हिमाचल में गेहूं की बिजाई से पहले खाद की किल्लत, 550 रुपये बढ़े दाम, किसानों को सताने लगी चिंता

हिमाचल में गेहूं की बिजाई से पहले 12:32:16 खाद की कमी बनी हुई है। कीमत 550 रुपये तक बढ़ी है। कांगड़ा में 800 मीट्रिक टन तक खाद की मांग भेजी गई है।

हिमाचल प्रदेश में गेहूं की बिजाई से पहले खाद की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। 12:32:16 खाद की आपूर्ति प्रभावित है और कुछ खादों के दाम 550 रुपये तक बढ़े हैं। कांगड़ा के लिए 800 मीट्रिक टन तक खाद मांगी गई है।

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में गेहूं की बिजाई की तैयारी कर रहे किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। कांगड़ा समेत कई जिलों में 12:32:16 खाद की कमी बनी हुई है। किसान सहकारी समितियों और खाद विक्रेताओं के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर खाद की कीमत भी पिछले साल के मुकाबले 550 रुपये तक बढ़ गई है। ऐसे में किसानों को चिंता है कि समय पर खाद नहीं मिली तो गेहूं की बिजाई में देरी हो सकती है।

गेहूं की बिजाई से पहले खाद के लिए भटक रहे किसान

हिमाचल में रबी फसलों की बिजाई का समय चल रहा है। कई क्षेत्रों में नवंबर के दौरान गेहूं की बिजाई की जाती है। कांगड़ा में भी किसान खेत तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन खाद की कमी उनके लिए परेशानी बन गई है।

सबसे ज्यादा दिक्कत 12:32:16 खाद को लेकर आ रही है। किसान इस खाद को लेने के लिए सहकारी समितियों में संपर्क कर रहे हैं। कई जगह उन्हें पर्याप्त स्टॉक नहीं होने की जानकारी मिल रही है।

प्रदेश के हमीरपुर, मंडी और दूसरे जिलों से भी खाद की कमी की शिकायतें सामने आई हैं। अक्टूबर में गोहर और सराज क्षेत्रों के किसानों ने गेहूं के साथ मटर, लहसुन और दूसरी फसलों की बिजाई प्रभावित होने की बात कही थी।

कच्चा माल नहीं मिलने से प्रभावित हुई खाद की आपूर्ति

किसानों को मिलने वाली 12:32:16 खाद की आपूर्ति में कमी की एक वजह इसे तैयार करने के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बताई जा रही है।

हिमाचल में गेहूं की बिजाई से पहले खाद की किल्लत, 550 रुपये बढ़े दाम, किसानों को सताने लगी चिंता

इस खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाशियम होते हैं। गेहूं की शुरुआती बढ़वार और जड़ों के विकास में इन पोषक तत्वों की भूमिका होती है।

कच्चे माल की कमी और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में परेशानी के कारण हिमाचल में इस खाद का स्टॉक प्रभावित हुआ है। सितंबर में हिमफेड अधिकारियों ने 12:32:16 खाद की जगह डीएपी और 16:16:16 खाद उपलब्ध कराने की जानकारी दी थी।

हालांकि, इन खादों में पोषक तत्वों का अनुपात अलग होता है। इसलिए किसानों को इनका इस्तेमाल मिट्टी की जरूरत और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

पिछले साल 1900 रुपये थी कीमत, अब 2450 रुपये

खाद की कमी के बीच किसानों को बढ़ी हुई कीमतों का भी सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध स्थानीय जानकारी के मुताबिक, जिस खाद की कीमत पिछले साल करीब 1900 रुपये थी, उसका भाव इस साल 2450 रुपये तक पहुंच गया है।

इस हिसाब से एक बोरी पर 550 रुपये अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि, यह कीमत स्थानीय रिपोर्ट में बताई गई है और अलग-अलग खादों के सरकारी बिक्री भाव भिन्न हो सकते हैं।

किसानों को बीज, खेत की जुताई और मजदूरी पर भी पैसा खर्च करना पड़ता है। ऐसे में खाद महंगी होने से गेहूं की खेती की लागत बढ़ रही है।

चंबा जिले में भी सितंबर के दौरान किसानों ने खाद बदलने के कारण एक बोरी पर करीब 600 रुपये अतिरिक्त खर्च होने की शिकायत की थी।

कांगड़ा के लिए 800 मीट्रिक टन तक खाद की मांग

कांगड़ा जिले में खाद की कमी दूर करने के लिए इफ्को की ओर से आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

इफ्को के एरिया मैनेजर श्रेय सूद के मुताबिक, जिले के लिए करीब 700 से 800 मीट्रिक टन खाद की मांग भेजी गई है। इसकी आपूर्ति रेल और ट्रकों के माध्यम से की जा रही है।

उन्होंने बताया कि खाद की कुछ खेप जिले में पहुंचनी शुरू हो गई है। आने वाले सप्ताह में और खाद मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, अभी तक जिले में कुल कितनी खाद पहुंच चुकी है, इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

150 सहकारी समितियों से किसानों तक पहुंचती है खाद

कांगड़ा जिले में इफ्को से जुड़ी करीब 150 सहकारी समितियां हैं। इन समितियों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है।

खाद की खेप आने के बाद समितियों में स्टॉक भेजा जाता है, जहां से किसान अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी करते हैं।

अभी आपूर्ति सीमित होने के कारण सभी किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद मिलना मुश्किल हो रहा है। किसानों को उम्मीद है कि बिजाई का समय आने से पहले समितियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होगा।

समय पर बिजाई नहीं हुई तो फसल पर पड़ सकता है असर

हिमाचल प्रदेश के निचले और मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं की समय पर बिजाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से 15 नवंबर के बीच करने की सिफारिश की जाती है। हालांकि, अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिजाई का समय बदलता है।राज्य कृषि विभाग के अनुसार, गेहूं की बिजाई में देरी होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

किसानों की चिंता भी इसी बात को लेकर है कि खाद के इंतजार में खेत तैयार होने के बावजूद बिजाई न टालनी पड़े।

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