देहरादून में एमडीडीए ने अवैध प्लाटिंग और बिना नक्शा पास कराए किए गए निर्माण पर कार्रवाई की। शिमला बाईपास पर 20 बीघा प्लाटिंग ध्वस्त की गई। पौंधा रोड पर 30 से 40 बीघा प्लाटिंग सील हुई। मसूरी और बिधौली में भी कई निर्माण सील किए गए।
देहरादून: शहर और आसपास के इलाकों में बिना अनुमति जमीन की प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने शनिवार को अभियान चलाया। प्राधिकरण की टीमों ने सात स्थानों पर पहुंचकर अवैध प्लाटिंग, निर्माण और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान कई बीघा जमीन पर विकसित की जा रही प्लाटिंग को ध्वस्त या सील किया गया। मसूरी और बिधौली में भी नियमों का उल्लंघन मिलने पर निर्माण सील किए गए।
शिमला बाईपास पर 20 बीघा प्लाटिंग पर चला बुलडोजर
एमडीडीए की टीम ने शिमला बाईपास रोड से जुड़े मेदनीपुर, ढकरानी और हरबर्टपुर क्षेत्र में कार्रवाई की। यहां गौरव रावत की ओर से करीब 20 बीघा जमीन पर प्लाटिंग की जा रही थी। प्राधिकरण के अनुसार, यह प्लाटिंग आवश्यक अनुमति के बिना विकसित की जा रही थी।
![]()
टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई का मकसद बिना मंजूरी जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर विकसित करने पर रोक लगाना था।
देहरादून के बाहरी इलाकों में जमीन खरीदने और मकान बनाने की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति और प्राधिकरण से मिली मंजूरी की जांच करना जरूरी है।
पौंधा रोड पर 30 से 40 बीघा प्लाटिंग सील
शिमला बाईपास के अलावा पौंधा रोड पर भी एमडीडीए की टीम पहुंची। यहां राजेंद्र अग्रवाल की ओर से करीब 30 से 40 बीघा जमीन पर प्लाटिंग विकसित की जा रही थी।
प्राधिकरण ने नियमों के उल्लंघन का मामला बताते हुए पूरी प्लाटिंग को सील कर दिया। इस जमीन पर आगे किसी तरह की गतिविधि के लिए संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना होगा।
एमडीडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति जमीन विकसित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। बड़े भूखंडों पर प्लॉट काटने से पहले जरूरी स्वीकृति लेना अनिवार्य है।
मसूरी के विन्सेन्ट हिल और हाथीपांव रोड पर कार्रवाई
देहरादून के साथ मसूरी में भी अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाया गया। प्राधिकरण की टीम ने विन्सेन्ट हिल, क्रेग टाप एस्टेट, वैवरली और हाथीपांव रोड क्षेत्र में निर्माण कार्यों की जांच की।
यहां अरुण सहगल और निर्माणकर्ता राहुल रोहानी से संबंधित अवैध निर्माण के मामले में सीलिंग की कार्रवाई की गई।
मसूरी जैसे पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। किसी भी भवन का निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से नक्शा पास कराना और आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
बिधौली में कैफे और दुकानों पर भी लगा ताला
एमडीडीए की कार्रवाई केवल जमीन की प्लाटिंग और भवन निर्माण तक सीमित नहीं रही। बिधौली में यूपीईएस के आसपास चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी जांच की गई।
इस दौरान अक्षय पंवार के कैफे और रवि शंकर के कैफे व दुकान को सील किया गया। इसके अलावा गायत्री शर्मा की बिना स्वीकृत मानचित्र वाली दुकान पर भी कार्रवाई हुई।
इसी क्षेत्र में संचालित माही कैफे को भी प्राधिकरण की टीम ने सील कर दिया।
एमडीडीए के मुताबिक, कैफे, दुकान या दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने के लिए जरूरी निर्माण संबंधी अनुमतियां होनी चाहिए। बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
जमीन खरीदने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
देहरादून और उसके आसपास जमीन खरीदने वालों को अब थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। कई जगह बिना मंजूरी के प्लॉट काटे जा रहे हैं। ऐसे में सिर्फ सस्ती जमीन या अच्छी लोकेशन देखकर पैसा लगाना महंगा पड़ सकता है। बाद में मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने में दिक्कत आ सकती है।
जमीन का सौदा करने से पहले उसके कागजात अच्छी तरह देख लें। यह भी पता करें कि जहां प्लॉट बेचा जा रहा है, वहां प्लाटिंग की मंजूरी मिली है या नहीं। जमीन किसके नाम पर है और उसका लेआउट पास है या नहीं, इसकी जानकारी भी जरूरी है।
अगर किसी जमीन को लेकर एमडीडीए में मामला चल रहा है या वहां पहले कोई कार्रवाई हुई है, तो पूरी जानकारी मिलने के बाद ही खरीदारी का फैसला करें।
शनिवार को एमडीडीए ने देहरादून, मसूरी और आसपास के सात स्थानों पर कार्रवाई की। कहीं अवैध प्लाटिंग तोड़ी गई तो कहीं निर्माण और दुकानों को सील किया गया। प्राधिकरण का कहना है कि बिना मंजूरी प्लाटिंग और निर्माण करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी।







