केरल की हाई-स्पीड रेल परियोजना पर ई. श्रीधरन ने सरकार से विशेषज्ञ समिति की आपत्तियां नजरअंदाज करने को कहा है। उनका आरोप है कि समिति ने प्रस्ताव की सही समीक्षा नहीं की। परियोजना पर सरकार का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
कोझिकोड: मेट्रो मैन के नाम से मशहूर ई. श्रीधरन ने केरल सरकार से प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल परियोजना पर जल्द फैसला लेने की मांग की है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को कोझिकोड में मालाबार चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के प्रस्ताव की समीक्षा करने वाली विशेषज्ञ समिति ने कई जरूरी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में श्रीधरन ने सरकार से समिति की आपत्तियों को खारिज करने और परियोजना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर श्रीधरन ने उठाए सवाल
श्रीधरन के मुताबिक, सरकार ने समिति को परियोजना से जुड़े पांच महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी थी। इसके बावजूद समिति ने मुख्य रूप से लागत पर ध्यान दिया और बाकी पहलुओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया।
उन्होंने समिति की उस दलील पर भी सवाल उठाया, जिसमें राज्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तटीय रेलवे लाइन को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। श्रीधरन का कहना है कि मौजूदा रेलवे नेटवर्क के समानांतर नई लाइन बनाने से केरल की लंबी दूरी की यात्रा संबंधी समस्याओं का पूरा समाधान नहीं होगा। इसके लिए अलग हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की जरूरत है।
तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक 473 किलोमीटर लंबी लाइन का प्रस्ताव
डीएमआरसी ने केरल के लिए लगभग 473.2 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव तैयार किया है। यह रेललाइन राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को उत्तरी जिले कन्नूर से जोड़ेगी। प्रस्ताव के अनुसार, परियोजना पर करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 23 स्टेशन बनाने की योजना है। रेल कॉरिडोर का अधिकांश हिस्सा जमीन से ऊपर खंभों पर तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
योजना लागू होने पर तिरुवनंतपुरम से कन्नूर के बीच यात्रा का समय करीब साढ़े तीन घंटे रहने का अनुमान है। हालांकि, अभी परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
हर दिन की देरी से बढ़ रहा खर्च
श्रीधरन ने परियोजना की मंजूरी में हो रही देरी पर चिंता जताई। उनके अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने में हर दिन की देरी से अनुमानित लागत करीब 2.7 करोड़ रुपये बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के साथ इस विषय पर पहले भी चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने समिति की रिपोर्ट आने के बाद कैबिनेट की मंजूरी जरूरी बताई थी।
श्रीधरन के मुताबिक, सरकार की ओर से एक महीने के भीतर फैसला लेने की बात कही गई थी, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। उन्होंने परियोजना के लिए ऐसा वित्तीय मॉडल सुझाने की बात भी कही, जिसमें राज्य सरकार को सीधे पूंजी लगाने की जरूरत न पड़े। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित वित्तीय व्यवस्था का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया।
सरकार ने क्यों रोकी परियोजना?
केरल सरकार ने जून 2026 में डीएमआरसी के प्रस्ताव की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई थी। समिति को तकनीकी व्यवहार्यता, आर्थिक स्थिति, पर्यावरणीय प्रभाव और निर्माण से जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी मिली थी।
जुलाई में समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्ताव को अधूरा बताया। उसके अनुसार, परियोजना में यात्रियों की संभावित संख्या, आर्थिक व्यवहार्यता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित पर्याप्त जानकारी नहीं थी। मुख्यमंत्री सतीशन ने तब कहा था कि जरूरी अध्ययन पूरे होने तक भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। सरकार का रुख है कि किसी बड़े रेल प्रोजेक्ट पर फैसला लेने से पहले उसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव समझना जरूरी है।
वायनाड के लिए अलग रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव
श्रीधरन ने कोझिकोड से वायनाड के सुल्तान बथेरी तक नई रेललाइन का प्रस्ताव भी सरकार को दिया है। करीब 72.5 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत 15 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। प्रस्ताव में पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्से में लगभग 20 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल बनाने की योजना शामिल है। इसके अलावा कोडुवल्ली, अडीवारम और कलपेट्टा में स्टेशन बनाने का सुझाव है।
श्रीधरन का दावा है कि इस परियोजना से कोझिकोड और सुल्तान बथेरी के बीच सफर करीब 35 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकार से पांच करोड़ रुपये मांगे हैं। फिलहाल केरल सरकार के सामने हाई-स्पीड रेल परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का सवाल बना हुआ है। श्रीधरन इसे जल्द शुरू करने के पक्ष में हैं, जबकि विशेषज्ञ समिति विस्तृत अध्ययन जरूरी मानती है। अब परियोजना का भविष्य राज्य कैबिनेट के फैसले पर निर्भर करेगा।









