10 महीने बाद स्वदेश लौटीं नोबेल विजेता मारिया मचाडो, राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग तेज

वेनेजुएला की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया मचाडो 10 महीने बाद देश लौटी। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग तेज की। जाने ट्रम्प और अंतरिम सरकार का रुख।

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो करीब 10 महीने बाद देश लौट आई हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मचाडो की वापसी से राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। वह अगले साल राष्ट्रपति चुनाव कराने और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रही हैं।

कराकस:  वेनेजुएला की राजनीति में रविवार को उस समय नई हलचल शुरू हो गई, जब विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो करीब 10 महीने बाद अपने देश लौट आईं। पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली मचाडो दिसंबर 2025 से विदेश में थीं। उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब देश में राष्ट्रपति चुनाव की तारीख तय नहीं है और अंतरिम सरकार को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

मचाडो ने स्वदेश पहुंचने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी। इसके बाद उनकी पार्टी ने कुछ तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वह लारा राज्य के एक चर्च में लोगों से मिलती दिखाई दीं। उन्हें देखकर समर्थक भावुक हो गए। कई लोगों ने गले लगाकर उनका स्वागत किया। चर्च से निकलने के बाद वह राजधानी कराकस की ओर रवाना हुईं। रास्ते में भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंचे। 

कई कोशिशों के बाद वेनेजुएला लौट सकीं मचाडो

मारिया मचाडो के लिए देश लौटना आसान नहीं रहा। वह पहले भी कई बार वापसी की कोशिश कर चुकी थीं, लेकिन अलग-अलग कारणों से उनकी योजना पूरी नहीं हो पाई। जून में अमेरिकी अधिकारियों ने भी उनसे अपनी वापसी टालने के लिए कहा था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मचाडो की वापसी के लिए अमेरिका, पनामा और कोलंबिया के बीच तालमेल बनाया गया। यात्रा से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन को उनकी योजना की जानकारी दी गई थी। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें उनकी वापसी के बारे में कुछ नहीं मालूम। 

अगले साल चुनाव चाहती हैं मचाडो

वेनेजुएला लौटने के बाद मचाडो का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति चुनाव की मांग को आगे बढ़ाना है। उनकी पार्टी चाहती है कि 2027 में नए चुनाव कराए जाएं और सभी राजनीतिक दलों को स्वतंत्र रूप से हिस्सा लेने दिया जाए।

मचाडो खुद भी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ना चाहती हैं। वर्ष 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया था। इसके बाद विपक्ष की ओर से एडमंडो गोंजालेज उम्मीदवार बने थे।

फिलहाल वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज हैं। उनकी सरकार ने भविष्य में चुनाव कराने की बात कही है, लेकिन मतदान की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। 

मादुरो के हटने के बाद बदली देश की सत्ता

वेनेजुएला में इस साल जनवरी में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ था। अमेरिकी सेना ने तीन जनवरी को सैन्य कार्रवाई के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया और अमेरिका ले गई। इसके बाद पूर्व उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली।

10 महीने बाद स्वदेश लौटीं नोबेल विजेता मारिया मचाडो, राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रोड्रिगेज के साथ काम करने का समर्थन किया। उनकी सरकार ने तेल उत्पादन और दूसरे कारोबारी क्षेत्रों में समझौते किए हैं।

मचाडो के लिए यह स्थिति कुछ अलग रही। अमेरिका के कई नेताओं से उनके पुराने संबंध हैं, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने उन्हें अंतरिम सरकार का नेतृत्व नहीं सौंपा। चुनाव और राजनीतिक बदलाव की रफ्तार को लेकर भी दोनों के रुख में अंतर दिखाई दिया। 

मचाडो की वापसी पर ट्रम्प ने क्या कहा?

मचाडो की वापसी को लेकर पत्रकारों ने ट्रम्प से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने मचाडो की तारीफ की और उनके सुरक्षित रहने की उम्मीद जताई। साथ ही कहा कि अमेरिका वेनेजुएला में अपने काम से संतुष्ट है।

मचाडो ने जनवरी में व्हाइट हाउस की मुलाकात के दौरान ट्रम्प को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक सौंपा था। हालांकि पुरस्कार विजेता का आधिकारिक दर्जा मचाडो के पास ही है। इस मुलाकात के बावजूद देश में राजनीतिक बदलाव को लेकर दोनों के बीच मतभेद बने रहे। 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने बातचीत जारी रखने की अपील की

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मचाडो की वापसी को सरकार और विपक्ष के बीच चल रही बातचीत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक पक्षों को बातचीत में सहयोग करना चाहिए, ताकि स्वतंत्र चुनाव और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्था का रास्ता खुल सके।

हालांकि इन वार्ताओं में मचाडो का राजनीतिक संगठन शामिल नहीं है। फिलहाल अंतरिम सरकार और विपक्ष का एक अन्य गुट चुनावी संस्थाओं में सुधार पर चर्चा कर रहा है। 

अब वेनेजुएला की राजनीति में आगे क्या होगा?

मचाडो की वापसी ने विपक्षी समर्थकों को एक बार फिर संगठित होने का अवसर दिया है। लेकिन उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगेगी, इसकी गारंटी अभी नहीं है। दूसरी ओर, सरकार ने चुनाव कराने की समयसीमा भी स्पष्ट नहीं की है।

ऐसे में अगले कुछ महीने महत्वपूर्ण होंगे। मचाडो राजनीतिक बंदियों के परिवारों और विपक्षी नेताओं से मुलाकात करना चाहती हैं। उनकी कोशिश चुनाव की मांग को देशव्यापी मुद्दा बनाने की है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और अमेरिका की भूमिका कैसी रहती है।

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