अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के वरिष्ठ अधिकारी तेहरान पहुंचे। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति पर चर्चा हुई।
तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पश्चिम एशिया में कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने ईरान की राजधानी तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्ध रोकने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने पर चर्चा हुई।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि मुस्लिम देशों को अपने मतभेद दूर करके साझा खतरों का मिलकर सामना करना चाहिए। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद हुई।
ईरानी राष्ट्रपति ने मुस्लिम देशों को दिया एकजुटता का संदेश
राष्ट्रपति पजशकियान ने बैठक में कहा कि पश्चिम एशिया के देशों को अपनी सुरक्षा के लिए बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने के बजाय आपसी सहयोग बढ़ाना होगा। उन्होंने मुस्लिम देशों से क्षेत्रीय विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की। पजशकियान के मुताबिक, अलग-अलग देशों के बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दे पर उनका साथ आना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ईरान ऐसे किसी भी समझौते का समर्थन करेगा, जिससे क्षेत्रीय एकता मजबूत हो, देशों के बीच भरोसा बढ़े और आपसी सहयोग का रास्ता खुले। ईरानी राष्ट्रपति ने दबाव और सैन्य धमकियों के जरिए देशों को झुकाने की कोशिशों का भी विरोध किया।
तेहरान की बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस अहम बैठक में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए। ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के अलावा विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसेन रेजाई मौजूद रहे।
चारों देशों के प्रतिनिधियों ने सुरक्षा सहयोग के साथ क्षेत्र में तनाव कम करने के उपायों पर विचार किया। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में बातचीत जारी रखने और शांति एवं सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई।
मक्का रक्षा समझौते की क्या भूमिका है?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा। समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा मजबूत करना और बाहरी सैन्य खतरों के खिलाफ सहयोग बढ़ाना है।
सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति मामलों के उप मंत्री रायेद क्रिमली ने बताया कि तेहरान की बैठक तनाव कम करने के प्रयासों का हिस्सा है। यह पहल कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भी समर्थन देती है।
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ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा हमले की चेतावनी दी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 23 अक्टूबर को फ्लोरिडा में आयोजित रैली के दौरान ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की संभावना जताई थी। उन्होंने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' जैसे अभियान को दोबारा चलाने की बात कही, लेकिन संभावित कार्रवाई की तारीख या रणनीति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। अप्रैल में संघर्षविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। ट्रम्प के हालिया बयान ने दोबारा बड़े हमले की आशंका बढ़ा दी है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद
दोनों देशों के बीच विवाद की बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन की क्षमता सीमित करे और इस विषय पर नया समझौता स्वीकार करे। ईरान पहले ही अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने से इनकार कर चुका है। उसका कहना है कि परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
वहीं, अमेरिका और इजराइल को आशंका है कि अधिक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। यही मतभेद बातचीत आगे बढ़ाने में बड़ी बाधा बना हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव से बढ़ी चिंता
युद्ध का असर फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार पर भी पड़ा है। यह रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान ने इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू की है। इससे ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है।
तेहरान की बैठक को इसी संकट से बाहर निकलने की एक कूटनीतिक कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, चारों देशों के बीच बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
पश्चिम एशिया में शांति वार्ता, अमेरिका-ईरान संबंधों और संभावित समझौतों की ताजा जानकारी के लिए आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों पर नजर बनाए रखें।









