उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज से विंध्याचल और चित्रकूट तक मेट्रो नेटवर्क बढ़ाने की सिफारिश की है। कुंभ में श्रद्धालुओं की भीड़ और भविष्य की यातायात जरूरतों को देखते हुए मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा गया है।
प्रयागराज: कुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाने के लिए प्रयागराज की परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। उत्तर मध्य रेलवे ने मेट्रो का विस्तार विंध्याचल और चित्रकूट तक करने का सुझाव दिया है। रेलवे की ओर से मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में केवल सड़कों और मौजूदा परिवहन साधनों के भरोसे बढ़ती आबादी तथा कुंभ की भीड़ को संभालना मुश्किल होगा।
कुंभ के दौरान जाम से निपटने के लिए बनेगा ट्रैफिक प्लान
प्रयागराज में कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रमुख स्नान पर्वों पर रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और शहर की सड़कों पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ जाता है। कई बार एक ही रास्ते पर अधिक वाहन पहुंचने से लंबा जाम लग जाता है।
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उत्तर मध्य रेलवे ने अपनी रिपोर्ट में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैफिक प्लान तैयार करने की सिफारिश की है। इसमें केंद्र सरकार की एजेंसियों के साथ विभिन्न राज्यों के परिवहन विभागों के बीच तालमेल बनाने की बात कही गई है।
रेलवे का सुझाव है कि यात्रियों के आने और लौटने के रास्ते पहले से तय किए जाएं। सड़क, रेल और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों को जोड़ने से भीड़ को अलग-अलग दिशाओं में भेजने में आसानी होगी।
वर्ष 2047 तक प्रयागराज का दायरा बढ़ने का अनुमान
रिपोर्ट में केवल कुंभ मेले की जरूरतों को नहीं देखा गया है। आने वाले वर्षों में प्रयागराज की बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है।
रेलवे के आकलन के मुताबिक, अगले दो दशकों में प्रयागराज की जनसंख्या करीब डेढ़ गुना हो सकती है। वर्ष 2047 तक मुख्य शहर से 25 से 30 किलोमीटर दूर तक के कई इलाके शहरी क्षेत्र में बदल सकते हैं।
आबादी बढ़ने के साथ रोजाना कामकाज, पढ़ाई और कारोबार के लिए आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए अधिक यात्रियों को एक साथ ले जाने वाली परिवहन व्यवस्था की जरूरत होगी।
विंध्याचल और चित्रकूट तक मेट्रो पहुंचाने की सिफारिश
रेलवे की रिपोर्ट में मेट्रो नेटवर्क को प्रयागराज नगर निगम की मौजूदा सीमा तक सीमित नहीं रखने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा करने से शहर के कुछ इलाकों में यातायात का दबाव कम हो सकता है, लेकिन दूसरी जगह जाम की समस्या बनी रह सकती है।
इसी वजह से मेट्रो कॉरिडोर को मीरजापुर के विंध्याचल और चित्रकूट तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। दोनों स्थान धार्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं और प्रयागराज आने वाले श्रद्धालु यहां भी दर्शन के लिए जाते हैं।
मेट्रो विस्तार का उद्देश्य यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का अतिरिक्त विकल्प देना है। कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में इससे श्रद्धालुओं को शहर से बाहर भेजने की व्यवस्था भी बेहतर हो सकती है।
फिलहाल यह रेलवे की सिफारिश है। प्रस्तावित विस्तार के लिए अंतिम रूट, स्टेशनों की संख्या, निर्माण लागत और काम शुरू होने की तारीख तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
फाफामऊ, झूंसी, नैनी और बमरौली भी जुड़ेंगे
प्रयागराज के आसपास विकसित हो रहे उपनगरीय इलाकों को भी नई परिवहन व्यवस्था से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इनमें फाफामऊ, झूंसी, नैनी और बमरौली प्रमुख हैं।
रिपोर्ट में इन क्षेत्रों को मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट के माध्यम से मुख्य शहर से जोड़ने की बात कही गई है। इसके लिए रिंग कनेक्टिविटी विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे यात्रियों को शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने का बेहतर विकल्प मिल सके।
इस योजना के तहत अलग-अलग परिवहन सेवाओं के बीच संपर्क बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि यात्रियों को बार-बार वाहन बदलने या लंबी दूरी तक सड़क मार्ग पर निर्भर रहने की परेशानी कम हो।
कानपुर, लखनऊ और वाराणसी के रास्तों पर भी नजर
रेलवे ने प्रयागराज को कानपुर, लखनऊ और वाराणसी से जोड़ने वाले मार्गों पर भी यातायात व्यवस्था सुधारने की जरूरत बताई है। इन दिशाओं से कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है।
प्रस्ताव के अनुसार, ओरिजिन-डेस्टिनेशन (OD) सर्वे कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि यात्री किन स्थानों से प्रयागराज आते हैं और उनकी अगली मंजिल कहां होती है।
सर्वे के आधार पर सड़क और रेल के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही यात्रियों की तेज और सुरक्षित निकासी के लिए एकीकृत रैपिड इवैक्यूएशन नेटवर्क बनाने की बात कही गई है।
महाकुंभ के बाद तैयार हुआ प्रस्ताव
उत्तर मध्य रेलवे के मंडल जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह के मुताबिक, महाकुंभ के बाद ही भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया था। इसका उद्देश्य आने वाले कुंभ आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
हालांकि, मेट्रो विस्तार और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को जमीन पर उतारने के लिए संबंधित विभागों की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल रेलवे ने अपनी सिफारिश मंत्रालय को भेज दी है।









