बहामास पहुंचे ब्रिटेन के किंग चार्ल्स, गुलामी के लिए माफी और मुआवजे की मांग तेज, ऐतिहासिक अन्याय पर दिया बयान

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स बहामास पहुंचे, जहां गुलामी के लिए माफी और मुआवजे की मांग उठी। उन्होंने ऐतिहासिक अन्याय स्वीकार किया, लेकिन औपचारिक माफी नहीं मांगी।

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स नौ दिवसीय कैरेबियाई दौरे पर मंगलवार को बहामास पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने गुलामी के इतिहास के लिए ब्रिटेन से माफी और मुआवजे की मांग की। चार्ल्स ने ऐतिहासिक अन्याय स्वीकार किया, लेकिन औपचारिक माफी नहीं मांगी।

नासाउ: ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय का मंगलवार को बहामास पहुंचने पर औपचारिक स्वागत किया गया। हवाई अड्डे पर गवर्नर जनरल डेम सिंथिया ए. प्रैट और प्रधानमंत्री फिलिप डेविस ने उनका अभिवादन किया। पुलिस और रक्षा बलों की टुकड़ियां भी स्वागत समारोह में शामिल हुईं। हालांकि, उनके दौरे के साथ गुलामी के दौर में ब्रिटेन की भूमिका को लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि ब्रिटेन ऐतिहासिक अन्याय के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करे और प्रभावित समुदायों को मुआवजा दे।

क्लिफर्ड पार्क के पास प्रदर्शनकारियों ने उठाई मांग

किंग चार्ल्स हवाई अड्डे से क्लिफर्ड पार्क पहुंचे। यह स्थान बहामास के इतिहास में महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1973 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिलने के अवसर पर यहां समारोह आयोजित हुआ था।

चार्ल्स उस समय प्रिंस ऑफ वेल्स के रूप में बहामास आए थे। करीब पांच दशक बाद वह ब्रिटेन के राजा के तौर पर उसी स्थान पर पहुंचे।

क्लिफर्ड पार्क के आसपास रस्ताफारी समुदाय और अन्य संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। उनके हाथों में मुआवजे की मांग वाले पोस्टर थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ब्रिटेन को गुलाम बनाए गए अफ्रीकी लोगों और उनके वंशजों के साथ हुए अन्याय की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने आर्थिक मुआवजे के साथ औपचारिक माफी की भी मांग की।

ऐतिहासिक अन्याय पर क्या बोले किंग चार्ल्स?

क्लिफर्ड पार्क में आयोजित युवा कार्यक्रम के दौरान किंग चार्ल्स ने बहामास के इतिहास और वहां की संस्कृति पर बात की।

उन्होंने कहा कि बहामास की आज की सांस्कृतिक पहचान के कई सकारात्मक पहलू कठिन और दुखद इतिहास से विकसित हुए हैं।

चार्ल्स के मुताबिक, वर्तमान उपलब्धियों का जश्न मनाने के साथ अतीत में लोगों को झेलनी पड़ी पीड़ा और अन्याय को स्वीकार करना भी जरूरी है।

उनके बयान को गुलामी के इतिहास की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने ब्रिटेन की ओर से औपचारिक माफी नहीं मांगी और न ही किसी मुआवजा योजना की घोषणा की।

स्वागत समारोह में शामिल हुए सैकड़ों बच्चे

विरोध प्रदर्शन के बीच बहामास में किंग चार्ल्स का उत्साहपूर्ण स्वागत भी हुआ।

क्लिफर्ड पार्क में आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराए। स्थानीय कलाकारों ने संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए बहामास की परंपराओं को प्रदर्शित किया।

चार्ल्स ने युवाओं से मुलाकात की और शिक्षा, नवाचार तथा सामाजिक विकास से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।

उनके दौरे के अवसर पर न्यू प्रोविडेंस द्वीप के सरकारी स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया गया था।

गुलामी के लिए मुआवजे की मांग क्यों उठ रही है?

कैरेबियाई देशों का बड़ा हिस्सा सदियों तक यूरोपीय औपनिवेशिक शासन के अधीन रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में अफ्रीकी लोगों को जबरन कैरेबियाई द्वीपों पर लाया गया और उनसे बागानों तथा दूसरे कारोबारों में मजदूरी कराई गई।

इस इतिहास को लेकर बहामास, जमैका और अन्य कैरेबियाई देशों में लंबे समय से बहस जारी है।

मुआवजे की मांग करने वाले संगठनों का तर्क है कि गुलाम व्यापार और औपनिवेशिक शोषण का असर आज भी सामाजिक तथा आर्थिक असमानताओं में दिखाई देता है।

हालांकि, ब्रिटिश सरकार अब तक औपचारिक माफी और आर्थिक मुआवजे की मांग को स्वीकार करने से इनकार करती रही है।

बहामास पहुंचे ब्रिटेन के किंग चार्ल्स, गुलामी के लिए माफी और मुआवजे की मांग तेज, ऐतिहासिक अन्याय पर दिया बयान

जमैका ने भी उठाया मुआवजे का मामला

बहामास के अलावा जमैका में भी ब्रिटेन से ऐतिहासिक मुआवजे की मांग तेज हुई है।

जमैका ने हाल में इस मुद्दे को किंग चार्ल्स के सामने उठाया था। मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया कैरेबियाई क्षेत्र के लिए ब्रिटेन की सर्वोच्च अपीलीय न्यायिक व्यवस्था तक पहुंची है।

कैरेबियाई देशों का संगठन कैरिकॉम भी चाहता है कि गुलामी की विरासत और मुआवजे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा हो।

आगामी राष्ट्रमंडल देशों के सम्मेलन में यह विषय एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

बहामास में पर्यावरण विवाद भी चर्चा में

किंग चार्ल्स की यात्रा के दौरान बहामास में एक पर्यावरणीय विवाद भी सामने आया है।

एक्सुमा द्वीप समूह के सैम्पसन के क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण परियोजना का स्थानीय पर्यावरण संगठन विरोध कर रहे हैं।

बहामास नेशनल ट्रस्ट के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक कैरी के अनुसार, परियोजना में समुद्री दीवार बनाने और समुद्र के भीतर खुदाई का प्रस्ताव है। इससे समुद्री घास और प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संगठन विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन चाहते हैं कि निर्माण से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न हो।

यह मामला बहामास के सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि चार्ल्स की यात्रा से इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ेगा।

नौ दिन में तीन देशों का दौरा करेंगे चार्ल्स

किंग चार्ल्स का कैरेबियाई दौरा 27 अक्टूबर से 4 नवंबर तक निर्धारित है।

बहामास के बाद वह 29 अक्टूबर को गुयाना जाएंगे। इसके बाद एंटीगुआ और बारबुडा में होने वाले राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, व्यापार और विकास के साथ गुलामी की ऐतिहासिक विरासत पर भी चर्चा होने की संभावना है।

फिलहाल बहामास में किंग चार्ल्स के दौरे ने औपनिवेशिक इतिहास, मुआवजे और ब्रिटेन के साथ कैरेबियाई देशों के संबंधों पर बहस को फिर तेज कर दिया है।

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