सर्बिया के संसदीय चुनाव में छात्र समर्थित गठबंधन 'स्टूडेंट लिस्ट' ने जीत दर्ज की है। पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने हार स्वीकार कर ली। शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों में छात्र गठबंधन को 52 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले हैं।
बेलग्रेड: यूरोपीय देश सर्बिया में करीब दो साल से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। रविवार, 25 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव में छात्र समर्थित गठबंधन 'स्टूडेंट लिस्ट' ने पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) के नेतृत्व वाले गठबंधन को हरा दिया। वुचिच ने रविवार रात अपनी हार स्वीकार कर ली।
सोमवार सुबह जारी शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, स्टूडेंट लिस्ट को 52.65 प्रतिशत वोट मिले, जबकि वुचिच के गठबंधन को 39.22 प्रतिशत वोट मिले। संसद की 250 सीटों में से छात्र गठबंधन को करीब 139 सीटें मिलने का अनुमान है। हालांकि, सीटों का अंतिम आधिकारिक बंटवारा अभी बाकी है।
वुचिच ने खुद बताया- हम चुनाव हार गए
अलेक्जेंडर वुचिच ने रविवार रात अपनी पार्टी के मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पूरे नतीजे अभी नहीं आए हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से साफ है कि उनकी पार्टी चुनाव हार चुकी है।
वुचिच ने शुरुआती अनुमान में छात्र गठबंधन को 135 से 140 और अपनी पार्टी के गठबंधन को करीब 105 सीटें मिलने की बात कही थी। बाद में मतगणना आगे बढ़ने के साथ आंकड़ों में बदलाव आया।
सर्बिया के चुनाव आयोग के अनुसार, छात्र गठबंधन को 22.46 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं। वहीं, वुचिच के गठबंधन को करीब 16.73 लाख वोट मिले। इस बार मतदान प्रतिशत 68.78 रहा।
बेलग्रेड की सड़कों पर रातभर मनाया जश्न
वुचिच के हार स्वीकार करते ही राजधानी बेलग्रेड में लोग सड़कों पर निकल आए। हजारों युवाओं ने सर्बिया के झंडे लहराए। कई जगह गाड़ियों के हॉर्न बजाए गए और आतिशबाजी हुई।
लोगों की भीड़ संसद भवन और शहर के प्रमुख चौराहों पर जमा हो गई। जीत का जश्न नोवी साद समेत दूसरे शहरों में भी मनाया गया।
छात्र गठबंधन के नेताओं ने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना पहला कदम है। अब देश में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां सरकारी फैसलों में पारदर्शिता हो और कानून सभी के लिए बराबर काम करे।
रेलवे स्टेशन पर 16 मौतों के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
सर्बिया में छात्रों का आंदोलन नवंबर 2024 में शुरू हुआ था। उस समय नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर कंक्रीट की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी।
इस हादसे के बाद रेलवे स्टेशन के निर्माण और मरम्मत कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। छात्रों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण लोगों की जान गई।
धीरे-धीरे प्रदर्शन दूसरे शहरों तक फैल गए। छात्रों के साथ शिक्षक, कर्मचारी और आम लोग भी जुड़ने लगे। कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हुई और सड़कों पर बड़ी रैलियां निकाली गईं।
प्रदर्शनकारी सरकार से जवाब मांग रहे थे, जबकि वुचिच लगातार विदेशी ताकतों पर आंदोलन को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे। छात्रों ने इन आरोपों को खारिज किया।
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राष्ट्रपति पद छोड़कर प्रधानमंत्री बनना चाहते थे वुचिच
अलेक्जेंडर वुचिच ने सितंबर 2026 में सर्बिया के राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। वह 2017 से राष्ट्रपति थे और इससे पहले 2014 से 2017 तक प्रधानमंत्री रह चुके थे।
सर्बिया में कोई व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद तीसरी बार उस पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता। वुचिच का दूसरा कार्यकाल 2027 में पूरा होना था, लेकिन उन्होंने समय से पहले पद छोड़ दिया।
इसके बाद उन्होंने संसदीय चुनाव के जरिए प्रधानमंत्री बनने की तैयारी की। उनकी पार्टी ने उन्हें सरकार का नेतृत्व करने के लिए आगे किया था। हालांकि, चुनाव में हार के बाद उनकी यह योजना पूरी नहीं हो सकी।
छात्र गठबंधन के सामने अब सरकार बनाने की जिम्मेदारी
स्टूडेंट लिस्ट में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, शिक्षक, वकील और दूसरे पेशों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। चुनावी सूची का नेतृत्व हृदय रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर इलिजा सर्दानोविच ने किया।
गठबंधन ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच, सरकारी संस्थाओं में सुधार और स्वतंत्र न्याय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा।
अब चुनाव के अंतिम नतीजे आने के बाद संसद में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। गठबंधन ने अभी प्रधानमंत्री पद के लिए किसी एक व्यक्ति के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
रूस और यूरोप से रिश्तों पर भी रहेगी नजर
सर्बिया के रूस से पुराने राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। वुचिच के कार्यकाल में भी रूस और चीन के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखे गए, जबकि यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश जारी रही।
नई सरकार के सामने इन संबंधों को संभालने की चुनौती होगी। कोसोवो का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। कोसोवो ने 2008 में स्वतंत्रता घोषित की थी, लेकिन सर्बिया आज भी उसे अपना हिस्सा मानता है।
यूरोपीय संघ के नेताओं ने छात्र गठबंधन की जीत का स्वागत किया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं में सुधार के लिए सहयोग की बात कही है।
सर्बिया में दो साल तक चले आंदोलन के बाद अब सत्ता बदलने की तैयारी है। हालांकि, नई सरकार की नीतियां और प्रधानमंत्री का नाम तय होना बाकी है। चुनाव के अंतिम नतीजों और सरकार गठन की जानकारी के लिए सर्बिया के चुनाव आयोग के आधिकारिक अपडेट देखें।










