दिल्ली में 26 और 27 अक्टूबर को ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक होगी। इसमें रूस, चीन, ईरान और UAE सहित सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और संसदीय सहयोग पर चर्चा होगी।
नई दिल्ली: भारत इस बार 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की मेजबानी कर रहा है। इसके लिए रूस, चीन, ब्राजील, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों के संसदीय प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचेंगे। दो दिन की बैठक 26 अक्टूबर से शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें हिस्सा लेंगे और विदेश से आए प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार बातचीत का मुख्य विषय लोगों के विकास में संसद की भूमिका को मजबूत करना है। बैठक में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल, डिजिटल तकनीक, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रूस और ईरान जैसे देशों की मौजूदगी के कारण इस आयोजन पर खास नजर रहेगी।
दिल्ली में कहां होगी ब्रिक्स देशों की बैठक?
ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक 26 और 27 अक्टूबर को संसद भवन परिसर के संविधान सदन में होगी। कार्यक्रम के लिए पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष को चुना गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 22 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 भागीदार देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है।
इनमें अलग-अलग देशों की संसद के अध्यक्ष, सांसद और दूसरे बड़े अधिकारी शामिल होंगे। भारत की ओर से राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय मंत्री और राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। बैठक के दौरान विदेशी मेहमानों की भारतीय नेताओं से अलग से बातचीत भी होगी। कार्यक्रम 27 अक्टूबर को खत्म होगा।
ईरान के संसद अध्यक्ष भी आएंगे भारत
इस बैठक में ईरान की भागीदारी को काफी अहम माना जा रहा है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ दिल्ली आने वाले हैं। वह अपने देश के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे। रूस, चीन, ब्राजील और UAE से भी बड़े संसदीय नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। दरअसल, पश्चिम एशिया में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ईरान और कुछ दूसरे देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। ऐसे समय में इन देशों के नेताओं का एक जगह मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इस सम्मेलन के तय एजेंडे में शामिल नहीं है। फिर भी अलग-अलग देशों के नेताओं की आपसी मुलाकात में इस पर बात हो सकती है।
AI और नई तकनीक पर होगी बात
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इस बार सम्मेलन में इस बात पर ज्यादा जोर रहेगा कि संसद और सरकारें आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकती हैं। बैठक का मुख्य विषय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर संसदों को मजबूत बनाना है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी बातचीत होगी। देश आपस में चर्चा करेंगे कि नई तकनीक का फायदा आम लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए और इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी से कैसे हो।
इसके अलावा सरकारी संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने, अलग-अलग देशों की संसदों में सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों की बात दुनिया के बड़े मंचों पर रखने पर भी चर्चा होगी।
पर्यावरण, आने वाले समय की जरूरतों और विकास से जुड़े मुद्दे भी बैठक का हिस्सा होंगे।
दूसरे देशों से क्या सीखेगा भारत?
सम्मेलन में सांसद केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ही बातचीत नहीं करेंगे। वे अपने-अपने देशों में संसद का कामकाज किस तरह होता है, इसकी जानकारी भी साझा करेंगे। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी संसदीय समितियों की अलग बैठक रखी गई है। इसमें अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि बताएंगे कि उनके यहां संसद और उसकी समितियां किस तरह काम करती हैं। इससे एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का मौका मिलेगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कहना है कि इस तरह की बैठकों से देशों के बीच बातचीत बढ़ती है और आपसी मुद्दों पर सहमति बनाने में मदद मिलती है।
25 अक्टूबर को होगी एक और बैठक
मुख्य कार्यक्रम शुरू होने से एक दिन पहले, यानी 25 अक्टूबर को विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के सचिवों की बैठक होगी। इसमें उस साझा बयान को तैयार करने पर बात होगी, जिसे सम्मेलन खत्म होने पर जारी किया जा सकता है। इस बयान में उन मुद्दों को शामिल करने की कोशिश होगी, जिन पर सभी देश सहमत होंगे।
ओम बिरला ने उम्मीद जताई है कि बातचीत के जरिए देश एक साझा बयान पर सहमति बना लेंगे। हालांकि, अंतिम बयान में क्या बातें होंगी, यह बैठक पूरी होने के बाद ही पता चलेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?
ब्रिक्स में दुनिया के कई बड़े और तेजी से बढ़ते देशों की भागीदारी है। इस मंच पर सदस्य देश व्यापार, विकास, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करते हैं। इस बार संसदीय मंच की मेजबानी भारत के पास है। ऐसे में भारतीय सांसदों को भी दूसरे देशों के नेताओं से सीधे बात करने का मौका मिलेगा।सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी भी रहेगी। उनके विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मिलने का कार्यक्रम है।









