इजराइल में आज संसदीय चुनाव, नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच कड़ी टक्कर, ओपिनियन पोल में विपक्ष को बढ़त

इजराइल चुनाव 2026 में आज 120 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। गादी आइजनकोट और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मुकाबला है। जानें ओपिनियन पोल और बड़े चुनावी मुद्दे।

इजराइल में आज संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के बीच मुकाबला है। ओपिनियन पोल में विपक्ष को बढ़त मिली है, लेकिन सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।

यरुशलम: इजराइल में मंगलवार, 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव हो रहे हैं। स्थानीय समय के अनुसार मतदान सुबह सात बजे शुरू होना निर्धारित है, जो भारतीय समय के मुताबिक सुबह 9:30 बजे है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट हैं, जिनकी याशार पार्टी को चुनाव से पहले कई सर्वेक्षणों में अच्छी बढ़त मिली है। इजराइल में यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब देश के भीतर सुरक्षा, सेना में भर्ती और सरकार की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि नेतन्याहू सरकार में बने रहेंगे या देश को नया नेतृत्व मिलेगा। 

ओपिनियन पोल में आइजनकोट आगे, लेकिन बहुमत मुश्किल

चुनाव से पहले सामने आए ज्यादातर प्रमुख सर्वेक्षणों में गादी आइजनकोट की याशार पार्टी ने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को पीछे छोड़ा है। हालांकि, अलग-अलग सर्वेक्षणों में दोनों राजनीतिक खेमों के बीच सीटों का अंतर ज्यादा नहीं है। 23 अक्टूबर को जारी प्रमुख टेलीविजन सर्वेक्षणों में नेतन्याहू विरोधी दलों को लगभग 52 से 56 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। वहीं नेतन्याहू समर्थक दल भी मुकाबले में बने हुए हैं।

इजराइल की संसद नेसेट में 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। सर्वेक्षणों में किसी भी प्रमुख गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण चुनाव के बाद छोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। 

इजराइल में कैसे चुना जाता है प्रधानमंत्री?

इजराइल की चुनाव व्यवस्था भारत से अलग है। यहां मतदाता सीधे प्रधानमंत्री या किसी निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार को नहीं चुनते। पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है और लोग अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं।

पार्टी को पूरे देश में मिले वोटों के अनुपात में संसद की सीटें आवंटित की जाती हैं। हालांकि, संसद में पहुंचने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वैध वोट हासिल करने होते हैं। चुनाव से पहले पार्टियां उम्मीदवारों की सूची जारी करती हैं। किसी पार्टी को जितनी सीटें मिलती हैं, उसकी सूची में शुरुआती स्थानों पर मौजूद उतने उम्मीदवार सांसद बन जाते हैं।

चुनावी नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों से बातचीत करके उस नेता को सरकार बनाने का मौका देते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना होती है। 

हमास के 7 अक्टूबर हमले की जांच बड़ा चुनावी मुद्दा

इस चुनाव में 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किया गया हमला प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। उस दिन सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था में हुई चूक को लेकर नेतन्याहू सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है।

विपक्ष इस हमले की स्वतंत्र जांच और राजनीतिक जवाबदेही की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि इतनी बड़ी सुरक्षा चूक के कारणों की पूरी जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर नेतन्याहू अपने सुरक्षा अनुभव और क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान लिए गए फैसलों को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। इस कारण राष्ट्रीय सुरक्षा पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। 

सेना में भर्ती से छूट पर क्यों है विवाद?

इजराइल में अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय, जिसे हरेदी कहा जाता है, की अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। इस व्यवस्था की शुरुआत 1948 में सीमित संख्या में धार्मिक छात्रों को छूट देने से हुई थी। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा और अब इसे लेकर समाज में मतभेद हैं।

विरोध करने वालों का कहना है कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी पात्र नागरिकों को उठानी चाहिए। नेतन्याहू के राजनीतिक सहयोगियों में हरेदी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियां शामिल हैं, जबकि आइजनकोट सैन्य या वैकल्पिक नागरिक सेवा में व्यापक भागीदारी के पक्षधर हैं।

चुनाव के बाद गठबंधन पर रहेगी नजर

चुनाव में याशार और लिकुड के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाला गठबंधन, वामपंथी दल और अरब राजनीतिक पार्टियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मतदान स्थानीय समय के अनुसार रात 10 बजे समाप्त होगा। इसके बाद एग्जिट पोल सामने आएंगे, जबकि आधिकारिक नतीजों की पुष्टि में अधिक समय लग सकता है।

यदि किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो सरकार बनाने के लिए कई दलों के बीच बातचीत जरूरी होगी। ऐसे में सबसे अधिक सीटें हासिल करने वाली पार्टी का नेता भी प्रधानमंत्री बनेगा, यह तय नहीं माना जा सकता।

Leave a comment