जगन मोहन रेड्डी को चंद्रबाबू नायडू ने कहा 'कंस मामा', भांजी की शादी को लेकर छिड़ा विवाद

चंद्रबाबू नायडू ने भांजी की शादी को लेकर जगन मोहन रेड्डी की तुलना कंस से की। जगन ने येलहंका पैलेस देने से इनकार क्यों किया? जानें आरोप और YSRCP का जवाब।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जगन मोहन रेड्डी को 'कंस मामा' कहा। विवाद भांजी की शादी के लिए बेंगलुरु स्थित आवास इस्तेमाल करने से जुड़ा है। जगन ने सुरक्षा कारण बताए हैं, जबकि YSRCP ने पलटवार किया।

अमरावती: आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक पारिवारिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पूर्व मुख्यमंत्री और YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जगन की तुलना पौराणिक पात्र कंस से करते हुए आरोप लगाया कि वह अपनी ही भांजी की शादी में रुकावट डाल रहे हैं। मामला बेंगलुरु के येलहंका स्थित एक पारिवारिक आवास में शादी कराने को लेकर है। जगन की बहन वाईएस शर्मिला वहां अपनी बेटी की शादी करना चाहती हैं, लेकिन जगन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

चंद्रबाबू नायडू ने जगन को क्यों कहा 'कंस मामा'?

शनिवार, 24 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जगन मोहन रेड्डी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी बहन और मां के साथ सही व्यवहार नहीं कर सकता, उससे राजनीतिक और पारिवारिक मूल्यों की उम्मीद कैसे की जा सकती है। नायडू का आरोप है कि जगन ने संपत्ति विवाद के कारण अपनी बहन की बेटी की शादी में भी परेशानी खड़ी कर दी है।

मुख्यमंत्री ने इस मामले में जगन की तुलना भगवान कृष्ण के मामा कंस से की। उन्होंने कहा कि जगन के व्यवहार से उनकी सोच का पता चलता है। नायडू ने आरोप लगाया कि जगन अपने निजी हितों को परिवार के रिश्तों से ऊपर रखते हैं। उनके इस बयान के बाद राज्य में तेलुगु देशम पार्टी और YSR कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

25 नवंबर को होनी है शर्मिला की बेटी की शादी

जगन मोहन रेड्डी की छोटी बहन वाईएस शर्मिला आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष हैं। उनकी बेटी वाईएस अंजलि रेड्डी की शादी 25 नवंबर 2026 को डॉ. सोमला रघुराम रेड्डी से तय हुई है। दोनों की सगाई 24 सितंबर को हुई थी। परिवार की योजना बेंगलुरु के येलहंका पैलेस में शादी समारोह आयोजित करने की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शर्मिला ने इस कार्यक्रम के लिए कई राजनीतिक नेताओं, रिश्तेदारों और दूसरे मेहमानों को निमंत्रण भी भेज दिए थे। शादी के बाद 5 दिसंबर को हैदराबाद में रिसेप्शन रखा गया है। हालांकि येलहंका स्थित आवास के इस्तेमाल पर जगन की आपत्ति सामने आने के बाद शादी की जगह को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

येलहंका पैलेस देने से जगन ने क्यों किया इनकार?

विवाद बढ़ने के बाद जगन मोहन रेड्डी ने अपनी बहन शर्मिला को लिखा एक पत्र सार्वजनिक किया है। यह पत्र 9 अक्टूबर का है। इसमें उन्होंने साफ किया है कि शादी को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वह बेंगलुरु स्थित अपने आवास पर इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के पक्ष में नहीं हैं।

जगन ने पत्र में कहा कि शादी समारोह में बड़ी संख्या में मेहमानों के अलावा कैटरिंग, सजावट, फोटोग्राफी और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कर्मचारी भी आएंगे। इनमें कई ऐसे लोग होंगे जिन्हें परिवार व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता। ऐसे में घर की सुरक्षा और परिवार की निजता प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम के दौरान घर और उसके आसपास की तस्वीरें तथा वीडियो सार्वजनिक हो सकते हैं। जगन के मुताबिक, इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने आयोजन स्थल बदलने का अनुरोध किया था।

जगन बोले- अपनी बेटियों की शादी होती, तब भी यही फैसला लेते

बहन को लिखे पत्र में जगन मोहन रेड्डी ने अपनी भांजी अंजलि के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं। उन्होंने बताया कि वह अंजलि को बचपन से बड़ा होते देख रहे हैं और चाहते हैं कि उसका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहे। हालांकि इसके साथ उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।

जगन ने कहा कि अगर उनकी अपनी बेटियों हर्षा या वर्षा की शादी का मामला होता, तब भी वह सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं करते। उन्होंने शर्मिला से दूसरे स्थान पर शादी आयोजित करने का अनुरोध किया। साथ ही हैदराबाद स्थित अपना लोटस पॉन्ड आवास इस्तेमाल करने का विकल्प भी दिया। जगन का कहना है कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं, केवल आयोजन स्थल को लेकर उनकी आपत्ति है।

भाई-बहन के बीच लंबे समय से चल रहा संपत्ति विवाद

जगन मोहन रेड्डी और वाईएस शर्मिला के बीच संपत्ति को लेकर मतभेद कई वर्षों से चले आ रहे हैं। दोनों आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की संतान हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की संपत्तियों और कारोबारी हिस्सेदारी को लेकर विवाद सामने आया था।

शर्मिला का आरोप रहा है कि उन्हें पारिवारिक संपत्ति में उचित हिस्सा नहीं दिया गया। दूसरी ओर जगन का पक्ष संपत्तियों के स्वामित्व और उनसे जुड़े कानूनी अधिकारों को लेकर अलग है। विवाद में सरस्वती पावर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों का मामला भी शामिल है। इससे जुड़े कुछ मुद्दे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण यानी NCLT में विचाराधीन हैं।

येलहंका की संपत्ति के स्वामित्व को लेकर भी दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें हैं। शर्मिला पक्ष इसे परिवार की संपत्ति का हिस्सा मानता है, जबकि जगन की ओर से स्वामित्व संबंधी अलग दावा किया गया है।

नायडू ने जगन पर मां और बहन से गलत व्यवहार का आरोप लगाया

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि संपत्ति विवाद के कारण परिवार के सदस्यों के बीच इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जगन अपनी मां वाईएस विजयम्मा और बहन शर्मिला के साथ अन्याय कर रहे हैं।

नायडू के मुताबिक, परिवार की संपत्ति में शर्मिला की भी हिस्सेदारी होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बहन अपनी बेटी की शादी के लिए पारिवारिक आवास इस्तेमाल करना चाहती है, तो उसमें रुकावट क्यों डाली जा रही है।

हालांकि यह नायडू का आरोप है। संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व और हिस्सेदारी को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत तथा संबंधित दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।

YSR कांग्रेस ने नायडू के बयान पर किया पलटवार

नायडू की टिप्पणी के बाद YSR कांग्रेस पार्टी ने भी जवाब दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जानबूझकर जगन मोहन रेड्डी के पारिवारिक मामले को राजनीतिक विवाद बना रहे हैं। YSRCP का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों के साथ हो रही कथित घटनाओं से ध्यान हटाने के लिए व्यक्तिगत आरोप लगाए जा रहे हैं।

पार्टी ने जगन का पत्र सार्वजनिक करते हुए कहा कि शादी के लिए येलहंका आवास उपलब्ध नहीं कराने का फैसला सुरक्षा और निजता से जुड़ा है। उसका कहना है कि जगन ने अपनी आपत्ति पहले ही परिवार को बता दी थी। ऐसे में इसे अचानक शादी रोकने की कोशिश बताना सही नहीं है।

YSRCP ने मुख्यमंत्री से राजनीतिक मुद्दों पर जवाब देने और निजी पारिवारिक मामलों को चुनावी बहस का हिस्सा नहीं बनाने की बात कही है।

स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी दोनों दल आमने-सामने

आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी और विपक्षी YSR कांग्रेस के बीच पहले से तनाव बना हुआ है। दोनों दल एक-दूसरे पर उम्मीदवारों को धमकाने और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप लगा रहे हैं।

चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि राज्य के पुंगनूर, रायचोटी, कनिगिरी, कडपा, तिरुपति और दूसरे इलाकों में YSRCP से जुड़े लोगों ने अशांति फैलाने की कोशिश की। उन्होंने कुछ स्थानों पर नामांकन पत्र छीनने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोप भी लगाए।

नायडू ने यहां तक दावा किया कि लोगों को डराने के लिए पंजाब से बाहरी लोगों को बुलाया गया था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर YSR कांग्रेस ने चुनावी हिंसा और अपने उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के आरोप सत्तारूढ़ गठबंधन पर लगाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुनावी विवाद

स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। YSR कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि उसके उम्मीदवारों को कुछ जगह नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है। इस मामले में 19 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से पार्टी की शिकायतों पर ध्यान देने को कहा था।

इसी राजनीतिक माहौल के बीच जगन और उनकी बहन का पारिवारिक विवाद चर्चा में आ गया। मुख्यमंत्री नायडू ने जहां इस मामले को जगन के व्यवहार से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं विपक्ष इसे निजी मामला बताकर राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध कर रहा है।

अब देखना होगा कि शर्मिला अपनी बेटी की शादी के लिए कौन सा स्थान तय करती हैं। फिलहाल जगन ने येलहंका आवास देने से इनकार किया है, लेकिन हैदराबाद में दूसरे स्थान का विकल्प भी रखा है। दूसरी तरफ नायडू के बयान ने परिवार के पुराने संपत्ति विवाद को फिर राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

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