मिर्जापुर के चुनार में श्री राघवेंद्र रामलीला नाट्य समिति की रामलीला के 20वें दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का मंचन हुआ। गुरु वशिष्ठ ने राजतिलक किया। भक्ति गीतों और जय श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
चुनार (मिर्जापुर): रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावुक हो गए। श्री राघवेंद्र रामलीला नाट्य समिति की ओर से आयोजित रामलीला के 20वें दिन श्रीराम के अयोध्या का राजा बनने की लीला दिखाई गई। गुरु वशिष्ठ ने भगवान श्रीराम के माथे पर राजतिलक लगाया। इसके बाद माता सीता के साथ श्रीराम राजसिंहासन पर विराजमान हुए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और भक्तिमय संगीत का आनंद लिया।
गुरु वशिष्ठ ने किया श्रीराम का राजतिलक
चुनार के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला का 20वां दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक को समर्पित रहा। कलाकारों ने अयोध्या में श्रीराम के राजा बनने का प्रसंग मंच पर प्रस्तुत किया।
राज्याभिषेक की लीला में गुरु वशिष्ठ ने भगवान श्रीराम का तिलक किया। इसके बाद ऋषि-मुनियों ने भी उनका राजतिलक कर आशीर्वाद दिया। मंच पर इस दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
राजतिलक के बाद भगवान श्रीराम माता सीता के साथ राजगद्दी पर बैठे। उनके साथ लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की उपस्थिति ने पूरे प्रसंग को और आकर्षक बना दिया।
श्रीराम के राजा बनने की खुशी में अयोध्या में उत्सव मनाए जाने का दृश्य भी दिखाया गया। इस दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
वाराणसी से आए कलाकारों ने सुनाए भक्ति गीत
राज्याभिषेक के मंचन के साथ भक्तिमय संगीत की प्रस्तुति भी हुई। वाराणसी से आईं गायिका पिंकी मिश्रा ने भजनों से श्रद्धालुओं को श्रीराम की भक्ति से जोड़ा।
उनके साथ धीरज तिवारी, सेजल ठाकुर और वीरेंद्र श्रीवास्तव ने भी अपनी संगीत प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों के भजनों से रामलीला मैदान का माहौल भक्तिमय हो गया।
संगीत कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीराम की आराधना में लीन नजर आए। रामकथा से जुड़े भजनों ने राज्याभिषेक के प्रसंग को और भावपूर्ण बना दिया।
सुग्रीव और विभीषण सहित सहयोगियों को दी विदाई
राज्याभिषेक के बाद रामलीला में भगवान श्रीराम की ओर से अपने सहयोगियों को सम्मानित करने का प्रसंग दिखाया गया।
अयोध्या के राजा बनने के बाद श्रीराम ने महाराज सुग्रीव, अंगद और विभीषण सहित अन्य सहयोगियों को अलंकार और आभूषण भेंट किए। इसके बाद उन्हें सम्मान के साथ अयोध्या से विदा किया गया।
इस दृश्य के माध्यम से रामकथा में मित्रता, सहयोग और कृतज्ञता का महत्व दिखाया गया। भगवान श्रीराम ने अपने साथियों के योगदान को याद करते हुए उन्हें सम्मान दिया।
रामलीला के इस हिस्से में श्रीराम के आदर्श चरित्र और अपने सहयोगियों के प्रति सम्मान की भावना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
रामराज्य की चौपाई से दिया सुख-शांति का संदेश
राज्याभिषेक की लीला में रामराज्य की महिमा का भी वर्णन किया गया। इस दौरान रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई 'दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि ब्यापा' के जरिए आदर्श शासन का संदेश दिया गया।
इस चौपाई में ऐसे राज्य की कल्पना की गई है, जहां लोगों को शारीरिक, प्राकृतिक और सांसारिक कष्टों से राहत मिलती है।
मंचन के माध्यम से बताया गया कि रामराज्य में न्याय, शांति और लोककल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। राजा का कर्तव्य अपनी प्रजा की भलाई और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग केवल राजगद्दी संभालने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए समाज में भाईचारे, सेवा और कर्तव्य निभाने का संदेश भी दिया गया।
रामलीला आयोजन में समिति के सदस्य रहे मौजूद
श्री राघवेंद्र रामलीला नाट्य समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पांडेय सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
इस अवसर पर बचाऊलाल सेठ, संजय साहू, अमित गुप्ता, महेंद्र साहू और ब्रजनंदन कुशवाहा की भी उपस्थिति रही।
रामलीला के 20वें दिन राज्याभिषेक की लीला और भक्तिमय संगीत कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे। भगवान श्रीराम के राजतिलक से लेकर सहयोगियों की विदाई तक के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को रामकथा से जोड़े रखा।
चुनार में रामलीला के इस आयोजन ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों और रामराज्य की कल्पना को मंच पर जीवंत किया। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी ऐसी खबरों और स्थानीय अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।








