उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने मंगलवार को 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी। गौतमबुद्ध नगर की चार औद्योगिक परियोजनाओं में 1709.84 करोड़ रुपये निवेश प्रस्तावित है। पशुपालन, रोजगार और जलमार्गों पर नावों के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए।
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में विकास और रोजगार से जुड़े कई फैसले लिए गए। सरकार ने कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें नोएडा और गौतमबुद्ध नगर की चार औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने, पशुधन क्षेत्र में सुधार और जल परिवहन के लिए नए नियम लागू करने जैसे फैसले शामिल हैं। सरकार का जोर निवेश बढ़ाने के साथ किसानों और पशुपालकों की आय सुधारने पर है।
नोएडा की चार परियोजनाओं में 1709.84 करोड़ रुपये का निवेश
कैबिनेट ने गौतमबुद्ध नगर में प्रस्तावित चार औद्योगिक परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल 1709.84 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। सबसे बड़ा निवेश हैवेल्स इंडिया लिमिटेड की ओर से किया जाना है। कंपनी ने 879 करोड़ रुपये लगाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना में 634 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
अमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी 112.84 करोड़ रुपये और मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशंस सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड 84 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इन चार परियोजनाओं में से दो नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित हैं, जबकि बाकी दो निजी भूमि पर स्थापित की जाएंगी। लेटर ऑफ कम्फर्ट निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि, इससे यह नहीं माना जा सकता कि पूरी निवेश राशि खर्च हो चुकी है। परियोजनाओं के स्थापित होने पर जिले में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन पर जोर
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बैठक में पशुधन क्षेत्र को मजबूत बनाने से जुड़े प्रस्तावों को भी महत्व दिया गया। सरकार पशुपालन को किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का बेहतर जरिया बनाना चाहती है। इसके लिए राज्य स्तर पर पशुधन से जुड़े मिशन के गठन का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत रोजगार, छोटे कारोबार और पशुपालन से जुड़ी उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना है।
सरकार का प्रयास है कि पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध हों और पशुओं की उत्पादकता बढ़े। साथ ही दूध तथा दूसरे पशु उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार की व्यवस्था बेहतर बनाई जा सके। पशुपालन आधारित कारोबार को संगठित करने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसका लाभ विशेष रूप से उन परिवारों को मिल सकता है जो खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं।
गायों की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
पशुधन क्षेत्र की योजना में अच्छी नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा। खासकर गायों की नस्ल सुधारने के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई है। सरकार ने प्रति गाय औसतन दूध उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नस्ल सुधार, बेहतर पशु प्रबंधन और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके साथ मुर्गी पालन और बकरी पालन से जुड़े किसानों को प्रोत्साहित करने का भी प्रस्ताव है। सरकार इन गतिविधियों के जरिए ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाना चाहती है। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। हालांकि, पशु उत्पादों की प्रोसेसिंग, बेहतर कीमत दिलाने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए अभी काम करने की जरूरत है।
यूपी में नावों और जलयानों का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026 को भी मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेश के जलमार्गों पर चलने वाली नावों और दूसरे जलयानों के संचालन के लिए नई व्यवस्था बनाई जाएगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि जलयानों को दो श्रेणियों में रखा गया है। पहली श्रेणी में इंजन से चलने वाले स्टीमर और बड़े जलयान शामिल होंगे। दूसरी श्रेणी में पारंपरिक नावें और गैर-मशीनीकृत जलयान रखे गए हैं।
दोनों श्रेणियों के जलयानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य जल परिवहन को व्यवस्थित करना और नावों के संचालन से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड में लाना है। मंत्री के अनुसार, प्रदेश में अंतर्देशीय जलमार्गों की व्यवस्था देखने के लिए प्राधिकरण का भी गठन किया गया है। इससे नाव संचालकों और जल परिवहन से जुड़े कारोबार की निगरानी बेहतर हो सकेगी।








