Serbia Election 2026: डेढ़ लाख लोगों की रैली से बढ़ी वुसिक की मुश्किलें, क्या छात्र बदलेंगे सर्बिया की सरकार?

Serbia Election 2026: सर्बिया में 25 अक्टूबर को चुनाव से पहले करीब 1.5 लाख लोग छात्रों की रैली में जुटे। जानें वुसिक की पार्टी को कैसे चुनौती दे रहा छात्र

सर्बिया में 25 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले छात्र आंदोलन ने बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है। बेलग्रेड की रैली में करीब 1.5 लाख लोग जुटे। भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की पार्टी को सीधी चुनौती दे रहा है।

बेलग्रेड: यूरोपीय देश सर्बिया में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को होने वाले संसदीय चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। राजधानी बेलग्रेड में छात्रों के नेतृत्व वाले विपक्षी संगठन 'स्टूडेंट्स लिस्ट' की रैली में करीब डेढ़ लाख लोग शामिल हुए। यह संगठन पिछले 14 साल से सत्ता में बनी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) को हराने की कोशिश कर रहा है। 

पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक इस बार प्रधानमंत्री बनने के लिए चुनावी मैदान में हैं। वहीं, छात्र आंदोलन भ्रष्टाचार और सरकारी जवाबदेही को मुख्य मुद्दा बनाकर लोगों से समर्थन मांग रहा है।

बेलग्रेड की सड़कों पर उतरे डेढ़ लाख लोग

चुनाव से तीन दिन पहले गुरुवार, 22 अक्टूबर को बेलग्रेड में छात्रों ने अपनी अंतिम बड़ी रैली आयोजित की। स्लाविया स्क्वायर और आसपास की सड़कें समर्थकों से भर गईं। स्वतंत्र संगठन आर्काइव ऑफ पब्लिक गैदरिंग्स के अनुमान के मुताबिक, करीब 1.5 लाख लोग इसमें शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने 'स्टूडेंट्स जीतेंगे' और 'जीत' के नारे लगाए। कई लोगों ने मोबाइल की लाइट जलाकर आंदोलन का समर्थन किया।

छात्रों का कहना है कि उनका मकसद केवल सरकार बदलना नहीं, बल्कि देश में भ्रष्टाचार खत्म करना और कानून का शासन मजबूत करना है। इस अभियान में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो लंबे समय से पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों से नाराज हैं।

16 लोगों की मौत के बाद शुरू हुआ था आंदोलन

सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी। उत्तरी शहर नोवी साद के रेलवे स्टेशन पर कंक्रीट का छज्जा गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद रेलवे निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप सामने आए। छात्रों ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू की।

सरकार के खिलाफ यह विरोध धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। विश्वविद्यालयों के छात्रों ने प्रदर्शन किए और समय से पहले चुनाव कराने की मांग उठाई। करीब दो साल तक चले आंदोलन के बाद छात्रों ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। इसी से 'स्टूडेंट्स लिस्ट' सामने आई, जिसमें शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीति से बाहर के लोगों को भी जगह मिली है।

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राष्ट्रपति पद छोड़कर प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं वुसिक

अलेक्जेंडर वुसिक सर्बिया की राजनीति में पिछले एक दशक से सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। उनकी पार्टी SNS वर्ष 2012 से सत्ता में है। वुसिक दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं। उन्होंने 27 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था, ताकि संसदीय चुनाव में हिस्सा लेकर प्रधानमंत्री बन सकें। उनके इस्तीफे के बाद संसद की अध्यक्ष एना ब्रनाबिच कार्यवाहक राष्ट्रपति बनीं।

वुसिक चुनाव प्रचार में नई सड़कों, अस्पतालों और विकास योजनाओं का जिक्र कर रहे हैं। उन्होंने छात्र आंदोलन पर विदेशी ताकतों के समर्थन से देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, छात्र संगठन इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि उसका आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ आम लोगों की लड़ाई है।

रूस से संबंध और यूरोपीय संघ भी बना चुनावी मुद्दा

चुनाव प्रचार के दौरान वुसिक ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकारी टीवी RTS से कहा कि पुतिन उनके प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद जता चुके हैं। सर्बिया यूरोपीय संघ की सदस्यता हासिल करना चाहता है, लेकिन रूस से उसके करीबी रिश्तों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

सितंबर में युद्ध अपराधों के दोषी पूर्व बोस्नियाई सर्ब सैन्य कमांडर रत्को म्लादिच के अंतिम संस्कार को मिले सरकारी समर्थन से भी यूरोपीय देशों ने नाराजगी जताई थी। वुसिक के आलोचक उन पर मीडिया की स्वतंत्रता सीमित करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाते हैं। वुसिक इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

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