लखीसराय ROB में छह साल में आईं दरारें, निर्माण कंपनी पर 15 साल का प्रतिबंध

लखीसराय ROB में छह साल के भीतर गंभीर दरारें मिलीं। IIT पटना की जांच के बाद निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई हुई। जानें ब्लैकलिस्ट और पुल की मरम्मत का मामला।

बिहार के लखीसराय बाइपास रेलवे ओवरब्रिज में निर्माण पूरा होने के छह साल के भीतर गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। IIT पटना की जांच में गर्डरों में दरारें और जंग लगने की शिकायत मिली। विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक, निर्माण कंपनी को 15 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है।

लखीसराय: बिहार के लखीसराय बाइपास पर बने रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की मजबूती को लेकर सवाल उठे हैं। वर्ष 2020 में तैयार हुए इस पुल में तकनीकी जांच के दौरान कई गंभीर कमियां मिली हैं। सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के बाद पथ निर्माण विभाग ने निर्माण एजेंसी बाबा हंस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की। पुल की सुरक्षा को देखते हुए भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।

IIT पटना की जांच में पुल के गर्डरों में मिली दरारें

लखीसराय बाइपास स्थित रेलवे ओवरब्रिज की तकनीकी जांच में निर्माण से जुड़ी कई खामियां सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पुल के अधिकांश गर्डरों में एक-दूसरे के काफी नजदीक दरारें पाई गई हैं।

गर्डर पुल का वह हिस्सा होता है, जिस पर ऊपर से गुजरने वाले वाहनों का भार पड़ता है। इसमें दरारें होने पर पुल की मजबूती की विस्तृत जांच जरूरी हो जाती है।

जांच में पुल की PTFE बेयरिंग और मजबूती के लिए इस्तेमाल किए गए स्टील के सरियों में जंग लगने की बात भी सामने आई है।

तकनीकी रिपोर्ट में इन खामियों को संरचनात्मक सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक बताया गया। मरम्मत और जरूरी जांच पूरी होने तक भारी वाहनों की आवाजाही सीमित रखने की सिफारिश की गई थी।

31 मार्च 2020 को पूरा हुआ था निर्माण

इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण 31 मार्च 2020 को पूरा किया गया था। लेकिन छह साल के भीतर ही पुल में दरारें और दूसरी तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं।

मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पुल के निर्माण पर करीब 146.31 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। उस समय तकनीकी खामियां सामने आने के बाद भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। 

इतने कम समय में पुल की स्थिति खराब होने से निर्माण सामग्री और काम की गुणवत्ता की जांच का मुद्दा उठा है। इसके साथ निर्माण के दौरान निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी चर्चा में है।

निर्माण एजेंसी के खिलाफ कब हुई कार्रवाई?

आरटीआई के जरिए सामने आए विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक, पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (दक्षिण) ने 18 मई 2026 को संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की थी।

इसके बाद 1 जून को कंपनी को कारण बताओ नोटिस दिया गया। निर्माण एजेंसी ने 8 जून को अपना जवाब भेजा, लेकिन विभाग ने उसे संतोषजनक नहीं माना।

रिपोर्ट के अनुसार, पथ निर्माण विभाग ने 13 जून 2026 को बाबा हंस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 15 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करने का आदेश जारी किया।

हालांकि, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की सार्वजनिक सूची में 15 जुलाई 2026 को इसी कंपनी पर लंबित कार्य पूरा होने तक नई निविदाओं में भाग लेने का प्रतिबंध दर्ज है। इसलिए 15 वर्ष वाले आदेश और सार्वजनिक सूची में दर्ज प्रतिबंध की अवधि को लेकर संबंधित विभाग से स्पष्ट पुष्टि जरूरी है। 

RTI से सामने आए विभागीय दस्तावेज

लखीसराय के स्थानीय निवासी राज किशोर मधुकर ने सूचना के अधिकार के तहत पुल की जांच और निर्माण एजेंसी पर हुई कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

पथ निर्माण विभाग से मिले अभिलेखों में तकनीकी जांच, कंपनी को जारी नोटिस और विभागीय कार्रवाई का विवरण सामने आया।

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि पुल की स्थिति को लेकर विभागीय स्तर पर पहले ही चिंता जताई जा चुकी थी।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि पुल की सभी तकनीकी खामियों को कब तक दूर कर लिया जाएगा।

भारी वाहनों पर रोक, मरम्मत की समयसीमा स्पष्ट नहीं

पुल में दरारें मिलने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी वाहनों की आवाजाही रोकी थी। वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजने की व्यवस्था भी की गई थी।

जून में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने पुल का निरीक्षण किया था। उस समय IIT पटना की निगरानी में मरम्मत और मजबूती बढ़ाने की योजना तैयार किए जाने की जानकारी दी गई थी। 

लेकिन अक्टूबर तक पुल की मरम्मत पूरी होने या सामान्य यातायात पूरी तरह बहाल होने की ताजा आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई के साथ अब पुल को सुरक्षित बनाने का काम महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों के लिए यह रास्ता तभी पूरी तरह उपयोगी होगा, जब तकनीकी जांच के बाद इसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।

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