अखिलेश यादव का भाजपा पर तंज, बोले- वोट चोरी सिखाने के लिए खोलें विश्वविद्यालय, चलाएं तीन साल का कोर्स

अखिलेश यादव ने सैफई में मतदान के बाद भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगाया। चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट पर सवाल उठाए। जानें 2027 चुनाव और कांग्रेस गठबंधन पर क्या कहा।

सैफई में एमएलसी चुनाव के दौरान मतदान करने पहुंचे अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया और 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा को हराने की बात कही।

सैफई: उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को सैफई के क्षेत्र पंचायत कार्यालय में वोट डालने के बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को वोट चोरी सिखाने के लिए विश्वविद्यालय खोलना चाहिए, जहां कार्यकर्ताओं को तीन साल का कोर्स कराया जाए। उन्होंने कई जिलों में मतदान प्रभावित करने और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए।

कई जिलों से मतदान में गड़बड़ी की शिकायतों का दावा

अखिलेश यादव ने कहा कि आगरा, फतेहपुर, गोरखपुर, जौनपुर और कन्नौज समेत कई जगहों से चुनाव में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। उनका आरोप है कि सपा के पक्ष में मतदान करने वाले लोगों को रोकने की कोशिश की जा रही है।

अखिलेश यादव का भाजपा पर तंज, बोले- वोट चोरी सिखाने के लिए खोलें विश्वविद्यालय, चलाएं तीन साल का कोर्स

उन्होंने दावा किया कि इस काम में भाजपा से जुड़े लोगों के साथ कुछ अधिकारियों की भी मदद ली जा रही है। अखिलेश ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिकायतों की जांच होनी चाहिए।

हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों या भाजपा की ओर से इन खास आरोपों पर प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।

वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग से पूछे सवाल

सपा अध्यक्ष ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला भी उठाया। उनके मुताबिक, पार्टी 2022 से लगातार इस बारे में शिकायत कर रही है, लेकिन समस्याएं दूर नहीं हुई हैं।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को दी जाने वाली मतदाता सूची और मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी के पास मौजूद सूची में अंतर मिलता है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि गड़बड़ी कहां हो रही है।

उन्होंने चुनाव आयोग पर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि चुनाव व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई जरूरी है।

2027 में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस से गठबंधन मजबूत करेंगे

विधान परिषद चुनाव के साथ अखिलेश यादव ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर भी बात की। उन्होंने साफ किया कि उनका लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाना है।

कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए रास्ता निकाला जाएगा। उन्होंने दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल मजबूत करने की बात कही।

हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर उन्होंने कोई निश्चित संख्या या फॉर्मूला नहीं बताया। उनके बयान से यह संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्षी एकजुटता को अहम मान रही है।

रोजगार, आरक्षण और सरकारी सेवाओं पर भी सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार को रोजगार और आरक्षण के मुद्दे पर भी निशाने पर लिया। उन्होंने निवेश के दावों के साथ सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाए।

उनका कहना था कि सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने रोजगार के अवसरों और आम लोगों को मिलने वाली जरूरी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए।

किसानों की परेशानी का जिक्र करते हुए अखिलेश ने डीएपी खाद की कमी का मुद्दा उठाया। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति और व्यापारिक समझौतों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, खाद की कमी और इन नीतियों के बीच संबंध साबित करने वाला कोई आंकड़ा उन्होंने उपलब्ध बयान में नहीं दिया।

संजय निषाद की नाराजगी और आजम खां पर क्या बोले?

प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद की नाराजगी से जुड़े सवाल पर अखिलेश ने कहा कि चुनाव के समय किए गए वादे पूरे नहीं होते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

वहीं, पूर्व मंत्री आजम खां से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि न्याय और सच्चाई को कैद नहीं किया जा सकता। आजम खां के प्रति अपना समर्थन जताते हुए अखिलेश ने कहा, "आजम खां साहब आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे।"

उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की खराब हालत का मामला भी उठाया। अखिलेश ने मीडिया से अपील की कि सड़क की स्थिति से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से सामने लाया जाए।

एमएलसी चुनाव के नतीजों पर अब राजनीतिक दलों की नजर

उत्तर प्रदेश में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मतदान कराया गया। इन 11 सीटों के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित किए जाने हैं।

भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कई सीटों पर कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। मतदान के दौरान सामने आए आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

अब चुनाव नतीजों के साथ यह देखना भी अहम होगा कि मतदान में गड़बड़ी को लेकर उठाई गई शिकायतों पर संबंधित अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं। चुनाव और प्रदेश की राजनीति से जुड़े आधिकारिक अपडेट के लिए निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जानकारी देखी जा सकती है।

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