फरीदाबाद के बड़ौली और प्रह्लादपुर गांव के किसान जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर कई महीनों से धरना दे रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विरोध में काले झंडे दिखाने निकले किसानों को पुलिस ने रोक दिया।
फरीदाबाद: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विरोध में काले झंडे दिखाने जा रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। ग्रेटर फरीदाबाद के बड़ौली और प्रह्लादपुर गांव के किसान जमीन अधिग्रहण के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री के सूरजकुंड में आयोजित दिवाली मेले में पहुंचने के दौरान किसान विरोध जताने के लिए निकले थे। पुलिस के रोकने पर दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विरोध जताने जा रहे थे किसान
बड़ौली और प्रह्लादपुर गांव के किसानों का अनिश्चितकालीन धरना कई महीनों से चल रहा है। शुक्रवार को धरने के संयोजक वीरपाल गुर्जर अन्य किसानों के साथ मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने के लिए निकले।
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पुलिस ने किसानों को कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालांकि, पुलिस ने किसानों को आगे नहीं जाने दिया।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष धनसिंह कोतवाल और धरना अध्यक्ष वीरपाल गुर्जर ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय विरोध की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
किसान नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
16 साल पहले हुआ था जमीन अधिग्रहण, मुआवजे पर विवाद
धरना संयोजक वीरपाल गुर्जर के मुताबिक, बड़ौली और प्रह्लादपुर गांव के किसानों की जमीन लगभग 16 साल पहले अधिग्रहित की गई थी। उस समय किसानों के लिए 645 रुपये प्रति गज की दर से मुआवजा निर्धारित किया गया था।
किसानों का कहना है कि जमीन की मौजूदा बाजार कीमत को देखते हुए यह मुआवजा उचित नहीं है। इसी कारण वे अधिग्रहण से राहत या बेहतर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने सरकार के सामने भूमि पुनर्व्यवस्था यानी लैंड पूलिंग का विकल्प भी रखा है। इसके तहत उनकी मांग है कि अधिग्रहित जमीन के बदले उन्हें उचित स्थान पर जमीन उपलब्ध कराई जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से जमीन मालिकों के हितों की रक्षा हो सकती है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों से शिकायत के बाद भी नहीं निकला समाधान
किसान नेताओं के अनुसार, वे अपनी मांगों को लेकर पहले भी कई बार सरकार से संपर्क कर चुके हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को 9 जनवरी 2025 और 8 सितंबर 2025 को इस विवाद की जानकारी दी गई थी।
इसके अलावा मंत्री राजेश नागर और विपुल गोयल के सामने भी किसानों की समस्याएं रखी जा चुकी हैं। किसानों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
वीरपाल गुर्जर ने कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। उनका कहना है कि सरकार को बातचीत के जरिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े विवाद का समाधान निकालना चाहिए।
फिलहाल किसानों का धरना जारी है। इस मामले में सरकार और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर प्रदर्शनकारियों की नजर है।








