हड़ताल में काम करने पर जेई और एलडीसी यूनियन से निष्कासित, अब अधिकारियों की सूची तैयार

हरियाणा में बिजली हड़ताल के दौरान काम करने पर पंचकूला के जेई और जींद की एलडीसी को यूनियन से निकाला गया। अब अधिकारियों की सूची बन रही है।

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल खत्म होने के बाद यूनियनों ने संगठन के फैसले का साथ नहीं देने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पंचकूला के जेई और जींद की एलडीसी को यूनियन से निकाला गया है। अब कुछ अधिकारियों की सूची तैयार हो रही है।

पंचकूला: हरियाणा में बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस के खिलाफ हुई हड़ताल खत्म हो चुकी है, लेकिन कर्मचारी संगठनों के भीतर विवाद शुरू हो गया है। हड़ताल के दौरान ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों पर यूनियनों ने कार्रवाई शुरू की है। पंचकूला के एक जूनियर इंजीनियर और जींद की एक लोअर डिविजन क्लर्क को संबंधित कर्मचारी संगठनों से निष्कासित किया गया है। बिजली इंजीनियर एसोसिएशन भी उन अधिकारियों की पहचान कर रही है, जो हड़ताल में शामिल नहीं हुए थे।

पंचकूला के जेई और जींद की एलडीसी पर कार्रवाई

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बाद ऑल हरियाणा पावर कॉर्पोरेशन वर्कर यूनियन ने पंचकूला में कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की है। यूनियन ने उन्हें अपनी सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।

हड़ताल में काम करने पर जेई और एलडीसी यूनियन से निष्कासित, अब अधिकारियों की सूची तैयार

इसी तरह एचएसईबी वर्कर यूनियन ने जींद में कार्यरत एक लोअर डिविजन क्लर्क को संगठन से बाहर कर दिया है। दोनों पर हड़ताल के दौरान काम जारी रखने और यूनियन के सामूहिक फैसले का साथ नहीं देने का आरोप है।

यह कार्रवाई संबंधित यूनियनों की ओर से की गई है। इसे सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी नहीं समझना चाहिए। दोनों कर्मचारियों के विभागीय पदों से हटाए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हड़ताल के दौरान कुछ लोगों ने काम जारी रखा, जिससे आंदोलन की एकजुटता प्रभावित हुई। अब यूनियनें ऐसे सदस्यों के खिलाफ अपने स्तर पर फैसले ले रही हैं।

हड़ताल में ड्यूटी करने वाले अधिकारियों की सूची बन रही

बिजली कर्मचारियों के बाद अब हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने भी संगठन के फैसले के खिलाफ जाने वाले अधिकारियों की पहचान शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एसोसिएशन उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने हड़ताल में शामिल होने के बजाय अपनी ड्यूटी जारी रखी थी। सूची तैयार होने के बाद उनके खिलाफ सदस्यता से जुड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, कितने अधिकारियों के नाम इस सूची में शामिल हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। एसोसिएशन ने अभी संबंधित अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए हैं।

इस कार्रवाई से साफ है कि हड़ताल खत्म होने के बावजूद कर्मचारी संगठनों के अंदर मतभेद बने हुए हैं।

यूनियन नेता बोले, आंदोलन कमजोर करने वालों पर कार्रवाई जरूरी

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के उपप्रधान बलजीत बैनीवाल ने संगठन की कार्रवाई का समर्थन किया है।

उनका कहना है कि जब बिजली विभाग के कर्मचारी निजीकरण के विरोध में एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे, तब कुछ लोग हड़ताल को कमजोर करने में लगे थे।

बैनीवाल के अनुसार, आंदोलन कर्मचारियों के साथ आम जनता और किसानों के हितों से भी जुड़ा था। इसी वजह से संगठन के फैसले का विरोध करने वालों पर कार्रवाई जरूरी मानी जा रही है।

हालांकि, हड़ताल में काम करने वाले संबंधित कर्मचारियों का पक्ष उपलब्ध रिपोर्ट में सामने नहीं आया है।

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने से शुरू हुआ विवाद

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों के आंदोलन की शुरुआत गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस दिए जाने के फैसले से हुई थी।

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को इन क्षेत्रों में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस देने का निर्णय लिया था।

कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए आशंका जताई थी कि इस फैसले से बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी और सरकारी बिजली निगमों पर असर पड़ेगा।

इसके विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने 22 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दौरान विभिन्न जिलों में बिजली सेवाएं प्रभावित हुईं और कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किए।

मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद खत्म हुई थी हड़ताल

दो दिनों तक चले आंदोलन के बाद 23 अक्टूबर को पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई।

बैठक में बिजली मंत्री अनिल विज भी शामिल रहे। सरकार की ओर से समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के फैसले की समीक्षा कराने और इसे रद्द कराने के लिए जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।

इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण के पक्ष में नहीं है।

हालांकि, निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस तत्काल रद्द नहीं हुआ था। इस पर आगे की कार्रवाई संबंधित नियामक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी है। 

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