ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बड़ा बयान, कहा- हमारी पहुंच से दूर कोई लक्ष्य नहीं

ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने कहा कि IAF ने 1200 किमी लंबे मोर्चे पर 200 किमी भीतर तक सटीक हमले किए। स्वदेशी हथियारों की ताकत भी बताई।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने 1,200 किलोमीटर लंबे मोर्चे पर 200 किलोमीटर भीतर तक सटीक हमले किए। उन्होंने स्वदेशी हथियारों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए सैन्य क्षमताएं और मजबूत करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। रविवार, 25 अक्टूबर को पीटीआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मई 2025 में हुए इस सैन्य अभियान ने भारतीय वायुसेना की ताकत और मारक क्षमता को साबित किया। पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में 200 किलोमीटर की गहराई तक किए गए सटीक हमलों से साफ हो गया कि कोई भी लक्ष्य भारतीय वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं है। 

ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना ने दिखाई अपनी ताकत

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी मोर्चे पर अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाया। अभियान में हमलों की दूरी और सटीकता पर विशेष ध्यान दिया गया था।

ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बड़ा बयान, कहा- हमारी पहुंच से दूर कोई लक्ष्य नहीं

उनके मुताबिक, इस कार्रवाई से पता चला कि भारतीय वायुसेना जरूरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके में काफी भीतर तक हमला करने की क्षमता रखती है। उन्होंने इसे वायुसेना की उस रणनीति की सफलता बताया, जिसमें किसी एक विमान या हथियार के बजाय पूरी सैन्य क्षमता को साथ लेकर काम किया जाता है।

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि अभियान से मिले अनुभव भविष्य की तैयारियों में भी काम आएंगे। उनका मानना है कि बदलते हालात में सेना के पास जवाब देने के कई विकल्प होने चाहिए।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था सैन्य अभियान

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ था। इसके जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया।

चार दिन तक चले सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने कई तरह की हथियार प्रणालियों और तकनीकों का इस्तेमाल किया। उस समय एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अभियान की कमान संभाल रहे थे।

वायुसेना प्रमुख के अनुसार, कार्रवाई के दौरान केवल हमला करना ही उद्देश्य नहीं था। परिस्थितियों को नियंत्रण में रखना और संघर्ष को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोकना भी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा था। 

स्वदेशी हथियारों के प्रदर्शन से संतुष्ट वायुसेना प्रमुख

इंटरव्यू में एपी सिंह ने भारत में विकसित हथियार प्रणालियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कुछ स्वदेशी हथियारों ने उम्मीद के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन किया।

उनके अनुसार, इन हथियारों की मदद से दुश्मन के इलाके में भीतर तक मौजूद लक्ष्यों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय वायुसेना ने अभियान के दौरान अन्य नागरिकों और संपत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन किया।

एयर चीफ मार्शल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से भेजे गए बड़ी संख्या में ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों का मुकाबला करने में भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली प्रभावी रही। 

एक हथियार नहीं, कई तकनीकों ने मिलकर किया काम

वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के पीछे कई कारण बताए। उनके मुताबिक, खुफिया जानकारी, लड़ाकू विमान, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल रहा।

अभियान में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी तकनीक, कई स्तरों वाली वायु रक्षा प्रणाली और ड्रोन का मुकाबला करने वाले उपकरण भी इस्तेमाल किए गए।

एपी सिंह ने बताया कि अब वायुसेना किसी एक लड़ाकू विमान या हथियार की क्षमता के आधार पर योजना नहीं बनाती। इसके बजाय विमान, सेंसर, हथियार और संचार नेटवर्क को आपस में जोड़कर कार्रवाई करने पर ध्यान दिया जाता है।

इस व्यवस्था से बदलती परिस्थितियों में तेजी से फैसले लेने और जरूरत के अनुसार रणनीति बदलने में मदद मिलती है।

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी बढ़ाने पर जोर

ऑपरेशन सिंदूर के नतीजों पर संतोष जताने के साथ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भविष्य की चुनौतियों को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि किसी अभियान में सफलता मिलने का मतलब यह नहीं है कि वायुसेना अपनी मौजूदा क्षमताओं से संतुष्ट होकर बैठ जाए।

उन्होंने सैन्य तैयारियों को लगातार बेहतर बनाने की जरूरत बताई। खासकर नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालित हथियार प्रणालियों, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

वायुसेना प्रमुख के अनुसार, भविष्य में युद्ध की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। इसलिए सेना को ऐसे संसाधनों की जरूरत होगी, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग परिस्थितियों में किया जा सके।

उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना की दीर्घकालिक योजनाओं में 2047 तक आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ाना शामिल है। 

एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के आधार पर वायुसेना अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाएगी। उनका जोर ऐसी सैन्य क्षमता विकसित करने पर है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर तेजी से और सटीक कार्रवाई की जा सके।भारतीय वायुसेना की तैयारियों, ऑपरेशन सिंदूर और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय तथा भारतीय वायुसेना की घोषणाओं पर नजर रखें।

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