SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दिए 10 दिन, चुनाव आयोग के हलफनामे पर मांगा जवाब

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे का जवाब देने के लिए 10 दिन दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़ी याचिकाओं पर चुनाव आयोग के हलफनामे का जवाब देने के लिए याचिकाकर्ताओं को 10 दिन दिए हैं। आयोग ने अपने फैसलों को कानूनी और सर्वसम्मत बताया है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने चुनाव आयोग के जवाब पर याचिकाकर्ताओं को अपनी बात रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। आयोग ने सोमवार को 248 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया था। इसमें SIR से जुड़े फैसलों पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए पूरी प्रक्रिया को कानून के मुताबिक बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को SIR से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब देने के लिए समय मांगा। वह मुख्य याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश हुए थे।

अदालत ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। आयोग को भी अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए 14 दिन दिए गए हैं। अब इस मामले पर 17 नवंबर को दोबारा सुनवाई होगी।

248 पन्नों के हलफनामे में चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कानून के तहत कराया जा रहा है। आयोग के मुताबिक, इससे जुड़े तीन प्रमुख आदेश सभी तीन सदस्यों की सहमति से जारी हुए थे। इन आदेशों को 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को मंजूरी दी गई थी। आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए थे।

आयोग ने एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को गलत बताया। उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि आयोग के कामकाज पर इस तरह सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। आयोग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करने के फैसले को भी तीनों सदस्यों की मंजूरी मिली थी।

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फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप पर डोला सेन की याचिका

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद डोला सेन की नई याचिका भी सामने आई। इसमें बिहार में SIR के दौरान मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में कथित बदलाव पर सवाल उठाए गए हैं। डोला सेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का गलत दावा किया।

हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित वैधानिक फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। आयोग ने केवल इसके साथ लगाए जाने वाले अतिरिक्त घोषणा-पत्र में बदलाव की बात स्वीकार की है। अदालत ने डोला सेन की याचिका पर चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उठाए गए सभी मुद्दों की जांच की जाएगी।

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