उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 1.70 लाख कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने का फैसला किया है। कर्मचारियों के आश्रित परिवार भी योजना में शामिल होंगे। इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्कूलों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस इलाज देने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। इससे बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 1.70 लाख कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवारों को फायदा मिलेगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि बैठक में रखे गए सभी 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के 1.22 लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
बेसिक शिक्षा विभाग के तहत काम करने वाले 1,22,304 कर्मचारियों को इस फैसले का फायदा मिलेगा। इनमें बेसिक शिक्षा परिषद, सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, वित्तविहीन विद्यालय और समग्र शिक्षा परियोजना से जुड़े पात्र कर्मचारी शामिल हैं।
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इन कर्मचारियों के आश्रित परिवार के सदस्य भी इलाज की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए सरकार प्रति कर्मचारी सालाना तीन हजार रुपये प्रीमियम खर्च करेगी।
बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर सरकार को हर साल करीब 36.69 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। पहले शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई थी। अब अन्य पात्र कर्मचारियों को भी इस दायरे में लाया जा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा के 48 हजार कर्मचारियों को भी राहत
माध्यमिक शिक्षा विभाग के 48,062 कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला हुआ है। इसमें सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के साथ संस्कृत विद्यालयों तथा संस्कृत महाविद्यालयों में काम करने वाले पात्र कर्मचारी शामिल होंगे।
इनके लिए भी सरकार सालाना तीन हजार रुपये प्रति कर्मचारी प्रीमियम देगी। इस मद में करीब 14.42 करोड़ रुपये का सालाना खर्च होने का अनुमान है।
दोनों विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर कुल 1,70,366 कर्मचारियों को योजना में शामिल किया गया है। उनके आश्रित परिवारों को भी इलाज की सुविधा मिलेगी।
सरकारी और निजी अस्पतालों में हो सकेगा इलाज
योजना के तहत कर्मचारियों को इलाज के लिए केवल सरकारी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना होगा। सरकार से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी भर्ती होकर उपचार कराया जा सकेगा।
इस व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज यानी साचीज को दी गई है।
अस्पतालों में इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की निर्धारित दरों के अनुसार लागू होंगी।
कैशलेस सुविधा का मतलब है कि पात्र इलाज का भुगतान निर्धारित योजना के तहत किया जाएगा। हालांकि, किन बीमारियों और उपचारों को शामिल किया गया है, यह योजना की शर्तों पर निर्भर करेगा।
पांच लाख रुपये तक इलाज की सुविधा
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सालाना पांच लाख रुपये तक इलाज का प्रावधान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जुलाई 2026 में वाराणसी से इस योजना की शुरुआत की थी।
इससे पहले जनवरी में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 15 लाख शिक्षकों तथा कर्मचारियों को कैशलेस सुविधा देने का फैसला किया गया था। उस समय योजना पर करीब 448 करोड़ रुपये सालाना खर्च होने का अनुमान बताया गया था।
मंगलवार को शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए मंजूर प्रस्ताव के संबंध में पांच लाख रुपये की सीमा और अन्य शर्तों का पूरा विवरण संबंधित शासनादेश से स्पष्ट होगा।
पहले इलाज के खर्च को लेकर रहती थी चिंता
निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर कर्मचारियों को कई बार बड़ी रकम का इंतजाम करना पड़ता है। खासकर गंभीर बीमारी या अचानक अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार के बजट पर भारी पड़ सकता है।
कैशलेस व्यवस्था लागू होने से पात्र कर्मचारियों को निर्धारित अस्पतालों में इलाज कराने में आसानी होगी। परिवार के आश्रित सदस्यों को भी योजना में शामिल करने से इसका दायरा बढ़ेगा।
हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों की पात्रता और आश्रितों से संबंधित नियमों का पालन करना होगा।








