फ्रांस में मरीन ले पेन ने 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार शुरू कर दिया है। देश में महंगाई और हिंसक प्रदर्शनों के बीच उन्होंने कानून व्यवस्था सुधारने, आव्रजन पर सख्ती करने और आम लोगों को आर्थिक राहत देने का वादा किया।
पेरिस: फ्रांस में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने रविवार, 25 अक्टूबर को अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने पर वह देश में कानून व्यवस्था को मजबूत करेंगी और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगी। ले पेन ने मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने में नाकाम रहने का आरोप भी लगाया।
ले पेन ने यह बात फ्रांस के ऑरलियॉं शहर में आयोजित एक बड़ी रैली में कही। उनकी पार्टी नेशनल रैली (RN) के करीब 8,500 समर्थक कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, आव्रजन और फ्रांस की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
8500 समर्थकों के सामने क्या बोलीं ले पेन?
58 साल की मरीन ले पेन ने कहा कि फ्रांस को पुरानी स्थिति में वापस ले जाने के बजाय एक नए दौर की शुरुआत करने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में देश की कानून व्यवस्था कमजोर हुई है। सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और आगजनी की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। ले पेन के भाषण के दौरान उनके समर्थक फ्रांस के झंडे लहरा रहे थे। कई लोगों ने उनके समर्थन में नारे भी लगाए।
ऑरलियॉं शहर को चुनाव प्रचार के लिए चुनने के पीछे एक ऐतिहासिक वजह भी है। इसी शहर में 1429 में जोन ऑफ आर्क ने अंग्रेजों की घेराबंदी खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई थी। फ्रांस के राष्ट्रवादी दल उन्हें देश की स्वतंत्रता और साहस का प्रतीक मानते हैं।
महंगाई के खिलाफ सड़कों पर चार लाख से ज्यादा लोग
फ्रांस में पिछले कई हफ्तों से महंगाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शनिवार, 24 अक्टूबर को पेरिस सहित कई शहरों में चार लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे।
लोग बढ़ते घरेलू खर्च, महंगी ऊर्जा और स्कूलों में सुविधाओं की कमी को लेकर सरकार से नाराज हैं। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रदर्शनों में करीब 4.10 लाख लोग शामिल हुए। हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद पुलिस ने 1,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया।
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार बताया। हालांकि, शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले संगठनों की मांगें महंगाई कम करने और शिक्षा व्यवस्था सुधारने से जुड़ी हैं।
अवैध आव्रजन रोकने के लिए सख्त नियम बनाने का वादा
मरीन ले पेन ने अपने भाषण में फ्रांस की सीमाओं की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने पर देश में प्रवेश के नियम कड़े किए जाएंगे।
उनका प्रस्ताव है कि फ्रांस की राष्ट्रीय सीमाओं के साथ यूरोपीय स्तर पर भी निगरानी मजबूत की जाए। उन्होंने अपराध में शामिल विदेशी नागरिकों को देश से बाहर भेजने और फ्रांसीसी नागरिकता देने के नियम बदलने की बात कही।
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ले पेन लंबे समय से आव्रजन विरोधी राजनीति करती रही हैं। उनकी पार्टी का मानना है कि फ्रांस की राष्ट्रीय पहचान, भाषा और परंपराओं को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भी चुनाव लड़ेंगी
मरीन ले पेन के राजनीतिक भविष्य पर इस साल अदालत के एक फैसले के कारण सवाल खड़े हुए थे। यूरोपीय संसद के फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामले में अपील अदालत ने उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी।
हालांकि, बदली हुई सजा के बाद उनके लिए 2027 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का रास्ता खुल गया। इसके साथ कुछ कानूनी शर्तें भी जुड़ी हैं।
ले पेन पहले भी तीन बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुकी हैं। इस बार उन्होंने चौथी कोशिश के लिए प्रचार शुरू किया है।
सर्वे में ले पेन को 32 से 34 प्रतिशत समर्थन
चुनाव से पहले आए एक इप्सोस सर्वे में मरीन ले पेन को पहले दौर के मतदान में करीब 32 से 34 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है।
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव दो चरणों में होता है। यदि पहले दौर में किसी उम्मीदवार को आधे से ज्यादा वोट नहीं मिलते, तो सबसे अधिक वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरा मुकाबला होता है।
अगला राष्ट्रपति चुनाव अप्रैल और मई 2027 में प्रस्तावित है। मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लगातार दो कार्यकाल पूरे करने के बाद तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते।
ले पेन के खिलाफ भी सड़कों पर उतरे लोग
ऑरलियॉं में ले पेन की रैली से एक दिन पहले हजारों लोगों ने उनकी पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणपंथी राजनीति और आव्रजन संबंधी उनकी नीतियों का विरोध किया। ले पेन की पार्टी के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला ने भी चुनावी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की बात कही।
अगले साल के चुनाव में महंगाई, रोजगार, देश की आर्थिक हालत और आव्रजन जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। फ्रांस पर पहले से कर्ज और बजट घाटे का दबाव है। ऐसे में चुनावी वादों को लागू करने के लिए अगली सरकार को आर्थिक चुनौतियों से भी निपटना होगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव, नए सर्वे और उम्मीदवारों के कार्यक्रमों की जानकारी के लिए आधिकारिक चुनाव आयोग और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के अपडेट देखते रहें।









