रांची में साइबर ठगी के तीन मामले, वरिष्ठ नागरिक कार्ड और जीवित प्रमाणपत्र के बहाने 11 लाख से ज्यादा उड़ाए

रांची में वरिष्ठ नागरिक कार्ड और जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर साइबर ठगी के मामले सामने आए। तीन लोगों के खातों से 11.04 लाख रुपये निकले।

रांची में साइबर ठगी के तीन मामले सामने आए हैं। वरिष्ठ नागरिक कार्ड और जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर लोगों के बैंक खातों से रकम निकाली गई। एक महिला ने भी अनधिकृत UPI ट्रांजैक्शन की शिकायत की है। तीनों मामलों में कुल 11.04 लाख रुपये का नुकसान बताया गया है।

रांची: साइबर ठग अब लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने के नाम पर निशाना बना रहे हैं। शहर में सामने आए तीन मामलों में लोगों के बैंक खातों से 11,04,125 रुपये निकलने की शिकायत हुई है। कहीं वरिष्ठ नागरिक कार्ड बनवाने के बहाने OTP लिया गया, तो कहीं जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर निजी जानकारी जुटाई गई। तीसरे मामले में एक महिला ने अपने खाते से बिना अनुमति UPI के जरिए रुपये ट्रांसफर होने की शिकायत दर्ज कराई है।

फेसबुक पर वरिष्ठ नागरिक कार्ड का विज्ञापन देखा, खाते से निकले 4.11 लाख

लालपुर थाना क्षेत्र के वर्दमान कंपाउंड स्थित कोयल एन्क्लेव में रहने वाले एंड्रियास सोरंग साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। वह फेसबुक चला रहे थे, तभी उनकी नजर वरिष्ठ नागरिक कार्ड से जुड़े एक पेज पर पड़ी। इसमें कार्ड बनवाने और उससे मिलने वाले लाभ की जानकारी दी गई थी। पेज पर एक मोबाइल नंबर भी दिया था, जिस पर उन्होंने संपर्क किया।

रांची में साइबर ठगी के तीन मामले, वरिष्ठ नागरिक कार्ड और जीवित प्रमाणपत्र के बहाने 11 लाख से ज्यादा उड़ाए

कुछ देर बाद उनके पास WhatsApp पर ऑडियो कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया। उसने कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए घर का पता और बैंक खाते की जानकारी मांगी। बैंक अधिकारी समझकर एंड्रियास ने उसे जानकारी दे दी।

रात करीब 9:01 बजे उनके मोबाइल पर OTP आया। कॉल करने वाले के कहने पर उन्होंने वह भी बता दिया। इसके तुरंत बाद खाते से रुपये निकलने शुरू हो गए। रात 9:02 बजे दो लाख रुपये, 9:10 बजे एक लाख, 9:13 बजे एक लाख और 9:22 बजे 11,500 रुपये निकाले गए। इस तरह चार ट्रांजैक्शन में कुल 4,11,500 रुपये चले गए।

उस समय उनका मोबाइल साइलेंट था, इसलिए बैंक से आए मैसेज पर ध्यान नहीं गया। बाद में जब वह ATM से पैसे निकालने पहुंचे, तो रुपये नहीं निकल सके। बैंक जाकर पासबुक अपडेट कराई, तब उन्हें खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने का पता चला।

जीवित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आया फोन, 3.91 लाख रुपये कटे

दूसरा मामला सिलवई बस्ती का है। इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास रहने वाले अनूप लाल प्रसाद मंडल ने साइबर अपराध थाने में शिकायत दी है। उनके मुताबिक, जीवित प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर दो अलग-अलग नंबरों से फोन आया था।

कॉल करने वालों ने प्रमाणपत्र तैयार कराने की बात कहकर उनसे निजी जानकारी हासिल की। इसके बाद उनके बैंक खाते से रकम कटने लगी। अनूप लाल प्रसाद मंडल ने कुल 3,91,625 रुपये निकलने की शिकायत की है।

रकम कटने का पता चलने पर उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। साथ ही साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी मामले की जानकारी दी। जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर हुए इस मामले में फोन करने वालों ने खुद को किस विभाग से जुड़ा बताया था, इसकी जानकारी शिकायत के उपलब्ध विवरण में नहीं है।

कांके रोड की महिला के खाते से 3.01 लाख के UPI ट्रांजैक्शन

तीसरा मामला कांके रोड के शास्त्री नगर का है। यहां रहने वाली रेखा मुखर्जी ने अपने पंजाब नेशनल बैंक खाते से 3,01,000 रुपये के अनधिकृत UPI लेनदेन की शिकायत की है।

रेखा मुखर्जी का कहना है कि उन्होंने खुद कोई भुगतान नहीं किया था। किसी को पैसे भेजने के लिए UPI PIN भी दर्ज नहीं किया। इसके बावजूद उनके खाते से रुपये ट्रांसफर हो गए।

मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि उनके खाते से बिना अनुमति भुगतान कैसे हुआ।

सरकारी सुविधा के नाम पर आने वाले फोन से रहें सावधान

इन मामलों में ठगी के तरीके अलग-अलग रहे, लेकिन बैंक खाते से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल प्रमुख चिंता बनकर सामने आया है। खासकर वरिष्ठ नागरिक कार्ड और जीवित प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं के नाम पर आने वाले फोन को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर OTP, बैंक पासवर्ड या UPI PIN साझा नहीं करना चाहिए। बैंक अधिकारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी ऐसी जानकारी मांगे, तो पहले बैंक के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करके पुष्टि करें।

फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी योजनाओं से जुड़े कई पेज दिखाई देते हैं। उन पर दिए गए नंबर को बिना जांचे सही मान लेना नुकसानदायक हो सकता है। पेंशन और जीवित प्रमाणपत्र से संबंधित काम के लिए बैंक या संबंधित विभाग की अधिकृत सेवा का इस्तेमाल करना बेहतर है।

इसी तरह किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या फोन पर बताए गए ऐप को डाउनलोड करने से बचें। स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस ऐप के जरिए भी बैंकिंग जानकारी खतरे में पड़ सकती है।

खाते से पैसे निकल जाएं तो तुरंत उठाएं ये कदम

अगर आपके बैंक खाते से बिना जानकारी के पैसे कट गए हैं, तो देर न करें। सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर फोन करके इसकी शिकायत करें। बैंक से कहें कि खाते से आगे कोई गलत लेनदेन न हो, इसके लिए जरूरी सुरक्षा कदम उठाए जाएं। यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसे निकले हैं, तो इसकी जानकारी भी बैंक को दें।

साइबर ठगी के शिकार लोग 1930 नंबर पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत के लिए सरकार की वेबसाइट cybercrime.gov.in भी है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी की रकम रोकने या वापस पाने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।

बैंक से आए मैसेज, पैसे कटने की तारीख, ट्रांजैक्शन आईडी और जिस नंबर से संदिग्ध कॉल आया था, उसे संभालकर रखें। व्हाट्सएप पर कोई लिंक या मैसेज मिला हो, तो उसका स्क्रीनशॉट भी सुरक्षित रखें। पुलिस और बैंक की जांच में ये जानकारियां काम आ सकती हैं।

रांची में सामने आए तीनों मामलों में ठगी के तरीके अलग-अलग थे। कहीं वरिष्ठ नागरिक कार्ड बनवाने का झांसा दिया गया, तो कहीं जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर जानकारी मांगी गई। इसलिए बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी बताकर कोई फोन करे, तो उसकी पहचान पक्की किए बिना ओटीपी, यूपीआई पिन या खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी न दें।

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