जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन तेज, गेट बंद होने पर दीवार फांदकर कैंपस में घुसे छात्र

छात्र संघ चुनाव की मांग पर जामिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन तेज हुआ। कैंपस के गेट और लाइब्रेरी बंद, ऑनलाइन कक्षाएं शुरू। प्रशासन और छात्रों में बातचीत जारी।

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन तेज हो गया। गेट बंद होने के बावजूद छात्र कैंपस में घुसने की कोशिश करते रहे। प्रशासन ने कक्षाएं ऑनलाइन कर दीं और सुरक्षा बढ़ा दी।

नई दिल्ली: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार, 25 अक्टूबर को और तेज हो गया। यूनिवर्सिटी के सभी गेट बंद होने के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस के बाहर जमा हो गए। कुछ छात्रों ने गेट और दीवार फांदकर अंदर जाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस भी हुई। विश्वविद्यालय परिसर और आसपास भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।

छात्र करीब दो सप्ताह से छात्र संघ बहाल करने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालय कर्मचारियों के बीच विवाद के बाद प्रशासन ने सभी कक्षाएं ऑनलाइन करने का आदेश दिया था। लाइब्रेरी भी बंद कर दी गई थीं।

गेट बंद मिले तो दीवार फांदकर अंदर पहुंचे छात्र

रविवार सुबह से ही जामिया के गेट नंबर सात के बाहर छात्रों की भीड़ जुटने लगी थी। पुलिस ने मुख्य रास्तों पर बैरिकेड लगा रखे थे और कैंपस में आने-जाने पर पाबंदी थी। छात्रों का कहना था कि वे अपने ही विश्वविद्यालय में प्रवेश करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें रोका जा रहा है। कुछ छात्र गेट पर चढ़ गए तो कई दीवार पार करके अंदर पहुंचे।

इस दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। हालांकि, पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन सभी आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।

12 अक्टूबर से छात्र संघ बहाल करने की मांग

जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से प्रदर्शन चल रहा है। कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ का आखिरी चुनाव 2005 में हुआ था। वर्ष 2006 में छात्र संघ को भंग कर दिया गया। इसके बाद चुनाव दोबारा शुरू नहीं हो सके।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्र संघ नहीं होने से उनकी समस्याएं विश्वविद्यालय प्रशासन तक ठीक से नहीं पहुंच पातीं। फीस, हॉस्टल, लाइब्रेरी और दूसरी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए वे चुने हुए प्रतिनिधि चाहते हैं।

पानी-बिजली बंद करने का आरोप, हॉस्टल में भी परेशानी

शनिवार को प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश के बाद कैंपस का माहौल और बिगड़ गया था। छात्रों का आरोप है कि धरना स्थल पर बिजली और पानी की सुविधा बंद कर दी गई।

उनका कहना है कि बाहर से खाना और पीने का पानी भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। हॉस्टल में रहने वाली कुछ छात्राओं ने कमरे खाली करने का दबाव बनाए जाने की शिकायत की।

छात्रों के मुताबिक, इस स्थिति में पढ़ाई और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष अलग है।

प्रशासन बोला- छात्रों की सुरक्षा के लिए लिया फैसला

विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार, 24 अक्टूबर को नोटिस जारी करके सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं अगले आदेश तक ऑनलाइन चलाने का फैसला किया था। प्रशासन का कहना है कि कैंपस में मौजूद छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई जारी रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय के मुताबिक, प्रदर्शनकारी तय स्थान के बजाय गुलिस्तां-ए-गालिब लॉन में धरना दे रहे थे। अधिकारियों और शिक्षकों ने उनसे बातचीत करके प्रदर्शन खत्म करने की अपील की थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

छात्रों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने उनका टेंट हटाने और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को जबरन अस्पताल ले जाने की कोशिश की। प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए छात्रों पर कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया।

26 अक्टूबर को चुनाव कराने पर प्रशासन ने दिया आदेश

सोमवार, 26 अक्टूबर को इस विवाद में नया मोड़ आया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित आदेश जारी करके छात्र संघ का संविधान मंजूर होने के 15 दिन बाद चुनाव कराने की बात कही। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का फैसला भी किया गया। सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति बनाने की बात कही गई।

हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि चुनाव की तारीख अभी तय नहीं है। संविधान कब मंजूर होगा, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से सार्वजनिक माफी मांगने की शर्त पर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं।

इस बीच कुछ रिपोर्टों में छात्रों और प्रशासन के बीच समझौता होने तथा आंदोलन खत्म होने की जानकारी दी गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में कुछ छात्रों के विरोध जारी रखने की बात सामने आई है।

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