जब सत्ता किसी चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना लेती है, तो उसकी अहमियत आम चुनावी मुकाबले से कहीं आगे बढ़ जाती है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का 2026 का चुनाव भी कुछ ऐसा ही राजनीतिक माहौल दिखाता है।
पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। इस चुनाव में एक ओर जनसुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार के प्रचार अभियान से जुड़े मोकामा विधायक अनंत सिंह चर्चा में हैं, तो दूसरी ओर जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थन में वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता ने मुकाबले को खास बना दिया है।
आमतौर पर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों में राजनीतिक दल संगठन और समर्थकों के जरिए उम्मीदवारों की मदद करते हैं। लेकिन इस बार प्रचार अभियान में बड़े नेताओं की भागीदारी और अनंत सिंह के स्वागत के भव्य आयोजनों ने चुनाव को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व दे दिया है। यही वजह है कि पटना की यह सीट अब केवल विधान परिषद की एक सीट तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि इसे राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक ताकत से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
अनंत सिंह के स्वागत में दिखा समर्थकों का उत्साह
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चुनावी प्रचार के दौरान अनंत सिंह के स्वागत के कई दृश्य चर्चा में आए। मसौढ़ी और धनरुआ क्षेत्र में रोड शो के दौरान उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में वाहन दिखाई दिए। समर्थकों ने रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर उनका स्वागत किया। धनरुआ के पभेड़ी मोड़ पर जेसीबी मशीन से फूल बरसाए जाने का दृश्य विशेष रूप से चर्चा में रहा। इसके अलावा, एक अन्य स्वागत कार्यक्रम में क्रेन की मदद से उन्हें बड़ी फूलों की माला पहनाए जाने की बात सामने आई। चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किए जाने की खबरों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
इन आयोजनों से समर्थकों के बीच अनंत सिंह की लोकप्रियता और उनके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हुई। हालांकि, स्वागत समारोहों में जुटी भीड़ को अपने आप में व्यापक जनसमर्थन या चुनावी जीत का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसका आकलन चुनाव परिणाम और अन्य राजनीतिक संकेतकों के आधार पर ही किया जा सकता है।
नीरज कुमार के समर्थन में वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता
इस चुनाव का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के पक्ष में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी है। खबरों के मुताबिक, उनकी तबीयत खराब होने के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने उनसे मुलाकात की। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी नीरज कुमार से मिलने पहुंचे और उन्हें आराम करने की सलाह देते हुए चुनाव की जिम्मेदारी संभालने की बात कही।
नीतीश कुमार की इस सक्रियता को चुनाव के राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के किसी वरिष्ठ उम्मीदवार के लिए शीर्ष नेतृत्व का खुलकर सामने आना संगठन के भीतर एकजुटता का संदेश भी देता है। इसके अलावा, वरिष्ठ जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा नीरज कुमार के समर्थन में अपील किए जाने की खबर ने भी ध्यान आकर्षित किया। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया कि आखिर पटना स्नातक सीट को लेकर राजनीतिक नेतृत्व इतना सक्रिय क्यों है।








