महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन पर विवाद बढ़ गया है। संजय राउत ने अमित शाह से ईडी जांच की मांग की है। मुंबई पुलिस ने ऑडियो क्लिप की जांच के लिए एसआईटी बनाई है।
मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का मामला राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन समाप्त कराने के लिए बड़ी रकम का इंतजाम किया गया था।
इस मामले में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम भी सामने आया है। हालांकि, दोनों ने आरोपों से इनकार किया है। मुंबई पुलिस ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित कर दिया है।
अमित शाह को लिखे पत्र में संजय राउत ने क्या कहा?
संजय राउत ने सोमवार, 26 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दो पन्नों का पत्र भेजा। उन्होंने मांग की कि 500 करोड़ रुपये से जुड़े कथित लेनदेन की जांच महाराष्ट्र पुलिस के साथ ईडी को भी सौंपी जाए। राउत ने कहा कि इतनी बड़ी रकम के बारे में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियों को पता लगाना चाहिए कि पैसा कहां से आया, किसके पास पहुंचा और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
उन्होंने कथित लेनदेन की जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कराने की मांग भी की है। राउत का कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मनोज जरांगे की ऑडियो क्लिप से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की ओर से सार्वजनिक की गई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से हुई। रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये के लेनदेन और कुछ राजनीतिक नेताओं के नामों का जिक्र है। आरोप है कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने या समाप्त कराने के उद्देश्य से यह रकम देने की योजना बनाई गई थी।
राउत ने दावा किया कि इस कथित सौदे में श्रीकांत शिंदे की भूमिका थी। हालांकि, ऑडियो में सुनाई देने वाली बातचीत की प्रामाणिकता और उसमें किए गए दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा और शिंदे परिवार पर लगाए गंभीर आरोप
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी मामले को उठाया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी अब राजनीतिक आंदोलनों को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। राउत का दावा है कि भाजपा की ओर से कथित रकम श्रीकांत शिंदे तक पहुंचाई गई थी, ताकि उसे मनोज जरांगे को दिया जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतनी बड़ी रकम दी गई थी, तो वह आखिर कहां गई।
दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे ने इन आरोपों को खारिज किया है। मनोज जरांगे ने भी स्पष्ट किया है कि उन्हें कोई पैसा नहीं मिला। उन्होंने पूरे विवाद को अपने आंदोलन के खिलाफ साजिश बताया है। फिलहाल किसी जांच एजेंसी ने इन नेताओं के खिलाफ कथित वित्तीय गड़बड़ी साबित होने की घोषणा नहीं की है।
मुंबई पुलिस ने बनाई तीन सदस्यीय SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने 26 अक्टूबर को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह टीम ऑडियो रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े आरोपों की जांच करेगी। एसआईटी का नेतृत्व मुंबई पुलिस के दक्षिण क्षेत्र के अतिरिक्त आयुक्त शैलेश बलकवड़े करेंगे। टीम में पुलिस उपायुक्त विजयकांत सागर और साइबर क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त बजरंग बानसोडे भी शामिल हैं।
जांच दल को रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराने, उसमें शामिल आवाजों की पहचान करने और बातचीत की परिस्थितियों की पड़ताल करने की जिम्मेदारी दी गई है। जरूरत पड़ने पर जांच में अन्य अधिकारियों की सहायता भी ली जा सकती है।
जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती रिकॉर्डिंग की वास्तविकता का पता लगाना है। जांच में यह देखा जाएगा कि ऑडियो में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई और उसमें जिन लोगों का जिक्र है, उनकी भूमिका क्या रही। इसके साथ ही कथित रकम के स्रोत, संभावित लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बीच किसी वित्तीय संबंध की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस अधिकारियों को जांच की प्रगति की नियमित जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, एसआईटी गठन का अर्थ यह नहीं है कि रिकॉर्डिंग में किए गए आरोप सही साबित हो गए हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़ा है मामला
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय लंबे समय से शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहा है। मनोज जरांगे पाटिल इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
उनके नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों का राज्य की राजनीति पर असर पड़ा है। इसी कारण 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले आंदोलन को प्रभावित करने संबंधी आरोप राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।









