कर्नाटक के मांड्या जिले में किसानों ने शुक्रवार को मैसूरु-बेंगलुरु हाईवे पर करीब दो घंटे तक रास्ता रोके रखा। गन्ने के बेहतर दाम और कर्ज माफी समेत कई मांगों को लेकर गणंगूरु टोल प्लाजा पर बड़ी संख्या में किसान जुटे।
मांड्या: कर्नाटक में गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को किसानों ने मैसूरु-बेंगलुरु हाईवे पर प्रदर्शन किया। श्रीरंगपट्टन के गणंगूरु टोल प्लाजा के पास बड़ी संख्या में किसान जमा हो गए और करीब दो घंटे तक सड़क पर आवाजाही रुक गई। इस प्रदर्शन की अगुवाई मेलुकोटे के विधायक दर्शन पुट्टन्नैया और कर्नाटक राज्य रैयत संघ (KRRS) के नेता बदगलपुरा नागेंद्र ने की। किसान लंबे समय से अपनी मांगों पर फैसला लेने की बात कह रहे हैं।
गणंगूरु टोल प्लाजा पर जुटे किसान
मैसूरु और बेंगलुरु को जोड़ने वाले हाईवे पर शुक्रवार को किसानों के प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। किसान सुबह से ही गणंगूरु टोल प्लाजा के पास पहुंचने लगे थे। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा गन्ने की कीमत था। कर्नाटक राज्य रैयत संघ ने पहले ही 23 अक्टूबर को हाईवे रोकने का ऐलान कर दिया था।
संगठन ने मांड्या, मैसूरु और चामराजनगर समेत आसपास के इलाकों के किसानों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। यह सड़क कर्नाटक के दो बड़े शहरों को जोड़ती है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री और माल ढोने वाले वाहन इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में करीब दो घंटे तक रास्ता बंद रहने से यहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी हुई।
गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन की मांग
किसानों की सबसे बड़ी मांग गन्ने का दाम बढ़ाना है। वे चाहते हैं कि सरकार प्रति टन गन्ने की कीमत 5,500 रुपये तय करे।
किसान संगठनों का कहना है कि खेती पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। खाद, मजदूरी और दूसरी जरूरी चीजों पर पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके मुकाबले फसल बेचने पर मिलने वाली रकम पर्याप्त नहीं है।
KRRS नेता बदगलपुरा नागेंद्र ने भी गन्ने की कीमत का मुद्दा उठाया है। संगठन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिले।
किसान लंबे समय से गन्ने की उचित कीमत तय करने की मांग कर रहे हैं। उत्तर कर्नाटक के कई इलाकों में भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं।
चीनी मिलों से बकाया पैसा दिलाने की मांग
गन्ने की कीमत के अलावा किसानों ने चीनी मिलों से बकाया भुगतान दिलाने का मुद्दा भी उठाया है।
उनका आरोप है कि फसल बेचने के बाद कई बार पूरा पैसा समय पर नहीं मिलता। इससे अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो जाता है। खेती का सामान खरीदने और मजदूरों को भुगतान करने के लिए किसानों को पैसों की जरूरत पड़ती है।
किसान संगठनों ने मांग की है कि चीनी मिलों पर जो भी बकाया है, उसका भुगतान जल्द कराया जाए। उनका कहना है कि फसल की रकम के लिए बार-बार इंतजार करना पड़ता है, जबकि खेती के खर्च टाले नहीं जा सकते।
कर्ज माफी और दूध की कीमत भी मुद्दा
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने कृषि कर्ज पूरी तरह माफ करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि बढ़ते खर्च और फसल से कम कमाई के कारण कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बना हुआ है।
इसके अलावा दूध उत्पादकों के लिए बेहतर कीमत की मांग की गई। किसान संगठनों ने दूध पर अतिरिक्त सहायता देने, खाद सस्ती करने और पशुओं के चारे की बढ़ती कीमतों को कम करने की बात भी उठाई है।
स्थानीय किसान नेताओं के मुताबिक, सरकार से कई बार इन समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की गई है। उनका आरोप है कि आश्वासन मिलने के बावजूद जरूरी फैसले नहीं लिए गए।
पहले भी गणंगूरु टोल पर हुआ था प्रदर्शन
गणंगूरु टोल प्लाजा पर किसानों का यह पहला विरोध प्रदर्शन नहीं है। जून 2026 में भी यहां किसान संगठनों ने टोल वसूली के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस समय किसानों की शिकायत थी कि फल, सब्जियां और दूसरी कृषि उपज ले जाने वाले वाहनों से टोल वसूला जा रहा है। उन्होंने ऐसे वाहनों को शुल्क से छूट देने की मांग की थी।
बाद में हाईवे अधिकारियों से बातचीत के बाद किसानों के वाहनों को राहत देने पर सहमति बनी थी। हालांकि, शुक्रवार का प्रदर्शन मुख्य रूप से गन्ने की कीमत, कृषि कर्ज और किसानों की कमाई से जुड़ी मांगों को लेकर हुआ।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
किसान संगठनों ने केंद्र और कर्नाटक सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की है। उनका कहना है कि गन्ने का सही दाम मिलने और बाकी समस्याओं का हल निकलने तक वे अपनी बात उठाते रहेंगे। प्रदर्शन से पहले किसान नेताओं ने चेतावनी दी थी कि मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
फिलहाल किसानों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। खासतौर पर गन्ने की कीमत 5,500 रुपये प्रति टन करने, चीनी मिलों से बकाया दिलाने और कृषि कर्ज माफ करने की मांगों पर अभी फैसला होना बाकी है।









