बिहार के रोहतास जिले के काराकाट में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की प्रतीक्षा सूची की दोबारा जांच होगी। पात्र परिवारों के नाम छूटने और अपात्र लोगों को शामिल करने की शिकायत के बाद अधिकारियों को एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश मिला है।
रोहतास: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत घर मिलने का इंतजार कर रहे काराकाट के लोगों की सूची फिर से जांची जाएगी। प्रशासन को शिकायत मिली है कि कुछ ऐसे परिवारों के नाम सूची में शामिल हैं, जो योजना का लाभ लेने के योग्य नहीं हैं। वहीं, कई जरूरतमंदों को जगह नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। इस मामले में उप विकास आयुक्त डॉ. आकांक्षा आनंद ने प्रखंड के अधिकारियों को सभी पंचायतों में जांच कराने का निर्देश दिया है।
13 अक्टूबर को जारी हुआ था जांच का आदेश
रोहतास की उप विकास आयुक्त डॉ. आकांक्षा आनंद ने 13 अक्टूबर को काराकाट के प्रखंड विकास पदाधिकारी के नाम पत्र जारी किया था। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की प्रारूप प्रतीक्षा सूची में दर्ज परिवारों की पात्रता की दोबारा जांच कराने को कहा गया है।
इस काम के लिए प्रखंड स्तर पर अधिकारियों की टीम बनाई जाएगी। टीम पंचायतों में जाकर सूची में शामिल परिवारों की वास्तविक स्थिति देखेगी।
अधिकारियों को जांच पूरी कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
जरूरतमंद परिवारों के नाम छूटने का आरोप
काराकाट में आवास योजना की सूची को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। शिकायत है कि कुछ ऐसे लोगों को सूची में जगह दी गई है, जो योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते।
वहीं, कई गरीब परिवार ऐसे भी हैं, जिन्हें पक्के घर की जरूरत है, लेकिन उनका नाम प्रतीक्षा सूची में नहीं आ सका।
एक लाभुक ने बताया कि उसे सूची में नाम जुड़वाने के लिए काफी कोशिश करनी पड़ी थी। दूसरे पंचायत से जांच करने आए आवास सहायक की मदद से उसका नाम शामिल हो पाया।
इन शिकायतों के बाद अब प्रशासन ने पहले हुए चयन की जांच कराने का फैसला किया है।
भाजपा नेता की शिकायत के बाद मिला निर्देश
काराकाट के प्रखंड विकास पदाधिकारी संजीत कुमार ने बताया कि भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अर्जुन गुप्ता ने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र भेजा था।
इस पत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत तैयार की गई प्रतीक्षा सूची की जांच कराने की मांग की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद मामला उप विकास आयुक्त के पास पहुंचा। इसके बाद सभी पंचायतों में लाभुकों की पात्रता की जांच कराने का आदेश दिया गया।
बीडीओ के मुताबिक, अधिकारियों की टीम बनाई जाएगी, जो सूची में दर्ज परिवारों की स्थिति की जांच करेगी।
आवास सहायकों की भी बढ़ी चिंता
दोबारा जांच के आदेश के बाद उन आवास सहायकों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने पहले लाभुकों के चयन और सत्यापन का काम किया था।
कुछ कर्मचारियों को आशंका है कि अगर सूची तैयार करने में गड़बड़ी सामने आई, तो उनकी भूमिका की भी जांच हो सकती है।
हालांकि अभी किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों का चयन गलत तरीके से हुआ था।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है।
किन लोगों के कट सकते हैं नाम?
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का लाभ उन परिवारों के लिए है, जो सरकार की तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
काराकाट में होने वाली जांच के दौरान अधिकारियों को यह देखना होगा कि सूची में दर्ज परिवार योजना के नियमों के अनुसार योग्य हैं या नहीं।
अगर किसी परिवार का नाम गलत जानकारी के आधार पर शामिल पाया जाता है, तो नियमों के तहत उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है।
लेकिन केवल शिकायत के आधार पर किसी को अपात्र नहीं माना जाएगा। इसके लिए जांच में तथ्य सामने आना जरूरी है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगा आगे का फैसला
काराकाट की सभी पंचायतों में जांच पूरी होने के बाद अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसी के आधार पर प्रशासन तय करेगा कि सूची में किस तरह का सुधार जरूरी है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि कितने परिवारों के नाम पर सवाल उठे हैं और कितने पात्र लोग सूची से बाहर हैं।
जिन ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया है, वे अपनी पंचायत के आवास सहायक या प्रखंड कार्यालय से सूची की जानकारी ले सकते हैं।










