परीक्षण पूरे होने के बाद ही इसे इस्तेमाल के लिए तैयार माना जाएगा।

भारत लंबी दूरी तक हमला करने वाली मिसाइलों पर भी काम कर रहा है। लगभग 1,500 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल को लेकर भी चर्चा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है।

भारत के रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

भारत अब दूसरे देशों को हथियार और सैन्य उपकरण बेचने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 23,622 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया था। ब्रह्मोस मिसाइल इस कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। फिलीपींस के साथ हुए समझौते के बाद दूसरे देशों में भी भारतीय हथियारों के लिए नए अवसर बन सकते हैं।

कंपनी के सामने अब सबसे जरूरी काम उत्पादन बढ़ाना और समय पर मिसाइलों की आपूर्ति करना है। अगर नई ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल सफल होती है और दूसरे देशों से नए ऑर्डर मिलते हैं, तो भारत के रक्षा कारोबार को आने वाले वर्षों में बड़ा फायदा हो सकता है। इससे भारतीय सेना को आधुनिक हथियार मिलने के साथ देश में रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी फायदा होगा।

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