अयोध्या के राम मंदिर में रविवार को शरद पूर्णिमा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। रामलला का विशेष श्रृंगार हुआ और आधी रात को खीर का भोग लगाया गया। गर्भगृह के बाहर धार्मिक अनुष्ठान भी हुए।
अयोध्या: शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार, 25 अक्टूबर को रामजन्मभूमि मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। दिन में रामलला का पूजन और आकर्षक श्रृंगार किया गया, जबकि रात में उन्हें खीर का भोग अर्पित किया गया। संध्या आरती के बाद रामलला के चल विग्रह को गर्भगृह से बाहर लाकर विधि-विधान से पूजा की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में पारंपरिक पदगायन भी हुआ। आयोजन को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
शरद पूर्णिमा पर राम मंदिर में हुई विशेष पूजा
अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई थीं। रामलला का विशेष श्रृंगार किया गया और निर्धारित पूजा पद्धति के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस आयोजन की तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। मंदिर में पूजा के साथ भजन और पारंपरिक पदगायन की व्यवस्था की गई थी। शरद पूर्णिमा की रात भगवान को खीर अर्पित करने की परंपरा भी निभाई गई।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। विशेष पूजा के दौरान मंदिर की नियमित व्यवस्थाओं के साथ सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया।
गर्भगृह से बाहर लाया गया रामलला का चल विग्रह
राम मंदिर के धार्मिक व्यवस्था प्रमुख इंद्रदेव मिश्र के अनुसार, शरद पूर्णिमा के आयोजन के लिए संध्या आरती के बाद रामलला के चल विग्रह को गर्भगृह से बाहर लाया गया।
चल विग्रह को मंदिर के उत्तरी हिस्से में बने चबूतरे पर स्थापित किया गया। यहां अर्चकों ने विशेष पूजा कराई और धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए। मंदिर की परंपरा के अनुसार भगवान को खुले आकाश के नीचे विराजमान कराकर भोग अर्पित किया गया।
इस दौरान अर्चक प्रमुख आचार्य केशव शर्मा सहित मंदिर के अन्य पुजारी मौजूद रहे। धार्मिक कार्यक्रम में ट्रस्ट के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
आधी रात को रामलला को क्यों लगाया गया खीर का भोग?
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में अमृत के समान गुण होते हैं।
इसी विश्वास के कारण कई घरों और मंदिरों में दूध और चावल से खीर बनाई जाती है। इसे कुछ समय के लिए खुले आकाश के नीचे चांदनी में रखा जाता है। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
अयोध्या के राम मंदिर में भी इसी परंपरा का पालन किया गया। आधी रात को रामलला को खीर का विशेष भोग अर्पित किया गया। मंदिर में खीर के साथ अन्य पकवानों का भोग भी लगाया गया।
धार्मिक आयोजन में ट्रस्ट के पदाधिकारी भी रहे मौजूद
शरद पूर्णिमा के कार्यक्रम में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए। इनमें ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास, डॉ. निर्मला यादव और मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र शामिल रहे।
अर्चक प्रमुख आचार्य केशव शर्मा के साथ अन्य पुजारियों ने पूजा की जिम्मेदारी संभाली। आयोजन के दौरान ट्रस्ट के कर्मचारियों और सुरक्षा अधिकारियों की भी मौजूदगी रही।
विशेष धार्मिक कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। मंदिर प्रशासन ने आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को पहले ही आवश्यक निर्देश दिए थे।
आज रामजन्मभूमि परिसर में मनाई जाएगी वाल्मीकि जयंती
शरद पूर्णिमा के आयोजन के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को रामजन्मभूमि परिसर में महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाने की तैयारी है।
इसके लिए परिसर में बने महर्षि वाल्मीकि मंदिर की विशेष सजावट कराई गई है। कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के संतों, प्रमुख प्रतिनिधियों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है।
वाल्मीकि जयंती से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी ट्रस्टी डॉ. निर्मला यादव को सौंपी गई है। उनकी देखरेख में पूजा-अर्चना और अन्य आयोजन संपन्न कराए जाएंगे।
महर्षि वाल्मीकि को रामायण का रचयिता माना जाता है। भगवान राम के जीवन पर आधारित इस महाकाव्य के कारण उनका अयोध्या से विशेष धार्मिक संबंध है। ऐसे में रामजन्मभूमि परिसर में उनकी जयंती का आयोजन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









