CM योगी बोले- यूपी बना ब्रेकथ्रू स्टेट, अफसरों को जनसेवा और नई तकनीक अपनाने की सलाह

CM योगी ने लखनऊ में साधना श्रृंखला-2026 का शुभारंभ किया। अफसरों को AI तकनीक और जनसेवा अपनाने की सलाह दी। जानें यूपी के विकास पर क्या बोले मुख्यमंत्री।

मिशन कर्मयोगी के तहत लखनऊ में दो दिवसीय साधना श्रृंखला-2026 का आयोजन किया गया है। इसमें आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रशासनिक प्रशिक्षण और जनसेवाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लोक भवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित दो दिवसीय 'साधना श्रृंखला-2026' कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बाधाओं से जूझने वाले राज्य की छवि से बाहर निकलकर विकास की नई पहचान बना चुका है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन एवं प्रबंध अकादमी और भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस क्षेत्रीय कार्यशाला में आठ राज्यों तथा चार केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारी और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

सरकारी फाइलों से आगे बढ़कर जनता की समस्याएं सुलझाएं अधिकारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी लोक सेवक की उपलब्धि केवल फाइलों के निस्तारण से नहीं आंकी जानी चाहिए। प्रशासन की असली सफलता तब है, जब किसी बुजुर्ग, महिला, किसान, युवा या जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी समस्या का समय पर समाधान मिले।

CM योगी बोले- यूपी बना ब्रेकथ्रू स्टेट, अफसरों को जनसेवा और नई तकनीक अपनाने की सलाह

उन्होंने बताया कि बदलते समय में सरकारी कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल

साधना श्रृंखला-2026 की तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला के लिए लखनऊ को चुना गया है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए Capacity Building Commission का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों के बीच अनुभव साझा करने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश के अधिकारी दूसरे राज्यों की सफल योजनाओं को समझ सकेंगे, जबकि अन्य प्रतिनिधियों को यहां लागू की गई व्यवस्थाओं की जानकारी मिलेगी।

2017 से पहले की व्यवस्था पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 से पहले की सरकारों की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवाद, भ्रष्टाचार, अपराध और नीतिगत उदासीनता के कारण प्रदेश की विकास संभावनाएं प्रभावित हुई थीं।

उनके अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रशासनिक सुधारों, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को उत्तर प्रदेश की 'बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट' बनने की यात्रा बताया।

इंसेफेलाइटिस और गरीब परिवारों को मिली सुविधाओं का जिक्र

स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से पिछले चार दशकों में लगभग 50 हजार बच्चों की जान गई थी।

आवास और स्वच्छता योजनाओं के आंकड़े साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में 65 लाख गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं। तीन करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनवाए गए हैं। इसके अलावा 15 करोड़ से अधिक लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

एक्सप्रेसवे और एयर कनेक्टिविटी पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन इलाकों में कभी टैंकर और ट्रेनों से पानी पहुंचाना पड़ता था, वहां अब 'हर घर जल' योजना के माध्यम से घरों तक पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में मौजूद है। प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई संपर्क का भी विस्तार हुआ है। उनके मुताबिक राज्य में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डे संचालित हो रहे हैं।

iGOT Karmayogi पोर्टल पर 19.26 लाख कर्मचारी पंजीकृत

सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19 लाख 26 हजार कार्मिक iGOT Karmayogi पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ये कर्मचारी अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं।

प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से भी जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि सरकारी निर्णयों में सुधार लाना और नागरिक सेवाओं को अधिक सरल बनाना है।

उन्होंने अधिकारियों से नई तकनीक और जनसेवा के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि प्रशासनिक सुधारों का असर आम लोगों के दैनिक जीवन में दिखाई देना चाहिए।

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