उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों को दूसरी सरकारी सुविधाओं से भी जोड़ने पर जोर दे रही है। लखनऊ में हुई कार्यशाला में पक्के मकानों के साथ बिजली, पानी, रसोई गैस और रोजगार उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्का मकान पाने वाले परिवारों को अब दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की तैयारी है। सरकार चाहती है कि घर मिलने के बाद परिवारों को बिजली, पेयजल, रसोई गैस और आजीविका के साधनों के लिए परेशानी न उठानी पड़े। मंगलवार, 27 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों से इस दिशा में काम करने को कहा।
पक्के मकान के साथ दूसरी सुविधाएं भी मिलेंगी
प्रदेश सरकार का जोर अब केवल मकान बनवाने तक सीमित नहीं है। ग्रामीण परिवारों को दूसरी जरूरी सुविधाओं से जोड़ने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने की बात कही गई है।
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लखनऊ के हयात रीजेंसी होटल में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों से कहा गया कि आवास योजना का लाभ पाने वाले पात्र परिवारों तक अन्य सरकारी योजनाएं भी पहुंचनी चाहिए।
इसमें साफ पानी, बिजली, रसोई गैस और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता देने पर जोर रहा। हालांकि, इन सुविधाओं के लिए किसी नई अलग योजना या अतिरिक्त आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की गई है।
यूपी में 42 लाख से ज्यादा पीएम आवास आवंटित
कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश में ग्रामीण आवास योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत अब तक 42 लाख से अधिक मकान आवंटित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत लगभग छह लाख आवासों का आवंटन हुआ है। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने कुछ लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र भी सौंपे।
मौर्य ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर पात्र ग्रामीण परिवार को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों से योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर की समस्याओं का समाधान करने को कहा।
रोजगार से जोड़कर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बैठक में ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि मकान मिलने के साथ परिवार के पास नियमित कमाई के अवसर होना भी जरूरी है।
इसी वजह से आवास योजना के लाभार्थियों को रोजगार और आजीविका से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विकास परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, रोजगार उपलब्ध कराने के लिए किसी नए भर्ती अभियान, निश्चित नौकरी या अलग वित्तीय पैकेज की जानकारी कार्यशाला में नहीं दी गई।
मकानों की गुणवत्ता पर अधिकारियों को निर्देश
आवास निर्माण की गुणवत्ता भी बैठक का अहम मुद्दा रही। अधिकारियों से कहा गया कि मकान बनाने में तय मानकों का पालन हो और निर्माण पूरा होने तक निगरानी जारी रहे।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक शक्तिकांत सिंह ने डिजिटल सोशल ऑडिट और नियमित निगरानी की व्यवस्था पर जानकारी दी। उन्होंने समूह आधारित आवास निर्माण मॉडल के इस्तेमाल पर भी चर्चा की।
इन उपायों का उद्देश्य निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना और गड़बड़ियों की संभावना कम करना है।
सात राज्यों के अधिकारी भी कार्यशाला में शामिल
कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने योजना की प्रगति और क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की समीक्षा पर जोर दिया।
प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू ने दूसरे राज्यों में अपनाए गए सफल तरीकों से सीखने की बात कही। बस्ती, फतेहपुर और लखीमपुर खीरी के अधिकारियों ने भी अपने जिलों के अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकारी शामिल हुए। यह आयोजन 27 और 28 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित किया गया था।









