पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और केंद्र सरकार के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
नई दिल्ली: हामिद अंसारी का बयान: भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे अंसारी से जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “भाई, अपना देश ऐसे ही चलता है।”
उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों को देश का अपना नागरिक बताते हुए कहा कि वे कोई बाहरी लोग नहीं हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनावी प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिकों के विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
‘अपनी पब्लिक है, कोई दूसरी नहीं’
हामिद अंसारी बुधवार को दिल्ली के परेड ग्राउंड में धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसी दौरान उनसे देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह की गतिविधियां लोकतांत्रिक जीवन का हिस्सा हैं और देश इसी तरह आगे बढ़ता है।
जब उनसे इस विषय पर कुछ विस्तार से बोलने के लिए कहा गया, तो अंसारी ने प्रदर्शनकारियों के बारे में कहा, “ठीक है, पब्लिक है न... अपनी पब्लिक है। कोई दूसरी नहीं... चलेगा।” उनकी टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर था कि प्रदर्शन करने वाले लोग देश के ही नागरिक हैं। हालांकि, उन्होंने अपने संक्षिप्त बयान में किसी विशेष संगठन, राजनीतिक दल या प्रदर्शन की सभी मांगों का समर्थन नहीं किया। इसलिए उनकी प्रतिक्रिया को किसी खास आंदोलन के पक्ष में स्पष्ट राजनीतिक समर्थन के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर क्या है विवाद?
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर विवाद बढ़ रहा है। कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। विरोध कर रहे लोग ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव से जुड़े सभी काम साफ और पारदर्शी तरीके से होने चाहिए।
इस मामले में कई राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ संगठनों ने लोगों से बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी इन प्रदर्शनों पर अपनी बात रखी है। हालांकि, उन्होंने विरोध करने वाले लोगों के राजनीतिक मकसद पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। उनकी टिप्पणी मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों की नागरिक पहचान और लोकतंत्र में विरोध करने के अधिकार से जुड़ी रही।
2017 में मुसलमानों पर दिए बयान से शुरू हुआ था विवाद
हामिद अंसारी 2007 से 2017 तक देश के उपराष्ट्रपति रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने समाज, धर्म और देश से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनके कुछ बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुए। साल 2017 में उपराष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले अंसारी ने एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि देश के मुसलमानों के बीच असुरक्षा और बेचैनी की भावना बढ़ रही है।
उनकी इस टिप्पणी पर कई राजनीतिक नेताओं ने नाराजगी जताई थी। कुछ नेताओं ने उनके बयान पर सवाल उठाए, जबकि समर्थन करने वालों का कहना था कि अंसारी ने समाज में बढ़ रही चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया था।










