असम में दोषसिद्धि दर पांच गुना बढ़ी, 30.88% पहुंची, CM हिमंत सरमा ने जारी किए आंकड़े

असम में दोषसिद्धि दर 2021 के 6.1% से बढ़कर सितंबर 2026 में 30.88% पहुंची। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेहतर पुलिस जांच और सरकारी वकीलो के काम को वजह बताया।

असम में अपराध के मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़कर 30.88 प्रतिशत पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि 2021 में यह आंकड़ा 6.1 प्रतिशत था। उन्होंने बेहतर पुलिस जांच और अदालत में मजबूत पैरवी को वजह बताया। 

गुवाहाटी: असम में आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि दर पिछले पांच साल में काफी बढ़ी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार, 26 अक्टूबर को बताया कि वर्ष 2021 में राज्य की दोषसिद्धि दर केवल 6.1 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 30.88 प्रतिशत पहुंच गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर आंकड़े जारी करते हुए कहा कि पुलिस की बेहतर जांच और अदालतों में मामलों की मजबूत पैरवी से यह बदलाव आया है।

सरमा ने इस सुधार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को भी दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपराध के मामलों में जवाबदेही तय करने और लोगों को न्याय दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है।

पांच साल में कितनी बढ़ी दोषसिद्धि दर?

मुख्यमंत्री की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, असम में 2021 के दौरान दोषसिद्धि दर 6.1 प्रतिशत थी। अगले साल 2022 में यह बढ़कर 13.5 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 16.4 प्रतिशत तक पहुंचा।

इसके बाद 2024 में दोषसिद्धि दर 22.6 प्रतिशत दर्ज की गई। वर्ष 2025 में यह 25.8 प्रतिशत रही, जबकि सितंबर 2026 तक बढ़कर 30.88 प्रतिशत हो गई।

इन आंकड़ों के अनुसार, 2021 के मुकाबले दोषसिद्धि दर में 24.78 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है। शुरुआती स्तर से तुलना करें तो यह करीब पांच गुना है। हालांकि, 2026 के आंकड़े सितंबर तक के हैं, जबकि पुराने वर्षों के आंकड़े पूरे साल के हैं।

मुख्यमंत्री ने बेहतर जांच को बताया वजह

हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने X अकाउंट पर पुलिस जांच, अभियोजन और जवाबदेही का जिक्र किया। उनका कहना है कि अपराध के मामलों में केवल गिरफ्तारी करना काफी नहीं है। दोषियों को अदालत से सजा दिलाने के लिए जांच मजबूत होनी चाहिए।

पुलिस को ऐसे सबूत जुटाने होते हैं जो अदालत में टिक सकें। इसके बाद सरकारी वकील उन सबूतों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखते हैं। जांच में कमी रहने या पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी के खिलाफ दोष साबित करना मुश्किल हो सकता है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, असम में इन प्रक्रियाओं पर ध्यान देने से दोषसिद्धि दर बढ़ी है। उन्होंने आगे भी कानून व्यवस्था को मजबूत रखने की बात कही।

जुलाई में भी सरकार ने जारी किए थे आंकड़े

यह पहली बार नहीं है जब असम सरकार ने पुलिस के कामकाज से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। जुलाई 2026 में भी मुख्यमंत्री ने अपराध और पुलिस जांच से संबंधित जानकारी साझा की थी।

उस समय सरकार ने बताया था कि जून 2026 तक राज्य की दोषसिद्धि दर 25.3 प्रतिशत रही। इसके अलावा चार्जशीट दाखिल करने की दर भी 2021 के 39.4 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 तक 86.6 प्रतिशत पहुंचने का दावा किया गया था।

चार्जशीट वह दस्तावेज होता है, जिसे पुलिस जांच पूरी करने के बाद अदालत में पेश करती है। इसमें आरोपी के खिलाफ जुटाए गए सबूत और जांच से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गया है।

दोषसिद्धि दर का क्या मतलब है?

दोषसिद्धि दर यानी कन्विक्शन रेट से पता चलता है कि जिन आपराधिक मामलों की सुनवाई पूरी हुई, उनमें से कितने प्रतिशत मामलों में अदालत ने दोष सिद्ध पाया।

मसलन, किसी अवधि में 100 मामलों की सुनवाई पूरी हुई और उनमें 30 मामलों में दोषसिद्धि हुई, तो दोषसिद्धि दर 30 प्रतिशत होगी।

इसका मतलब यह नहीं है कि दर्ज हुए हर 100 मामलों में से 30 में ही दोषियों को सजा मिली। जिन मुकदमों की सुनवाई अभी अदालत में चल रही है, उनकी स्थिति अलग होती है।

इसलिए दोषसिद्धि दर को समझते समय लंबित मुकदमों, अपराधों की प्रकृति और अदालतों में निपटाए गए कुल मामलों की संख्या भी देखनी होती है।

आंकड़ों को लेकर कौन सी जानकारी अभी बाकी है?

मुख्यमंत्री ने दोषसिद्धि दर के सालाना आंकड़े तो साझा किए हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि सितंबर 2026 तक कुल कितने मामलों में अदालत का फैसला आया और कितने मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि जारी आंकड़ों में किन अपराधों को शामिल किया गया है और सितंबर का प्रतिशत केवल उस महीने का है या पूरे साल का। इन जानकारियों के बिना यह कहना मुश्किल है कि हत्या, चोरी, धोखाधड़ी और दूसरे अपराधों में दोषसिद्धि की स्थिति अलग-अलग कितनी बदली है।

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