आंध्र प्रदेश के कडपा जिले में चुनावी नामांकन के दौरान हुई झड़प ने TDP की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रवक्ता कोडुरु बालासुब्रमण्यम पर हवाई फायरिंग का आरोप है। पुलिस ने हथियार जब्त कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।
कडपा: आंध्र प्रदेश के कडपा जिले में स्थानीय निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान हुई हिंसा ने सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को मुश्किल में डाल दिया है। नंदलूर में 22 अक्टूबर को पार्टी के दो गुटों के बीच झड़प हुई थी। इसी दौरान टीडीपी के आधिकारिक प्रवक्ता कोडुरु बालासुब्रमण्यम पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से हवा में गोलियां चलाने का आरोप लगा है। पुलिस ने हथियार जब्त कर लिया है और झड़प से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। अब कडपा पुलिस बालासुब्रमण्यम का गन लाइसेंस रद्द करने के लिए संबंधित अधिकारी को पत्र भेजने की तैयारी कर रही है। जांच में यह सवाल भी सामने आया है कि चुनाव के समय उनका हथियार पुलिस के पास जमा क्यों नहीं था।
नंदलूर में नामांकन के दौरान कैसे शुरू हुई झड़प?
घटना गुरुवार, 22 अक्टूबर की है। नंदलूर में जिला परिषद और मंडल परिषद से जुड़े चुनावों के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान टीडीपी के दो गुट अपने-अपने समर्थकों के साथ नामांकन केंद्र के पास पहुंचे। दोनों पक्ष उम्मीदवार के चयन को लेकर सहमत नहीं थे।
एक पक्ष में टीडीपी प्रवक्ता कोडुरु बालासुब्रमण्यम और उनके समर्थक थे, जबकि दूसरे पक्ष का नेतृत्व स्थानीय नेता विजय सागर कर रहे थे। दोनों गुटों के बीच पहले कहासुनी हुई। कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और समर्थक एक-दूसरे पर पत्थर फेंकने लगे।
मौके पर मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। झड़प के दौरान कई वाहनों को नुकसान पहुंचा। एक कार में आग लगाने की घटना भी सामने आई। स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
टीडीपी प्रवक्ता पर पांच राउंड फायरिंग का आरोप
झड़प के बीच बालासुब्रमण्यम के हाथ में पिस्तौल दिखाई देने की बात सामने आई। स्थानीय समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने हवा में पांच गोलियां चलाईं। इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए हैं।
बालासुब्रमण्यम के समर्थकों का कहना है कि दूसरे गुट की ओर से हमला बढ़ने पर उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए हथियार निकाला था। हालांकि पुलिस इस दावे से सहमत नहीं दिखाई दे रही है।
कडपा के पुलिस अधीक्षक नचिकेत विश्वनाथ शेल्के ने द हिंदू से कहा कि आत्मरक्षा के लिए रखे गए हथियार का कथित तौर पर बिना उकसावे के इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश संबंधित अधिकारी को भेजेगी।
फिलहाल गोली चलाने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस की सिफारिश का अर्थ यह नहीं है कि लाइसेंस पहले ही रद्द हो चुका है।
पुलिस ने पिस्तौल जब्त की, आठ लोग गिरफ्तार
नंदलूर में हिंसा की सूचना मिलते ही राजमपेट उपमंडल की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों को अलग किया और भीड़ को हटाकर स्थिति संभाली। पुलिस ने फायरिंग से जुड़े हथियार को अपने कब्जे में ले लिया।
जांच के दौरान झड़प में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हिंसा किसने शुरू की, वाहनों को नुकसान पहुंचाने में कौन शामिल था और फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई।
घटना के दौरान कुछ लोगों के घायल होने की खबरें भी आई थीं। बालासुब्रमण्यम को पसली में फ्रैक्चर होने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर कुछ अंतर रहा है। इसलिए पुलिस के अंतिम रिकॉर्ड से ही सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होगी।
गन लाइसेंस होने के बावजूद क्यों फंसे बालासुब्रमण्यम?
कोडुरु बालासुब्रमण्यम तिरुपति में चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर हथियार रखने का लाइसेंस लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें तिरुपति जिला कलेक्टर कार्यालय से निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाइसेंस जारी किया गया था।
लेकिन अब लाइसेंस मिलने के बाद की औपचारिकताओं पर सवाल उठे हैं। हथियार खरीदने के बाद उसकी जानकारी संबंधित कार्यालय में दर्ज कराई जानी थी, ताकि पुलिस को भी उसका रिकॉर्ड मिल सके।
बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया का एक हिस्सा पूरा नहीं हुआ था। इसी कारण पुलिस के पास बालासुब्रमण्यम के हथियार की पूरी जानकारी मौजूद नहीं थी।
अब अधिकारियों को लाइसेंस जारी होने के रिकॉर्ड, हथियार की खरीद और पुलिस को दी गई जानकारी की जांच करनी होगी। इसी आधार पर तय किया जाएगा कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
चुनाव के दौरान लाइसेंसी हथियार जमा कराने का नियम क्या है?
चुनाव के समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन लाइसेंसी हथियारों की समीक्षा करता है। चुनाव संबंधी सुरक्षा निर्देशों के तहत जिला स्तर पर गठित समिति ऐसे लाइसेंसधारकों की पहचान करती है, जिनके हथियार जमा कराना जरूरी माना जाता है।
जिन लोगों को हथियार जमा कराने का निर्देश मिलता है, उन्हें संबंधित पुलिस थाने या अधिकृत स्थान पर हथियार जमा करना होता है। कुछ श्रेणियों में आवश्यक सुरक्षा कार्यों के लिए छूट भी दी जा सकती है।
बालासुब्रमण्यम के मामले में सवाल यह है कि उनके हथियार की जानकारी संबंधित पुलिस रिकॉर्ड में क्यों नहीं थी और चुनावी नामांकन के दौरान वह पिस्तौल लेकर मौके पर कैसे पहुंचे।
पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या उन्हें हथियार जमा कराने के लिए कोई निर्देश जारी हुआ था।
तिरुपति में 550 हथियार लाइसेंस का रिकॉर्ड
तिरुपति पुलिस के अनुसार, जिले में कुल 550 हथियार लाइसेंस जारी किए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया को देखते हुए अधिकतर लाइसेंसी हथियार जमा करा दिए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि 29 हथियार जमा कराने की प्रक्रिया बाकी थी।
बैंकों की सुरक्षा और नकदी लाने-ले जाने जैसे कामों में इस्तेमाल होने वाले 89 लाइसेंसी हथियारों को जरूरी सुरक्षा व्यवस्था के कारण अलग श्रेणी में रखा गया था।
बालासुब्रमण्यम की पिस्तौल से जुड़ी जानकारी पुलिस के रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं होने के कारण उसे जमा कराने की कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब इस मामले में तिरुपति और कडपा जिले के अधिकारियों के बीच जानकारी का मिलान किया जा रहा है।
उम्मीदवार के चयन पर अपनी ही पार्टी के दो गुट भिड़े
नंदलूर की घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विवाद किसी विपक्षी दल से नहीं, बल्कि टीडीपी के भीतर उम्मीदवार के चयन को लेकर शुरू हुआ था।
स्थानीय स्तर पर दोनों गुट चाहते थे कि उनके पसंद के उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का मौका मिले। इसी बात पर शुरू हुआ विवाद पत्थरबाजी और आगजनी तक पहुंच गया।
कुछ रिपोर्टों में राजमपेट क्षेत्र के टीडीपी नेताओं के अलग-अलग गुटों का भी जिक्र है। पुलिस अब वहां मौजूद लोगों और घटना से जुड़े वीडियो की मदद से यह पता लगा रही है कि किस पक्ष ने हिंसा की शुरुआत की थी।
चुनावी नामांकन के दौरान किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के बीच इस तरह की झड़प होने से प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों पर भी सवाल उठे हैं।
आंध्र प्रदेश में अन्य जगहों पर भी हुई चुनावी हिंसा
नंदलूर की घटना ऐसे समय हुई, जब आंध्र प्रदेश के कई जिलों में स्थानीय निकाय चुनावों के नामांकन को लेकर तनाव बना हुआ था। कडपा, चित्तूर, अनंतपुर और अन्य क्षेत्रों से राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों की शिकायतें सामने आई थीं।
विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने आरोप लगाया कि उसके कुछ उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। पार्टी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अदालत का रुख किया।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विपक्ष पर चुनाव प्रक्रिया बाधित करने और हिंसा भड़काने के आरोप लगाए हैं। दोनों दल एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर आई शिकायतों के बीच उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अदालत की कार्यवाही के बाद कुछ शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। हालांकि वह मामला नंदलूर में हुई ग्रामीण निकाय चुनाव की झड़प से अलग है।
टीडीपी के लिए क्यों बढ़ी राजनीतिक परेशानी?
आंध्र प्रदेश में टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार सत्ता में है। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान पार्टी के एक आधिकारिक प्रवक्ता पर गोली चलाने का आरोप लगने से विपक्ष को सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का मौका मिला है।
सत्तारूढ़ दल की ओर से चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रहने के दावे किए जा रहे थे। लेकिन नंदलूर में अपनी ही पार्टी के दो गुटों का आमने-सामने आना और कथित हवाई फायरिंग होना उन दावों के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।
इस घटना में पुलिस की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी नेता के पास हथियार रखने का लाइसेंस था। अब यह देखा जाएगा कि क्या उसका इस्तेमाल लाइसेंस की शर्तों और कानून के अनुरूप हुआ था।
पुलिस की सिफारिश के बाद क्या होगा?
कडपा पुलिस ने लाइसेंस रद्द कराने के लिए संबंधित प्राधिकारी को पत्र भेजने की बात कही है। इसके बाद लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी के स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और पुलिस रिपोर्ट का परीक्षण किया जा सकता है।
इस प्रक्रिया में हथियार के इस्तेमाल की परिस्थितियां, चुनाव के दौरान लागू सुरक्षा निर्देश और लाइसेंस से जुड़ी शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। संबंधित अधिकारी का निर्णय आने तक लाइसेंस रद्द होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।









