कर्नाटक के चित्रदुर्ग में बनेगी पहली जनजातीय यूनिवर्सिटी, 120 एकड़ जमीन पर कैंपस बनाने की तैयारी

कर्नाटक के चित्रदुर्ग मे 120 एकड़ जमीन पर पहली जनजातीय यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव है। मंत्री टी. रघुमूर्ति ने शिक्षा, रिसर्च और रोजगार से जुड़ी जानकारी दी।

कर्नाटक सरकार ने चित्रदुर्ग जिले के चल्लकेरे में राज्य की पहली जनजातीय यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए 120 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। मंत्री टी. रघुमूर्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

चित्रदुर्ग: कर्नाटक सरकार राज्य का पहला जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए चित्रदुर्ग जिले के चल्लकेरे तालुक को चुना गया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री और चित्रदुर्ग जिले के प्रभारी टी. रघुमूर्ति ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ विस्तृत बातचीत की जाएगी। इसके बाद परियोजना पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी।

चित्रदुर्ग के चल्लकेरे में बनेगा विश्वविद्यालय

मंत्री टी. रघुमूर्ति के अनुसार, राज्य के पहले जनजातीय विश्वविद्यालय के लिए लगभग 120 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इसके लिए चित्रदुर्ग जिले के चल्लकेरे क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

सरकार चाहती है कि जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के लिए एक ऐसा संस्थान मिले, जहां उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों पर भी ध्यान दिया जा सके।

हालांकि, प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। विश्वविद्यालय का निर्माण कब शुरू होगा और कितने समय में पूरा होगा, इसकी कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

जनजातीय भाषा और संस्कृति पर होगा विशेष ध्यान

प्रस्तावित विश्वविद्यालय में जनजातीय समुदायों की कला, भाषा, साहित्य और संस्कृति के अध्ययन को प्राथमिकता देने की योजना है।

मंत्री ने बताया कि कई जनजातीय समुदायों के पास पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का बड़ा भंडार है। इस जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है।

विश्वविद्यालय में इन विषयों पर पढ़ाई और शोध की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को जनजातीय समाज की परंपराओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिल सकता है।

इसके साथ ही समुदायों की जीवनशैली, सामाजिक व्यवस्था और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर भी अध्ययन किया जा सकेगा।

शिक्षा के साथ रोजगार से जुड़े कोर्स की योजना

जनजातीय विश्वविद्यालय में केवल पारंपरिक विषयों की पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

मंत्री रघुमूर्ति के मुताबिक, युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण देने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

विश्वविद्यालय में कौन-कौन से कोर्स शुरू होंगे, कितनी सीटें होंगी और प्रवेश के लिए क्या योग्यता रखी जाएगी, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

इन विषयों पर निर्णय विश्वविद्यालय की स्थापना और शैक्षणिक ढांचा तैयार होने के बाद लिया जाएगा।

जनजातीय समुदायों की आर्थिक स्थिति पर भी होगा शोध

सरकार की योजना है कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय जनजातीय समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को समझने के लिए अध्ययन का केंद्र भी बने।

यहां समुदायों के रहन-सहन, रोजगार के साधनों, शिक्षा की स्थिति और विकास से जुड़ी चुनौतियों पर शोध किया जा सकेगा।

ऐसे अध्ययनों से सरकार को जनजातीय समुदायों के लिए योजनाएं तैयार करने में मदद मिल सकती है। खासकर उन क्षेत्रों की पहचान करना आसान हो सकता है, जहां शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है।

हालांकि, इस तरह की शोध गतिविधियां विश्वविद्यालय के भविष्य के शैक्षणिक कार्यक्रमों और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेंगी।

मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आगे बढ़ेगा प्रस्ताव

टी. रघुमूर्ति ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रस्ताव सरकार के पास भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ विस्तृत चर्चा के बाद अगले कदम तय किए जाएंगे।

परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन, वित्तीय व्यवस्था, निर्माण और प्रशासनिक ढांचे जैसे विषयों पर निर्णय लेना होगा।

विश्वविद्यालय की अनुमानित लागत और इसके लिए बजट में कितनी राशि रखी जाएगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण और दूसरे कामों की समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी।

कर्नाटक में जनजातीय शिक्षा के लिए क्यों अहम है योजना?

कर्नाटक में कई जनजातीय समुदाय रहते हैं, जिनकी भाषा, परंपराएं और जीवनशैली अलग-अलग हैं। इन समुदायों के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहा है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 46 भी राज्य को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक तथा आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।

देश में पहले से मध्य प्रदेश के अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय संचालित है। कर्नाटक में प्रस्तावित संस्थान राज्य स्तर पर जनजातीय शिक्षा और शोध के लिए अलग व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम हो सकता है।

फिलहाल विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की स्थापना और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

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